Vastu Guidelines News: आरती के तुरंत बाद पूजा स्थल को सूना छोड़ना होता है अशुभ, पढ़ें जरूरी सावधानियां
क्या आप भी दिवाली की रात माता लक्ष्मी की कृपा पाने के लिए पूरी तैयारी करते हैं, लेकिन क्या आपको पता है कि छोटी-सी लापरवाही भी सारा फल बेकार कर सकती है? रोशनी और खुशियों का पावन त्योहार दिवाली इस साल 8 नवंबर 2026 (रविवार) को पूरे देश में बहुत धूमधाम के साथ मनाया जाएगा। इस खास रात को घरों में मां लक्ष्मी और गणेश जी की पूजा के दौरान कुछ कड़े नियमों और सावधानियों का पालन करना बेहद जरूरी होता है। यदि आप चाहते हैं कि आपके घर में हमेशा बरकत बनी रहे, तो पूजन से जुड़ी इन जरूरी गलतियों को समय रहते जान लेना चाहिए।
🧹 किन बातों का रखें विशेष ध्यान? तन और मन की शुद्धता के बिना अधूरी है पूजा
स्वच्छता और पवित्रता के नियम:
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वस्त्रों की शुद्धता: दिवाली की शाम जब आप मां लक्ष्मी के स्वागत के लिए बैठते हैं, तो सबसे पहले अपने घर की और खुद की शुद्धता का पूरा ख्याल रखना चाहिए। कभी भी गंदे या फटे हुए कपड़ों को पहनकर पूजा में नहीं बैठना चाहिए, क्योंकि इससे देवी मां नाराज हो जाती हैं।
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आसपास की सफाई: पूजा स्थल के आसपास किसी भी प्रकार की गंदगी या जूठे बर्तन नहीं होने चाहिए, क्योंकि साफ-सुथरी जगह पर ही माता का वास होता है। स्नान करने के बाद ही पूजा की थाली सजाएं और मन में किसी के प्रति भी मैला विचार न रखें। जब तन और मन पवित्र होते हैं, तभी अर्पित सामग्री भगवान तक पहुंचती है।
💔 खंडित मूर्तियों और टूटे हुए दीपकों का इस्तेमाल करने से बचें; घर में आती है नकारात्मकता
सामग्री के चयन से जुड़ी सावधानियां:
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साबुत मूर्तियां: दीपावली के पावन अनुष्ठान में कभी भी खंडित मूर्तियों या टूटी हुई सामग्री का इस्तेमाल करने की भूल नहीं करनी चाहिए। मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की ऐसी मूर्तियां जिनकी कोई भी दिशा या अंग चटक चुका हो, उन्हें पूजा में रखने से अशुभ फल मिलता है।
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साबुत दीये: पूजा के समय जलाए जाने वाले दीपक भी कहीं से चटके या टूटे हुए नहीं होने चाहिए, क्योंकि यह घर में नकारात्मकता को बुलावा देते हैं। हमेशा साफ-सुथरे और साबुत दीयों का ही चयन करें ताकि प्रकाश ठीक से फैल सके।
🧭 पूजन के समय सही दिशा और नियमों का पालन; पूर्व या उत्तर दिशा की ओर रखें मुख
दिशा और अनुशासन के महत्वपूर्ण बिंदु:
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सही दिशा: पूजा करते समय सही दिशा का ज्ञान होना बहुत जरूरी है। मां लक्ष्मी की प्रतिमा स्थापित करते समय ध्यान रखें कि आपका मुख हमेशा पूर्व या उत्तर दिशा की ओर ही होना चाहिए। दक्षिण दिशा की तरफ मुंह करके कभी भी देवी की पूजा न करें।
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एकाग्रता: पूजन के बीच में से उठना या फालतू बात करना बहुत अशुभ माना जाता है। जब तक आरती और भोग की पूरी प्रक्रिया संपन्न न हो जाए, तब तक अपना पूरा ध्यान केवल ईश्वर की भक्ति में ही लगाएं।
🕯️ आरती के तुरंत बाद पूजा स्थल को सूना न छोड़ें; मुख्य दरवाजे का दीया जलता रहना चाहिए
पूजा के समापन से जुड़े नियम:
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दीयों की सुरक्षा: कई लोग दिवाली की रात आरती समाप्त होते ही तुरंत वहां से उठकर चले जाते हैं और दीयों को अकेला छोड़ देते हैं। शास्त्रों के अनुसार ऐसा करना मना होता है। घर के मुख्य दरवाजे पर जलाए गए दीये को रात भर सुरक्षित और प्रज्वलित रखना चाहिए।
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प्रसाद वितरण: पूजा के बाद प्रसाद का आदर के साथ वितरण करें और उसे यूं ही बिखरा हुआ न छोड़ें। इन नियमों का पालन करने से ही दिवाली की असली सफलता मिलती है और घर में सुख-शांति बनी रहती है।