बिठूर ब्रह्मावर्त घाट: जहाँ से हुई थी सृष्टि की रचना, जानें पूरा इतिहास
क्या आप जानते हैं कि सृष्टि की रचना कहाँ से शुरू हुई थी? ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार, बिठूर का ब्रह्मावर्त घाट ही संसार की उत्पत्ति का केंद्र है। पढ़ें पूरी कथा।
हिंदू धर्म में ब्रह्मा जी को सृष्टी का रचियता बताया जाता है. ब्रह्मा जी ने इस संसार की रचना की है, लेकिन संसार की रचना का काम प्रारंभ होने वाले स्थान को लेकर मतभेद हैं. अलग-अलग पुराणों में संसार की रचना को लेकर भिन्न बातें बताई गई हैं. लेकिन ब्रह्मवैवर्त पुराण के ब्रह्मखंड के पहले और दूसरे अध्याय में ये बात साफ-साफ बताई गई है कि ब्रह्मा जी ने संसार की रचना कहां प्रारंभ की थी?
ब्रह्मवैवर्त पुराण के ब्रह्मखंड के पहले और दूसरे अध्याय में बताया गया है कि ब्रह्मा जी ने संसार को रचने का काम कानपुर नगर से मात्र 20 किलोमीटर की दूरी पर स्थित बिठूर के ब्रह्मावर्त घाट पर प्रारंभ किया था. इस जगह को धरती का ‘नाभि स्थान’ माना जाता है. आइए इसके बारे में विस्तार से जानते हैं.
ब्रह्मावर्त घाट का इतिहास
ब्रह्मा जी ने संसार को रचने से पहले 99 अश्वमेध यज्ञ किए थे. ब्रह्मा जी ने ये यज्ञ बिठूर के एक घाट पर किए थे, जहां गंगा नदी बहती है. इस बात का वर्णन ब्रह्मवैवर्त पुराण में विस्तार से किया गया है. पहले इस स्थान का नाम ब्रह्मावर्त था मगर बाद में छोटा होते-होते बिठूर पड़ गया. बिठूर के इस घाट पर एक ब्रह्म खूंटी है. यह धरती का एक उठा हुआ हिस्सा है, जिसमें एक छेद भी है, इसलिए इसको ‘धरती की नाभि’ कहा जाता है.
इंसान के निर्माण की शुरुआत नाभि से ही होती है. यही नहीं किसी भी चीज को बनाने की शुरुआत भी एक केंद्र बिंदु से की जाती है. हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार, ब्रह्मा जी ने ‘धरती की नाभि’ से ही संसार की रचना का काम प्रारंभ किया था.
यहां आज भी हैं ब्रह्मा जी के पैरों के निशान
आज भी यहां पर ब्रह्मा जी के पैरों के निशान नजर आते हैं. यहां मदिर की एक शिला पर बड़े-बड़े पैरों के निशान दिखाई देते हैं, जिसको पौराणिक कथाओं में ब्रह्मा जी का पैर बताया गया है. उनके चरणों की आज भी पूजा की जाती है. मान्यता है कि संसार की रचना के बाद आबादी बढ़ाने के उद्देश्य से ब्रह्मा जी ने नर और नारी भी बनाई. कहा जाता है कि ब्रह्मा जी ने यहीं पर मनु और शतरूपा को बनाया था. यही पृथ्वी के प्रथम स्त्री और पुरुष माने गए.

