Swasti Vachan Vedic Mantra Significance: पूजा और धार्मिक अनुष्ठानों में क्यों किया जाता है स्वस्ति वाचन? जानिए इसके लाभ

पीएम मोदी ने शेयर किया स्वस्ति वाचन। जानिए पूजा-पाठ में इस वैदिक मंत्र का महत्व, अर्थ और किन देवताओं का किया जाता है आह्वान।
 
Hindu rituals prayer

 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को स्वस्ति मंत्र से जुड़ी एक क्लिप X (ट्विटर) पर शेयर की है. दरअसल, पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठानों में आपने भी अक्सर पंडितों को ‘स्वस्ति वाचन’ करते हुए सुना होगा. धार्मिक दृष्टि से इस मंत्र को बेहद खास माना जाता है और किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत में इसके पाठ की परंपरा रही है. आखिर स्वस्ति वाचन क्या है, इसमें किन देवताओं का आह्वान किया जाता है और इसका क्या अर्थ है? आइए जानते हैं.

क्या है स्वस्ति वाचन मंत्र?

स्वस्ति वाचन वैदिक परंपरा का एक महत्वपूर्ण मंत्र है, जिसका इस्तेमाल शुभ कार्य, पूजा, यज्ञ और धार्मिक अनुष्ठान की शुरुआत में मंगलकामना के लिए किया जाता है. स्वस्ति शब्द का सामान्य अर्थ कल्याण, मंगल या भलाई से जुड़ा है. यानी स्वस्ति वाचन के जरिए अपने और सभी के कल्याण की कामना की जाती है. ये मंत्र ऋग्वेद के प्रथम मंडल के 89वें सूक्त में मिलता है.

स्वस्ति वाचन में ऋग्वेद का ये प्रसिद्ध मंत्र पढ़ा जाता है-

स्वस्ति न इन्द्रो वृद्धश्रवाः।

स्वस्ति नः पूषा विश्ववेदाः।

स्वस्ति नस्तार्क्ष्यो अरिष्टनेमिः।

स्वस्ति नो बृहस्पतिर्दधातु॥

ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः॥

स्वस्ति वाचन मंत्र का सरल अर्थ

इस मंत्र में इंद्र, पूषा, तार्क्ष्य और बृहस्पति देव से कल्याण की प्रार्थना की गई है. इसमें कहा गया है कि ये देव शक्तियां हमारी रक्षा करें और हमारे जीवन में मंगल बनाए रखें.

  • इंद्र देव:- महान कीर्ति और शक्ति वाले इंद्र देव हमारा कल्याण करें.
  • पूषा देव:- संपूर्ण संसार को जानने वाले और सबका पोषण करने वाले पूषा देव हमारा मंगल करें.
  • तार्क्ष्य:- तार्क्ष्य को परंपरा में गरुड़ से जोड़ा जाता है. उनसे रक्षा और कल्याण की कामना की जाती है.
  • बृहस्पति देव:- देवताओं के गुरु बृहस्पति हमारा कल्याण करें और हमें ज्ञान व सही मार्ग की शक्ति दें.

मंत्र के अंत में ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः का उच्चारण किया जाता है. इसका भाव शांति की कामना से जुड़ा है. यही वजह है कि स्वस्ति वाचन को मंगल और शांति की प्रार्थना के रूप में देखा जाता है.

पूजा में क्यों किया जाता है स्वस्ति वाचन?

किसी भी पूजा या धार्मिक अनुष्ठान की शुरुआत में स्वस्ति वाचन करने का उद्देश्य शुभता और कल्याण की कामना करना है. इसमें केवल व्यक्ति के लिए ही नहीं, बल्कि व्यापक रूप से सभी के मंगल की भावना दिखाई देती है. मान्यता के अनुसार, स्वस्ति वाचन से पूजा के दौरान आने वाली बाधाओं को दूर करने और वातावरण में शांति बनाए रखने की कामना की जाती है. इसी कारण विवाह, गृह प्रवेश, हवन, यज्ञ और दूसरी धार्मिक विधियों में भी इसका पाठ किया जाता है.

दिशाओं में जल छिड़कने का क्या महत्व है?

स्वस्ति वाचन के दौरान कई धार्मिक अनुष्ठानों में दर्भ या कुशा के माध्यम से अलग-अलग दिशाओं में जल का छिड़काव भी किया जाता है. इसे वातावरण की शुद्धि और मंगलकामना से जोड़कर देखा जाता है. इस पूरी प्रक्रिया का भाव यही है कि जिस स्थान पर पूजा या शुभ कार्य होने जा रहा है, वहां शांति और सकारात्मक वातावरण बना रहे और कार्य निर्विघ्न रूप से पूरा हो.

सिर्फ अपने लिए नहीं, सबके कल्याण की प्रार्थना

स्वस्ति वाचन की एक खास बात ये है कि इसकी भावना सिर्फ किसी एक व्यक्ति तक सीमित नहीं है. इसमें अलग-अलग देव शक्तियों से सभी के कल्याण, सुरक्षा और शांति की कामना की जाती है. यही वजह है कि वैदिक परंपरा में इसे केवल पूजा की शुरुआत में बोला जाने वाला मंत्र नहीं, बल्कि सर्वकल्याण और मंगल की भावना से जुड़ी प्रार्थना भी माना जाता है.

कहां-कहां किया जाता है स्वस्ति वाचन?

स्वस्ति वाचन का पाठ कई तरह के शुभ कार्यों और धार्मिक अनुष्ठानों में किया जाता है. जैसे-

  • पूजा-पाठ की शुरुआत में
  • हवन और यज्ञ में
  • गृह प्रवेश के समय
  • विवाह संस्कार में
  • धार्मिक अनुष्ठानों के आरंभ में
  • किसी नए और शुभ कार्य की शुरुआत में