Haryana Politics News: दुष्यंत चौटाला का चुनाव आयोग पर हमला, बोले- चुनाव का नया 'कॉम्बो पैक' चल रहा है

पूर्व डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला ने चुनाव आयोग और एसआईआर प्रक्रिया पर उठाए बड़े सवाल। कहा- आयोग पर उठ रहा जनता का शक जायज है।
 
EVM and voter list news

चंडीगढ़ : हरियाणा के पूर्व उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने चुनाव आयोग से जुड़े नए विवाद पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि आयोग की कार्यप्रणाली पर लोगों का विश्वास खत्म होता जा रहा है, जिसकी सबसे बड़ी वजह केंद्रीय चुनाव आयोग ही है।

उन्होंने कहा कि चाहे SIR पर चुनाव आयुक्तों की आपसी असहमति हो, ईवीएम गड़बड़ियों की जांच न होना हो या फिर आदर्श आचार संहिता के दौरान सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग हो, ये सब जनता के वोट के अधिकार एक के बाद एक बड़ी-बड़ी चोटें है। 

दुष्यंत चौटाला ने चुनाव आयोग पर कई बड़े सवाल उठाते हुए कहा कि क्या भारत में आजकल चुनाव का नया कॉम्बो पैक चल रहा है ? उन्होंने कहा कि चुनाव के समय आचार संहिता लागू होती है, लेकिन सत्ताधारी पार्टी के लिए नहीं, EVM है, लेकिन उसमें बहुत सारे संदेह है और अब तो एसआईआर के दौरान वोटर लिस्ट है, लेकिन टेंशन है। आज चुनाव आयोग के सामने ऐसे तमाम बड़े-बड़े सवाल मुंह बाए खड़े हैं, जिनके स्पष्ट जवाब जनता को मिलने चाहिए।  
 
दुष्यंत चौटाला ने कहा कि चुनाव के दौरान आचार संहिता में भेदभाव क्यों ? सत्ता में बैठी पार्टी द्वारा चुनाव के समय सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग करके पोलिंग के दो दिन पहले खातों में पैसे भेज दिए जाते है, लेकिन कार्रवाई कुछ नहीं होती। क्या चुनाव आयोग के नियम सिर्फ विपक्षी पार्टियों के लिए ही लागू होते है ?

 इसी तरह जब EVM की गड़बड़ियों पर सवाल उठते है तो आयोग मशीन में कोई गड़बड़ी नहीं हो सकती की बात कह कर अपना पल्ला झाड़ लेता है और सुप्रीम कोर्ट के दखल के बाद आयोग अपनी सफाईयां दे देता है। उन्होंने कहा कि गड़बड़ियों की जांच के नियम बदलकर आम जनता और प्रत्याशियों को जांच की मांग करने तक ही सीमित कर दिया जाता है। 
 
पूर्व डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला ने कहा कि अब SIR के नाम पर जायज मतदाताओं के वोट काट कर उन्हें वोट के अधिकार से दूर किया जा रहा है। बिहार में SIR के दौरान करीब 65 लाख नाम ड्राफ्ट लिस्ट से गायब हो गए, पश्चिम बंगाल में लाखों वोटर्स को पोलिंग से दूर रखा गया। हरियाणा और दिल्ली में बड़ी संख्या में वोटर्स को एसआईआर के नाम पर प्रताड़ित किया जा रहा है।

ऐसे में तो आयोग की खराब कार्यप्रणाली के चलते न केवल लोगों की चुनावों में भागीदारी घटेगी बल्कि ये लोकतंत्र के लिए बहुत ज्यादा खतरनाक साबित होगी। उन्होंने कहा कि वोटिंग से ठीक पहले वोटर लिस्ट में बदलाव करना कतई जायज नहीं है, क्योंकि आम मतदाताओं को मतदान के समय बूथ पर जाकर पता चलेगा कि उसका वोटर लिस्ट में नाम ही नहीं है तो वह क्या करेगा ? यानी कि लोकतंत्र की परिभाषा तो आयोग द्वारा उसी समय ही समाप्त कर दी जाएगी।
 
दुष्यंत चौटाला ने कहा कि सबसे बड़ा सवाल ये है कि चुनाव आयोग के भीतर से उठ रही विद्रोह की आवाजों से ये स्पष्ट हो गया है कि आज स्थानीय अधिकारी भी एक सॉफ्टवेयर के आगे कुछ नहीं कर सकता, क्योंकि सॉफ्टवेयर चुनाव अधिकारी से ऊपर उठकर वोट काट सकता है और उस सॉफ्टवेयर का कंट्रोल केंद्रीय चुनाव आयोग के हाथ में है।

ऐसे में आयोग की कार्यप्रणाली पर शक होना लाजमी है। इतना सब कुछ होने के बाद कुछ लोग मासूमियत ये पूछते है कि जनता को चुनाव आयोग पर भरोसा क्यों नहीं है ? दुष्यंत ने कहा कि जनता को सीधे जवाब और एक समान नियम चाहिए।
 
पूर्व उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने कहा कि चुनाव आयोग की एकसूत्री कार्यशैली से बहुत ज्यादा शंकाएं पैदा हो रही है। दुष्यंत ने मांग करते हुए कहा कि आयोग को अपने फैसलों, कार्रवाइयों और आंकड़ों की फाइलें जनता के बीच सार्वजनिक करके काम करना चाहिए ताकि जनता खुद ये फैसला ले सके कि काम सही हो रहा है या फिर गलत ताकि आयोग पर ये दबाव हो कि जनता सब देख रही है।

दुष्यंत ने कहा कि बात चुनाव के जीत और हार की नहीं है, बल्कि लोकतंत्र पर विश्वास की है। ऐसे में चुनाव आयोग का कार्य पूरी पारदर्शिता से होना बेहद जरूरी है।