NASA Artemis II: अंतरिक्ष में क्या कर रहा है iPhone 17 Pro Max? जानें नासा का प्लान
नासा के आर्टेमिस II मिशन में शामिल हुए 4 iPhone 17 Pro Max। अंतरिक्ष यात्री चांद की कक्षा में क्यों ले गए एप्पल का लेटेस्ट फोन? जानें इसके पीछे का पूरा सच।
Artemis II Mission पर एस्ट्रोनॉट्स पृथ्वी की ऑर्बिट से बाहर स्मार्टफोन ले गए हैं जिससे मिशन के तरीके में एक छोटा लेकिन खास बदलाव हुआ है. 1 अप्रैल 2026 को नासा ने आर्टेमिस II मिशन को सफलतापूर्वक लॉन्च किया था. स्पेस में Apple कंपनी का लेटेस्ट मॉडल iPhone 17 Pro Max को एस्ट्रोनॉट्स के साथ भेजा गया है, फोन की कुल 4 यूनिट्स भेजी गई है. अब यहां ज़ेहन में ये सवाल उठना लाजमी है कि स्पेस में आखिर फोन का क्या काम? क्यों अंतरिक्ष में आईफोन को भेजा गया है, अगर आपके भी मन में ये सवाल है तो चलिए आपको बताते हैं कि इसके पीछे का कारण क्या है?
स्पेस में क्या है आईफोन का काम?
आईफोन 17 प्रो मैक्स का इस्तेमाल स्पेसक्राफ्ट के अंदर फोटो और वीडियो कैप्चर करने तक ही सीमित रहेगा. आईफोन का इस्तेमाल रेगुलर फोन की तरह नहीं किया जाएगा और मिशन के दौरान इंटरनेट और ब्लूटूथ जैसे फीचर्स बंद रहेंगे. NASA द्वारा डिटेल्ड सेफ्टी चेक के बाद ही डिवाइस को स्पेस में भेजने के लिए अप्रूव किया गया है. फोन को कम्युनिकेशन के लिए नहीं बल्कि इसका इस्तेमाल फोटो और वीडियो कैप्चर करने के लिए होगा.
इन बातों पर किया गया गौर
NASA ने यूं ही आईफोन 17 प्रो मैक्स को स्पेस में नहीं भेज दिया, बाकी इक्विपमेंट्स की तरह आईफोन को भी अप्रूवल प्रोसेस से गुजरना पड़ा. सबसे पहले फोन को सेफ्टी पैनल के सामने पेश किया गया. फिर, संभावित रिस्क की स्टडी की गई. इसमें स्क्रीन क्रैक, जीरो ग्रैविटी में मटीरियल कैसे काम करते हैं जैसी चीजों को शामिल किया गया. टूटे हुए कांच जैसी छोटी सी बात को भी गंभीरता से लिया गया, क्योंकि स्पेसक्राफ्ट के अंदर छोटे-छोटे टुकड़े भी हवा में फ्लोट कर सकते हैं. इसके बाद, इन खतरों को कम करने के लिए कदम उठाए गए. आखिर में, यह पक्का करने के लिए टेस्ट किए गए कि सब कुछ सुरक्षित है. फोन को हीट कंट्रोल, बैटरी सेफ्टी और स्पेस में कैसे स्टोर किया जाएगा, इन सब चीजों को भी चेक किया गया था.
स्पेस में फोन का इस्तेमाल
स्पेसक्राफ्ट के अंदर, कुछ फोन वेल्क्रो से जुड़े होंगे जबकि दूसरे एस्ट्रोनॉट्स के सूट में रखे जा सकते हैं. इससे पता चलता है कि स्पेस में बेसिक हैंडलिंग भी कितनी अलग होती है. ध्यान देने वाली बात यह है कि स्मार्टफोन मिशन का मेन कैमरा नहीं है. एस्ट्रोनॉट्स GoPro और दूसरे कैमरों जैसे प्रोफेशनल इक्विपमेंट का भी इस्तेमाल करेंगे. इनकी तुलना में फोन सिर्फ सेकेंडरी टूल है. फिर भी, यह कदम एक बदलाव दिखाता है.

