Shardiya Navratri 2026: अंबाला में धूमधाम से हुई शारदीय नवरात्रि की शुरुआत, प्राचीन अंबिका देवी मंदिर में उमड़े भक्त

अंबाला में शारदीय नवरात्रि के पहले दिन प्राचीन अंबिका देवी मंदिर में भक्तों का तांता लगा है। मां शैलपुत्री की पूजा के साथ उत्सव की शुरुआत हुई है।

 
Maa Shailputri puja Haryana,

अंबाला में आज से शारदीय नवरात्रि 2026 की शुरुआत पूरी श्रद्धा और उल्लास के साथ हो चुकी है। आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि पर पहले दिन मां शैलपुत्री की विधि-विधान से पूजा-अर्चना और कलश स्थापना (घटस्थापना) की गई। हरियाणा के सभी प्रमुख देवी मंदिरों में अलसुबह से ही भक्तों का तांता लगा रहा और चहुंओर 'जय माता दी' के जयकारों की गूंज सुनाई दी। इस पावन अवसर पर हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने प्रदेशवासियों को नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए राज्य में सुख, शांति और समृद्धि की प्रार्थना की है।

🛕 ऐतिहासिक अंबिका देवी मंदिर में उमड़ी भक्तों की भारी भीड़, कोलकाता के फूलों से हुआ भव्य शृंगार

अंबाला के प्रसिद्ध अंबिका देवी मंदिर में नवरात्रि को लेकर विशेष उत्साह देखने को मिला। मान्यता है कि इस मंदिर में सच्चे दिल से मन्नत मांगने वाले हर भक्त की मुराद पूरी होती है। मंदिर को सजाने के लिए इस बार विशेष रूप से कोलकाता से फूल मंगवाए गए हैं, जिनसे मां का अलौकिक शृंगार किया गया है। मंदिर के पुजारियों के अनुसार, अगले नौ दिनों तक देवी के अलग-अलग नौ स्वरूपों की विशेष पूजा-अर्चना की जाएगी, जिसके लिए व्यापक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।

📜 महाभारत काल और पांडवों से जुड़ा है अंबिका देवी मंदिर का इतिहास, स्वयंभू पिंडी है स्थापित

अंबाला का अंबिका देवी मंदिर शहर का सबसे प्राचीन और पूजनीय स्थल है, जिससे स्वयं अंबाला शहर की पहचान जुड़ी हुई है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, इसी मंदिर की अधिष्ठाता माता भवानी अंबा के नाम पर इस शहर का नाम 'अंबाला' पड़ा था। लगभग 250 से 300 वर्ष पुरानी इस वर्तमान संरचना के संबंध में पौराणिक कथा है कि द्वापर युग में कुरुक्षेत्र युद्ध से पहले पांडवों ने यहां आकर माता का आशीर्वाद लिया था और सरस्वती नदी के तट पर इस मंदिर की नींव रखी थी। मंदिर के गर्भगृह में माता की प्राचीन स्वयंभू पिंडी स्थापित है और यहां सदियों से अखंड ज्योति निरंतर प्रज्वलित हो रही है।