Sawan Shivratri vs Mahashivratri: सावन शिवरात्रि और महाशिवरात्रि में क्या है अंतर? जानें पूजा का सही तरीका और महत्व
सावन शिवरात्रि और महाशिवरात्रि के मुख्य अंतर को समझें। 11 अगस्त को सावन शिवरात्रि पर शिवलिंग पर जल व दूध चढ़ाने की सही पूजा विधि, नियम और महत्व जानें।
सावन शिवरात्रि और महाशिवरात्रि भगवान शिव के दो बड़े पर्व हैं. इस साल महाशिवरात्रि का पर्व 15 फरवरी को मनाया गया था और सावन शिवरात्रि 11 अगस्त को मनाई जाएगी. महाशिवरात्रि फाल्गुन महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को आती है, जबकि सावन शिवरात्रि सावन महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को आती है. महाशिवरात्रि को शिव और पार्वती के विवाह के उत्सव के रूप में मनाया जाता है. वहीं, सावन शिवरात्रि सावन के पवित्र महीने में आती है, जो पूरी तरह शिव जी की भक्ति के लिए माना जाता है. दोनों तिथियों पर शिवलिंग पर जल और दूध चढ़ाने का विधान है. इन दोनों पर्वों पर सच्चे मन से पूजा करने से शिव जी प्रसन्न होते हैं.
दोनों शिवरात्रि के बीच का मुख्य अंतर
महाशिवरात्रि साल की सबसे बड़ी शिवरात्रि मानी जाती है, जो फाल्गुन मास में आती है. इस दिन माना जाता है कि भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था. दूसरी तरफ सावन शिवरात्रि वह तिथि है जो सावन के पूरे महीने की भक्ति के बीच में आती है. सावन का पूरा महीना ही शिव पूजा के लिए खास होता है, इसलिए इस दिन जल चढ़ाने से विशेष लाभ मिलता है. महाशिवरात्रि पर रात के समय चार पहर की पूजा का विधान होता है. सावन शिवरात्रि पर सुबह से ही शिवलिंग पर जल, दूध और बेल पत्र चढ़ाने के लिए भक्तों की भीड़ लगती है. दोनों ही दिन व्रत रखने से मन की मनोकामनाएं पूरी होती हैं और जीवन के सारे दुख समाप्त हो जाते हैं.
शिव पूजन का सही तरीका और नियम
शिवरात्रि के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करना चाहिए और साफ कपड़े पहनने चाहिए. इसके बाद पास के शिव मंदिर जाकर शिवलिंग पर जल और कच्चे दूध से अभिषेक करना चाहिए. फिर शिवलिंग पर बेल पत्र, धतूरा और सफेद फूल अर्पित करें. पूजा करते समय ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप करते रहना चाहिए. इस दिन किसी से गलत बात न कहें और पूरे दिन मन शांत रखें. भोजन में अन्न न लें, केवल दूध और फल ही खाएं. शाम को मंदिर में दीपक जलाकर आरती करनी चाहिए. इस तरह नियम से पूजा करने पर घर में खुशहाली आती है. सच्चे दिल से की गई प्रार्थना को शिव जी हमेशा सुनते हैं और संकटों से रक्षा करते हैं.
शिवरात्रि पर पूजा करने का लाभ
शिवरात्रि पर भगवान शिव की पूजा करने से व्यक्ति के सब पाप नष्ट हो जाते हैं. जो लोग सच्चे भाव से जल चढ़ाते हैं, उन्हें मानसिक शांति मिलती है और मन का भय दूर होता है. इस दिन व्रत रखने और पूजन करने से परिवार में प्रेम बढ़ता है और सुख-शांति बनी रहती है. जो लोग बीमार रहते हैं या जीवन में परेशानी झेल रहे हैं, उन्हें शिवरात्रि पर विशेष रूप से शिवलिंग का अभिषेक करना चाहिए. भोलेनाथ अपने भक्तों से बहुत जल्दी प्रसन्न हो जाते हैं और उनकी रक्षा करते हैं. इस दिन किया गया दान और पूजन जीवन को सही दिशा देता है. प्रभु की कृपा से बिगड़े हुए काम भी बनने लगते हैं.

