Shardiya Navratri 2026: क्या अखंड ज्योत बुझना होता है अशुभ? जानिए मां दुर्गा की पूजा से जुड़े जरूरी नियम

नवरात्रि में अखंड दीपक बुझने पर घबराएं नहीं। जानें इसके धार्मिक नियम, क्या इसे अशुभ माना जाता है और अखंड ज्योत दोबारा कैसे जलाएं।

 
Shardiya Navratri Puja Vidhi 2026

शारदीय नवरात्रि में मां दुर्गा की आराधना के दौरान अखंड दीपक जलाने का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। बहुत से श्रद्धालु नवरात्रि के पहले दिन घटस्थापना के समय अखंड ज्योत जलाते हैं और पूरे नौ दिनों तक इसे निरंतर जलाए रखने का संकल्प लेते हैं। हिंदू धर्म में दीपक को प्रकाश, ज्ञान और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। नवरात्रि में अखंड ज्योत जलाकर भक्त देवी दुर्गा के प्रति अपनी अटूट आस्था, श्रद्धा और समर्पण व्यक्त करते हैं। हालांकि, कई बार हवा के झोंके, तेल या घी की कमी और बत्ती की स्थिति के कारण दीपक बुझ जाता है।

❓ अखंड दीपक बुझ जाए तो क्या करें? जानिए घबराने के बजाय कौन सा तरीका अपनाएं

यदि नवरात्रि पूजा के दौरान अखंड दीपक बुझ जाता है, तो भक्तों को चिंतित होने या घबराने की आवश्यकता नहीं है। सबसे पहले शांत रहें और दीपक के बुझने का कारण देखें। अक्सर घी या तेल खत्म होने, बत्ती सही से न लगे होने या तेज हवा लगने से ऐसा होता है। ऐसी स्थिति में दीपक को साफ करें, उसमें पर्याप्त घी/तेल डालें, बत्ती को व्यवस्थित करें और 'क्षमा प्रार्थना' करते हुए सुरक्षित तरीके से दोबारा ज्योत प्रज्वलित कर लें। धार्मिक परंपराओं में अखंड ज्योत को दोबारा जलाने पर कोई मनाही नहीं है।

⚠️ क्या दीपक का बुझना अशुभ होता है? अखंड ज्योत जलाते समय रखें इन बातों का ध्यान

अखंड दीपक बुझने पर कई भक्त इसे किसी अनहोनी या अशुभ घटना का संकेत मानने लगते हैं, जो कि सही नहीं है। शास्त्रों और विद्वानों के अनुसार, दीपक का बुझना एक सामान्य भौतिक कारण भी हो सकता है, इसलिए श्रद्धापूर्वक दोबारा ज्योत जलाकर पूजा जारी रखनी चाहिए। अखंड दीपक को बुझने से बचाने के लिए पर्याप्त घी/तेल का प्रबंध रखें, दीपक को कांच के चिमनी या सुरक्षित स्थान पर रखें और घर में बच्चों या पालतू जानवरों की पहुँच से इसे दूर रखें ताकि नौ दिनों का संकल्प सफलतापूर्वक पूरा हो सके।