इटावा: सैय्यद बाबा मजार हटाने का आदेश, वन विभाग की कोर्ट ने बताया अवैध कब्जा

यूपी के इटावा में आरक्षित वन भूमि पर बनी सैय्यद बाबा मजार हटेगी। वन विभाग की कोर्ट ने 800 साल पुराने दावे को खारिज कर सरकारी रिकॉर्ड के आधार पर सुनाया फैसला।

 
सरकारी गजट 1916 मजार विवाद

यूपी के इटावा के बीहड़ इलाके में स्थित सैय्यद बाबा मजार को लेकर बड़ा प्रशासनिक फैसला सामने आया है. वन विभाग की कोर्ट ने इस मजार को आरक्षित वन भूमि पर अवैध कब्जा मानते हुए इसे हटाने के आदेश दिए हैं. पक्षकार की ओर से मजार को लेकर कोई आधिकारिक दस्तावेज नहीं पेश करने के बाद वन विभाग की कोर्ट ने यह आदेश जारी किया.

करीब दो महीने तक चली सुनवाई के बाद अदालत ने यह स्पष्ट किया कि जिस जमीन पर मजार बनी है. वह लंबे समय से वन विभाग के रिकॉर्ड में आरक्षित श्रेणी में दर्ज है. ऐसे में वहां किसी भी तरह की स्थायी संरचना या धार्मिक गतिविधि बिना अनुमति के गैरकानूनी मानी जाएगी.

पक्षकार कर रहे ये दावा

मजार से जुड़े पक्षकारों का दावा था कि यह स्थल करीब 800 साल पुराना है और यहां हर साल उर्स का आयोजन होता है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं, लेकिन अदालत में इस दावे के समर्थन में कोई ठोस दस्तावेज या ऐतिहासिक प्रमाण पेश नहीं किया जा सका. जिसके बाद कोर्ट ने इसे हटाने का आदेश जारी किया.

सरकारी रिकॉर्ड बना आधार

अदालत ने अपने फैसले में 1916, 1939 और 1946 के सरकारी गजट का हवाला दिया, जिनमें इस जमीन को आरक्षित वन क्षेत्र बताया गया है. लगभग 1800 वर्गफीट क्षेत्र में फैले इस ढांचे को नियमों के खिलाफ मानते हुए अवैध घोषित कर दिया गया.

कई मौके, फिर भी नहीं मिले सबूत

मजार के पक्षकारों को पांच बार अलग-अलग तारीखों पर अपने पक्ष में दस्तावेज पेश करने का अवसर दिया गया, लेकिन हर बार वह कोई प्रमाण उपलब्ध नहीं करा सके. इसके बाद अदालत ने साक्ष्यों के अभाव में एकतरफा नहीं, बल्कि सरकारी रिकॉर्ड के आधार पर फैसला सुनाया.

क्या है पूरा मामला?

इस पूरे विवाद की शुरुआत इस साल जनवरी में हुई, जब वन विभाग के रेंजर ने इस निर्माण को अवैध बताते हुए मामला दर्ज कराया. फरवरी से सुनवाई शुरू हुई और मार्च के अंत तक पक्षकारों को समय दिया गया, लेकिन कोई ठोस सबूत सामने नहीं आया. अंततः 17 अप्रैल को अदालत ने अपना निर्णय सुना दिया.

अब आगे क्या?

वन विभाग ने साफ किया है कि आदेश के खिलाफ अपील का विकल्प खुला है. फिलहाल मजार हटाने की तारीख तय नहीं की गई है, लेकिन विभाग ने संकेत दिया है कि आगे की कार्रवाई कानून के अनुसार की जाएगी.