सोमवार व्रत: भगवान शिव की पूजा में भूलकर भी न चढ़ाएं ये 6 चीजें
सोमवार के दिन शिव जी की पूजा में किन चीजों का प्रयोग वर्जित है? जानिए क्यों शिव पूजा में हल्दी, तुलसी, शंख और केतकी के फूल नहीं चढ़ाने चाहिए। पढ़ें संपूर्ण जानकारी।
हिंदू धर्म में भगवान शिव को कल्याण करने वाला देवता माना जाता है. शास्त्रों के अनुसार, भगवान शिव ऐसे देवता हैं, जो एक लोटा जल भर से प्रसन्न हो जाते हैं. सोमवार का दिन भगवान शिव को समर्पित किया गया है. इस दिन भगवान शिव की विशेष पूजा अर्चना की जाती है. साथ ही व्रत रखा जाता है. धार्मिक मान्यता है कि इस दिन महादेव पूजन और व्रत से बहुत प्रसन्न होते हैं और आशीर्वाद प्रदान करते हैं.
महादेव के आशीर्वाद से जीवन कींं सभी परेशानियां और संकट दूर हो जाते हैं. घर में सुख-समृद्धि रहती है, लेकिन शास्त्रों में सोमवार को की जाने वाली शिव जी पूजा में कुछ खास बातों का ध्यान रखने के लिए कहा गया है. शिव पूजा के कुछ विशेष नियम हैं. अगर शिव जी पूजा के नियमों की अनदेखी की जाती है, तो भोलेनाथ नाराज हो सकते हैं, जिससे पूजा का फल नष्ट हो सकता है.
शिव जी पूजा में रखें इन बातों का ध्यान
हल्दी न चढ़ाएं: भगवान शिव की पूजा में हल्दी नहीं चढ़ाई जाती है. हल्दी का उपयोग मुख्य रूप से सौंदर्य प्रसाधन में होता है. शास्त्रों के अनुसार, शिवलिंग पुरुषत्व का प्रतीक माना गया है, इसलिए शिव पूजा में भूलकर भी हल्दी का उपयोग न करें.
केतकी और केवड़े का फूल न चढ़ाएं: शिव को कनेर और कमल के अलावा लाल रंग के फूल प्रिय नहीं हैं. इतना ही नहीं शिव को केतकी और केवड़े के फूल नहीं चढ़ाए जाते. इसलिए इन फूलों का उपयोग शिव जी की पूजा में न करें, वरना पूजन का फल नष्ट हो सकता है.
कुमकुम और रोली चढ़ाने से बचें: शिव जी को कुमकुम और रोली नहीं लगाई जाती है. इन चीजों का उपयोग शिव जी की पूजा में वर्जित होता है.
शंक का उपयोग न करें: शंख भगवान विष्णु को बहुत ही प्रिय हैं, लेकिन शिव पूजन में शंख बजाना वर्जित माना गया है. पौराणिक मान्यता है कि महादेव ने शंखचूर नामक असुर का वध किया था, इसलिए ही शिव पूजा में शंख का उपयोग नहीं होता.
नारियल पानी से अभिषेक न करें: नारियल पानी से भगवान शिव का अभिषेक नहीं करें. नारियल को लक्ष्मी का स्वरूप माना जाता है. इसे पूजा के बाद प्रसाद के रूप में ग्रहण किया जाता है, लेकिन कहते हैं कि शिवलिंग पर चढ़ने के बाद नारियल का पानी ग्रहण करने योग्य नहीं रह जाता.
तुलसी का उपयोग न करें: तुलसी का पत्ता भी भगवान शिव को नहीं चढ़ाएं. पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान शिव ने असुरराज जलंधर का वध किया था, जिनकी पत्नी वृंदा तुलसी का पौधा बन गई थीं. वृंदा ने भगवान शिव को श्राप दिया था कि आपकी पूजा में तुलसी का उपयोग नहीं होगा.

