Dr Major Rajesh Bhardwaj Advice: सेहतमंद रहने के लिए सर्दियों में बेहद जरूरी हैं ये आदतें, कमजोर इम्यूनिटी वाले लोग रखें खास ध्यान
धीरे-धीरे ठंड बढ़ने लगी है और तापमान में लगातार आ रहे उतार-चढ़ाव के कारण कई लोगों को सर्दी, खांसी और गले में खराश जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। खासकर बच्चों, बुजुर्गों और अस्थमा जैसी सांस संबंधी बीमारियों से पीड़ित लोगों को इस मौसम में अधिक सतर्क रहने की आवश्यकता होती है। हालांकि, ठंड का मौसम सीधे तौर पर वायरल संक्रमण का कारण नहीं बनता है, लेकिन तापमान में बदलाव, लंबे समय तक घरों के अंदर बंद रहना और हवा का संचार कम होने के कारण वायरस तेजी से फैलने लगते हैं। इसके अलावा, रोजमर्रा की कुछ ऐसी आदतें भी हैं जिन्हें हम अनजाने में अपना लेते हैं और वे सर्दियों में हमारे स्वास्थ्य के लिए खतरनाक साबित हो सकती हैं।
⚠️ सर्दियों में बीमारी का बड़ा कारण बनती हैं ये 7 गलतियां; डॉक्टर राजेश भारद्वाज ने दी खास सलाह
मेडफर्स्ट ईएनटी सेंटर के सलाहकार डॉ. (मेजर) राजेश भारद्वाज ने बताया कि मौसम में बदलाव के दौरान कुछ जरूरी सावधानियां बरतकर श्वसन संबंधी संक्रमण के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है:
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मौसम के अनुकूल कपड़े न पहनना: सुबह और रात के समय बाहर जाते समय हमेशा पर्याप्त गर्म कपड़े पहनें। ठंड के हिसाब से कपड़ों की कई परतें (Layers) पहनना सेहत के लिए ज्यादा बेहतर होता है।
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कम पानी पीना: भले ही सर्दियों के दिनों में प्यास कम लगती है, लेकिन हमारे शरीर को हाइड्रेटेड रहने के लिए पर्याप्त पानी की जरूरत होती है। कम पानी पीने से गले और नाक की श्लेष्मा झिल्ली सूख सकती है, इसलिए दिनभर पर्याप्त तरल पदार्थ लेते रहें।
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हाथों की स्वच्छता की अनदेखी: बाहर से घर लौटने के बाद, विशेषकर भीड़भाड़ वाले सार्वजनिक इलाकों में जाने के बाद, अपने हाथों को साबुन से अच्छी तरह धोएं। गंदे हाथों से अपनी आंखों, नाक और मुंह को छूने से बचना चाहिए।
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कमरों में हवा का आवागमन रोकना: ठंड के डर से खिड़कियां और दरवाजे हर समय पूरी तरह बंद रखना सही नहीं है। जहां तक संभव हो, कमरे में ताजी और शुद्ध हवा आने का प्रबंध रखें।
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बीमारी के लक्षणों को नजरअंदाज करना: हल्की छींक आना, गले में खराश, खांसी और बुखार जैसे शुरुआती लक्षणों को कभी भी हल्के में न लें। यदि ये लक्षण ठीक न हों या लंबे समय तक बने रहें, तो तुरंत डॉक्टर से परामर्श लें।
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नींद और संतुलित आहार की कमी: पर्याप्त नींद न लेना और खराब खानपान शरीर की प्राकृतिक रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) को कमजोर कर देता है। ऐसे में ताजे फलों और हरी सब्जियों से भरपूर संतुलित आहार लें।
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खुद से दवा लेना (Self-Medication): सर्दी-जुकाम या खांसी होने पर डॉक्टर की सलाह के बिना हर बार एंटीबायोटिक्स का सेवन न करें। आम सर्दी-जुकाम ज्यादातर वायरल संक्रमण के कारण होता है और एंटीबायोटिक्स वायरस पर असर नहीं करती हैं।
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विशेष सावधानी और खतरे के संकेत:
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संवेदनशील लोग: अस्थमा, क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (COPD), हृदय रोग और कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले लोगों को मौसम बदलते ही अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए। डॉक्टरों द्वारा अनुशंसित टीकाकरण (Vaccination) करवाने से भी गंभीर संक्रमण का खतरा कम हो जाता है।
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आपातकालीन लक्षण: यदि आपको सांस लेने में कठिनाई, सीने में तेज दर्द, लगातार अधिक बुखार या लक्षण बिगड़ते हुए महसूस हों, तो बिना देर किए तुरंत चिकित्सा सहायता (Medical Help) लें। सर्दियों में स्वस्थ रहने के लिए उचित पहनावा, पर्याप्त पानी, स्वच्छता और पूरी नींद जैसी छोटी आदतों को अपनी जीवनशैली का हिस्सा बनाएं।