Apple-Google की नीति पर सवाल: ऐप स्टोर पर अश्लील फोटो बनाने वाले ऐप्स की भरमार
टेक ट्रांसपेरेंसी प्रोजेक्ट की रिपोर्ट में Apple और Google पर गंभीर आरोप। बिना सहमति अश्लील फोटो बनाने वाले ऐप्स से कंपनियां कमा रहीं करोड़ों का रेवेन्यू। जानें पूरा विवाद।
टेक ट्रांसपेरेंसी प्रोजेक्ट द्वारा प्रकाशित एक रिपोर्ट में इस बात का जिक्र किया गया है कि Apple और Google अभी भी ऐसे मोबाइल ऐप्स उपलब्ध करा रहे हैं, जिनसे यूजर्स लोगों की बिना सहमति के अश्लील तस्वीरें बना सकते हैं जबकि इन कंपनियों की पॉलिसी में इस तरह के कंटेंट पर रोक लगानी चाहिए.
मनी कंट्रोल के मुताबिक, नॉन-प्रॉफिट कैंपेन फॉर अकाउंटेबिलिटी की रिसर्च विंग के अनुसार, Apple और Google के ऐप स्टोर में गंदी तस्वीर बनाने वाले कई सॉफ्टवेयर मिल जाते हैं, जिनका इस्तेमाल कर वह मशहूर हस्तियों और अन्य लोगों की तस्वीरों को बदलकर उन्हें नग्न या अर्धनग्न अवस्था में दिखा सकते हैं. ये कंपनियां अपने सर्च रिजल्ट में भी इसी तरह के गंदी तस्वीर बनाने वाले ऐप्स के विज्ञापन दिखाती हैं.
रिपोर्ट के अनुसार जिसमें मार्केट रिसर्चर AppMagic के रेवेन्यू अनुमानों का हवाला दिया गया है. इस ग्रुप द्वारा पहचाने गए ऐप्स को 483 मिलियन बार डाउनलोड किया गया है और उनसे $122 मिलियन (लगभग 12.2 करोड़) का रेवेन्यू मिला है. AppMagic के एक प्रवक्ता ने बताया कि Tech Transparency Project के काम के चलते कई ऐप्स को हटा दिया गया है और दूसरे ऐप्स को अपनी यूजर पॉलिसी बदलने के लिए प्रेरित किया है.
पहले हटाए, फिर लौट आए अश्लील ऐप्स
पिछले एक साल में, दुनिया भर के राजनेताओं ने इस तरह के ऐप्स के प्रसार पर रोक लगाने की मांग तेज कर दी है. इस साल की शुरुआत में, कंपनियों ने ‘टेक ट्रांसपेरेंसी प्रोजेक्ट’ द्वारा चिह्नित किए गए ऐप्स को हटा दिया था. लेकिन उस संगठन के शोधकर्ताओं के अनुसार, इसके कुछ ही महीनों बाद, दर्जनों ऐसे ही अन्य ऐप्स फिर से उपलब्ध हो गए. बात सिर्फ इतनी ही नहीं है कि कंपनियां इन ऐप्स की ठीक से समीक्षा करने में नाकाम हो रही हैं और उन्हें मंज़ूरी देकर उनसे मुनाफ़ा कमाती जा रही हैं.
ऐप स्टोर सर्च के आधार पर, इस ग्रुप ने Apple App Store में 18 और Google Play Store में 20 ऐसे ऐप्स की पहचान की, जिनमें कपड़ों को हटाने की क्षमता थी. इसके अलावा, शोधकर्ताओं ने बताया कि Apple और Google दोनों ही कभी-कभी अपने ‘ऑटो-कम्प्लीट’ फ़ीचर के जरिए यूजर्स को इन ऐप्स तक पहुंचा देते हैं.

