World Brain Day 2026: बच्चों के दिमाग को कमजोर बना रहीं ये 3 आदतें
वर्ल्ड ब्रेन डे पर जानें बच्चों की ब्रेन हेल्थ और आईक्यू पर असर डालने वाली खराब आदतें। अत्यधिक स्क्रीन टाइम और जंक फूड पहुंचा रहा है मानसिक विकास को नुकसान।
आज यानी 22 जुलाई के दिन पूरे विश्व में ब्रेन डे मनाया जाता है. इसका उद्देश्य लोगों को ये समझाना है कि दिमाग का ठीक रहना हमारे लिए कितना जरूरी है. मेंटल हेल्थ अगर बिगड़ी हुई है तो लाइफ की हर चीज डिस्टर्ब होती है. वर्ल्ड ब्रेन डे के मौके पर हम बच्चों के दिमाग से जुड़ी जरूरी चीजों पर बात करने जा रहे हैं. आज के समय में मोबाइल का यूज यानी हद से ज्यादा स्क्रीन टाइम की आदत बच्चों के दिमाग को कमजोर बना रही है. इसके अलावा उनकी फिजिकल एक्टिविटी भी कम हो गई है.
दरअसल, बच्चों का दिमाग लगातार डेवलपमेंट के प्रोसेस में रहता है. शुरू के सालों इनके सीखने की पावर, मेमोरी, फोकस और प्रॉब्लम को जानने की एबिलिटी तेजी से डेवलप होती है. वर्ल्ड ब्रेन डे के मौके पर जानें कौन सी रोजमर्रा खराब आदतें बच्चों की ब्रेन हेल्थ, आईक्यू और फोकस पर सीधा असर डाल सकती हैं.
ब्रेन पर बुरा असर डालने वाली आदतें
डॉक्टर सोनिया लाल गुप्ता (सीनियर न्यूरोलॉजिस्ट, स्ट्रोक स्पेशलिस्ट, ज्वाइंट मैनेजिंग डायरेक्टर, मेट्रो ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल) का कहना है कि देर रात तक मोबाइल, टीवी या अन्य स्क्रीन देखने की आदत नींद न आने की प्रॉब्लम बन सकती है. इस वजह से बच्चों में चिड़चिड़ापन, कम ध्यान और सीखने की क्षमता में कमी आ सकती है.
एक्सपर्ट बताती हैं कि आजकल बच्चे फिजिकली कम एक्टिव रहते हैं, इस वजह से भी उनकी ब्रेन हेल्थ पर बुरा असर पड़ता है.
ज्यादा जंक फूड, शुगर और प्रोसेस्ड फूड का सेवन बच्चों की ऊर्जा और एकाग्रता को प्रभावित कर सकता है.
ध्यान रखें ये बातें
पूरी नींद और बैलेंस डाइट- बच्चों की बेस्ट मेंटल हेल्थ डेवलपमेंट के लिए अच्छी नींद बहुत जरूरी है. नींद के दौरान दिमाग दिनभर सीखी गई चीजों को व्यवस्थित करता है और याददाश्त मजबूत होती है. मेंटल हेल्थ के डेवलप होने के लिए न्यूट्रिएंट्स से भरपूर डाइट जरूरी है. एक्सपर्ट कहती हैं कि प्रोटीन, ओमेगा-3 फैटी एसिड, आयरन, विटामिन और मिनरल्स से भरपूर भोजन दिमाग की कार्यक्षमता को बेहतर बनाने में मदद करता है.
बचपन की आदतों का न्यूरोलॉजिकल विकास पर असर- बचपन और टीनएज में दिमाग में न्यूरोप्लास्टिसिटी की प्रक्रिया तेजी से होती है, जिसमें नए न्यूरल कनेक्शन बनते हैं. नींद की कमी, लगातार स्क्रीन एक्सपोजर और तनाव इस प्रक्रिया को प्रभावित कर सकते हैं, जिससे कॉग्निटिव फंक्शन, ध्यान और सीखने की क्षमता पर असर पड़ सकता है. इसलिए बच्चों को पूरी नींद लेनी चाहिए और कम से कम स्क्रीन टाइम रखना चाहिए.
फिजिकली एक्टिव रहना जरूरी- आज के डिजिटल दौर में बच्चे मोबाइल और स्क्रीन पर ज्यादा समय बिताने लगे हैं. जबकि खेल-कूद और एक्सरसाइज से दिमाग में ब्लड फ्लो बेहतर होता है. इस तरह जिससे फोकस करने और नई चीजें सीखने की क्षमता बढ़ती है. सिर्फ किताबें पढ़ने के बजाय बच्चों को चित्रकला, म्यूजिक, पहेलियां, कहानी पढ़ने और नई चीजें सीखने के मौके देने चाहिए. ये गतिविधियां दिमाग के अलग-अलग हिस्सों को एक्टिव करती हैं और क्रिएटिव माइंड को विकसित करती हैं.
बच्चों पर पढ़ाई का ज्यादा प्रेशर भी उनके मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है. माता-पिता को बच्चों से संवाद बनाए रखना चाहिए और उनकी रुचियों को समझते हुए पॉजिटिव माहौल देना चाहिए.

