PM मोदी ने बाबा विश्वनाथ का किया षोडशोपचार पूजन, जानें क्या है सर्वार्थ सिद्धि योग?

बंगाल चुनाव नतीजों से पहले PM मोदी ने काशी में की विशेष पूजा। सर्वार्थ सिद्धि योग और त्रयोदशी के महासंयोग में हुआ षोडशोपचार पूजन। जानें इस शुभ योग का महत्व।

 
ज्योतिष शुभ योग 2026

बंगाल चुनाव के नतीजों से ठीक पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज एक बार फिर बाबा विश्वनाथ के शरण में पहुंचे. जिसके बाद विधि- विधान से सर्वार्थ सिद्धि योग और त्रयोदशी तिथि के महासंयोग में पीएम मोदी विशेष पूजा-अर्चना की. ज्योतिष में सर्वार्थ सिद्धि योग को एक शुभ और शक्तिशाली योग माना जाता है. आइए जानते हैं क्या होता है सर्वार्थ सिद्धि योग जिसमें पूजा करना बहुत ही शुभ माना जाता है.

सर्वार्थ सिद्धि योग क्या होता है?

सर्वार्थ सिद्धि योग हिंदू ज्योतिष का एक बहुत शुभ और प्रभावशाली योग माना जाता है. इसका अर्थ है कि ऐसा समय जिसमें किए गए सभी शुभ कार्य सफलता (सिद्धि) को प्राप्त हों. सर्वार्थ यानी हर प्रकार का उद्देश्य और सिद्धि यानी उसकी पूर्ति. इसीलिए इसे हर काम में सफलता देने वाला योग भी कहा जाता है. इसे नए कार्य की शुरुआत, पूजा-पाठ, निवेश या महत्वपूर्ण निर्णयों के लिए बहुत ही शुभ माना जाता है.

सर्वार्थ सिद्धि योग का निर्माण ज्योतिष शास्त्र में सप्ताह के दिन और नक्षत्र के विशेष और शुभ संयोग से होता है. जब किसी दिन का स्वामी ग्रह और उस समय चल रहा नक्षत्र आपस में अनुकूल स्थिति में होते हैं, तब यह योग बनता है. हर वार के साथ कुछ निश्चित नक्षत्र जुड़े होते हैं, और जब पंचांग में ये दोनों एक साथ मिलते हैं, तो उस अवधि को सर्वार्थ सिद्धि योग माना जाता है. यह योग पूरे दिन नहीं रहता, बल्कि नक्षत्र के शुरू और समाप्त होने के समय के अनुसार कुछ घंटों के लिए बनता है.

त्रयोदशी तिथि का महत्व

29 अप्रैल को त्रयोदशी तिथि भी है, जो भगवान शिव की पूजा के लिए बहुत ही पवित्र मानी जाती है. सिद्धांत यह है कि इस दिन शिव पूजन से जीवन में सुख-समृद्धि आती है. ऐसे में सर्वार्थ सिद्धि योग और त्रयोदशी का संयोग इस दिन को और भी खास बनाता है.

षोडशोपचार विधि से पूजा का महत्व

पीएम मोदी ने षोडशोपचार पूजन पद्धति से भगवान विश्वनाथ की पूजा की. जिसका उपयोग विशेष अनुष्ठानों में देवताओं को पूर्ण सम्मान के लिए दिया जाता है. षोडश का अर्थ है सेल और उपचार का अर्थ है सेवा या सत्कार . इस पूजा में भगवान शिव की 16 प्रकार से सेवा और आराधना की जाती है. इस प्रक्रिया की शुरुआत राज आह्वान और आसन से होती है, जहां देवता को श्रद्धापूर्वक बुलाया जाता है.

पूजन का मुख्य केंद्र स्नान होता है, जिसमें दूध, दही, घी, शहद और शकर (पंचामृत) से अभिषेक के बाद शुद्ध जल से स्नान कराया जाता है. अगले चरण में महादेव को वस्त्र, यज्ञोपवीत (जनेऊ), और गंध (चंदन) समर्पित किया जाता है. इसके बाद शिव के प्रिय पुष्प और बिल्वपत्र चढाये जाते हैं. आखिर में नैवेद्य (भोग) लगा, तांबूल (पान-सुपारी) का प्रयोग किया जाता है और फिर आरती व मंत्र के साथ पूजा को पूरा किया जाता है.