World Thyroid Day: थायराइड से जुड़े 5 बड़े मिथक और उनके पीछे का सच

क्या थायराइड की दवा उम्र भर खानी पड़ती है? क्या यह सिर्फ महिलाओं की बीमारी है? वर्ल्ड थायराइड डे पर जानें इस गंभीर बीमारी से जुड़े मिथक, लक्षण और बचाव के तरीके।

 
थायराइड क्यों होता है

थायराइड ग्रंथि से हार्मोन का ज्यादा बनना या कम बनना.. दोनों ही सिचुएशन बीमारी की चपेट में आने का संकेत है. थायराइड को लेकर कई मिथक पर भरोसा कर लिया जाता है. कुछ लोग मानते हैं कि अगर ये बीमारी हो गई तो इसकी दवा को जिंदगी भर लेना पड़ता है. ऐसा भी कहा जाता है कि ये सिर्फ महिलाओं में होने वाली बीमारी है. थायराइड को लेकर ऐसे कई मिथक लोगों के बीच पॉपुलर है. हर साल 25 मई को वर्ल्ड थायराइड डे मनाया जाता है ताकि लोग ये समझ पाए कि ये भी एक गंभीर दिक्कत है. इसके होने पर ज्यादातर मामलों में वजन का घटना या तेजी से घटना प्रभावित करता है.

हां, ये सच है कि महिलाओं में इसके होने की आंशका ज्यादा रहती है लेकिन ऐसा जरूरी नहीं है. वर्ल्ड थायराइड डे के मौके पर हम आपको इस बीमारी से जुड़े कुछ मिथक और जरूरी जानकारी बताने जा रहे हैं.

क्यों होती है थायराइड की बीमारी

दरअसल, हमारे गले में थायराइड ग्रंथि होती है जिसका आकार बटरफ्लाई जैसा होता है. जो खाना हम खाते हैं उसे एनर्जी में तब्दील करने का काम इसका होता है.

थायराइड से जुड़े मिथक

मिथक- जिंदगी भर दवा लेना

फैक्ट- लोगों में ये भ्रम फैला हुआ है कि अगर किसी को थायराइड हो गया है तो उसे जिंदगी भर दवा लेनी पड़ती है. एक्सपर्ट कहते हैं कि कुछ मामलों में लंबे समय तक दवाएं चलती हैं लेकिन ऐसा हर मरीज के साथ हो जरूरी नहीं है. लाइफस्टाइल में सुधार और सही इलाज से डोज बदल सकती है.

मिथक- सिर्फ महिलाओं में होता है थायराइड

फैक्ट- ज्यादातर मामले महिलाओं में देखे जाते हैं लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं है कि ये सिर्फ महिलाओं को होने वाली बीमारी है. पुरुष और बच्चे भी इसकी चपेट में आस सकते हैं. पुरुषों में अक्सर इस बीमारी से लक्षण नजरअंदाज कर दिए जाते हैं.

मिथक- ये सिर्फ गले की बीमारी है

फैक्ट- थायराइड की ग्रंथि हमारे गले में मौजूद होती है लेकिन इसका सिस्टम बिगड़े तो पूरे शरीर पर असर पड़ता है. ये सिर्फ गले की बीमारी नहीं है. इसके होने पर हार्ट रेट का बिगड़ना, एनर्जी डाउन रहना, नींद न आना समेत कई हेल्थ प्रॉब्लम्स होने लगती हैं.

थायराइड होने के कारण

एनसीबीआई की रिपोर्ट बताती है कि भारत में करीब 4.2 करोड़ लोग थायराइड की चपेट में हैं. एक्सपर्ट बताते हैं कि रोग होने के पीछे कुछ कारण होते हैं. जेनेटिक, ऐसी दवा जिसमें आयोडीन की मात्रा अधिक हो, बिना आयोडीन वाला नमक. इसके अलावा स्वप्रतिरक्षी रोग होने से भी जोखिम बढ़ता है. खून की कमी, टाइप-1 सीलिएक रोग, एडिसन रोग ,ल्यूपस, गठिया और स्जोग्रेन सिंड्रोम भी इसकी वजह हो सकते हैं.

थायराइड के टाइप

थायराइड कई तरह के होते हैं जिनमें सबसे ज्यादा कॉमन हाइपोथायरायडिज्म है. इस कंडीशन में ग्लैंड से बहुत ही कम मात्रा में हार्मोन निकलते हैं. ऐसे में वजन का बढ़ना, डाइजेशन में प्रॉब्लम, हार्ट रेट स्लो होना, स्किन में ड्राइनेस और कब्ज होने जैसे लक्षण नजर आने लगते हैं. पूरी ओवरऑल बॉडी में छोटे-छोटे बदलाव नजर आने लगते हैं. ज्यादातर मामलों में लोगों को इस बीमारी के बारे में काफी देर से पता चलता है.

इसका दूसरा टाइप हाइपरथायरायडिज्म (Hyperthyroidism) है जिसमें ग्रंथि से जरूरत से ज्यादा हार्मोन निकालने लगता है. इस टाइप से ग्रस्त होने पर वजन तेजी से गिरने लगता है. इसके अलावा दूसरे लक्षण भी नजर आते हैं जिसमें हार्ट रेट का बिगड़ना, स्किन का अजीब सा होना, हमेशा थकान, परेशान रहना और आलस बना रहना शामिल है. इस कंडीशन में मेटाबॉलिज्म बहुत ही लो हो जाता है. मसल्स वीक पड़ने लगती हैं. जोड़ों में दर्द. नींद आने में दिक्कतें.