अक्षय तृतीया 2026: ₹20,000 करोड़ के पार पहुंचेगा कारोबार, पर बदल गया सोना खरीदने का अंदाज

अक्षय तृतीया पर ₹20,000 करोड़ के व्यापार का अनुमान। ₹1.58 लाख पहुँचा सोना और ₹2.55 लाख हुई चांदी। जानें क्यों कम हो रही है खपत और क्या है नया डिजिटल ट्रेंड।

 
चांदी की रिकॉर्ड कीमत

इस बार अक्षय तृतीया पर कारोबार में 25 फीसदी का उछाल आने की उम्मीद की जा रही है. कॉन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) के अनुसार, अक्षय तृतीया 2026 में कीमती धातुओं की बिक्री रिकॉर्ड लेवल पर पहुंचने की उम्मीद है. हालांकि, आसमान छूती कीमतों के कारण भारत में सोने और चांदी खरीदने का तरीका बदल रहा है, और इस बार व्यापार 20,000 करोड़ रुपए से ज्यादा होने का अनुमान है. यह पिछले साल के अनुमानित 16,000 करोड़ रुपए के मुकाबले एक बड़ी छलांग है, भले ही बुलियन (सोने-चांदी) की दरें अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई हैं. चांदनी चौक से सांसद और CAIT के महासचिव प्रवीण खंडेलवाल ने कहा कि अक्षय तृतीया पारंपरिक रूप से भारत में सोना खरीदने के सबसे शुभ अवसरों में से एक रहा है… जहां एक ओर सोने का दबदबा कायम है, वहीं दूसरी ओर कीमतों में भारी बढ़ोतरी के चलते खरीदारी का तरीका भी काफ़ी बदल रहा है.

बदल रहा खरीदारी का ट्रेंड

पिछले साल जहां सोने की कीमत लगभग 1,00,000 रुपए प्रति 10 ग्राम थी, वहीं इस साल यह बढ़कर लगभग 1.58 लाख रुपए हो गई है. इसी तरह, चांदी की कीमत 85,000 रुपए प्रति किलोग्राम से बढ़कर रिकॉर्ड 2.55 लाख रुपए प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई है. CAIT का कहना है कि कीमतों में इस उछाल से मांग कम होने के बजाय, कंज्यूमर “ज्यादा सोच-समझकर और किफायती खरीदारी” की ओर बढ़ रहे हैं. CAIT के राष्ट्रीय अध्यक्ष बीसी भरतिया ने कहा कि अब लोग हल्के वजन वाले और पहनने लायक गहनों को ज्यादा पसंद कर रहे हैं, साथ ही चांदी और हीरे के उत्पादों पर भी उनका ध्यान बढ़ा है. मेकिंग चार्ज में छूट और सोने के सिक्के मुफ्त मिलने जैसे आकर्षक ऑफर भी उपभोक्ताओं की दिलचस्पी बनाए रखने में मदद कर रहे हैं.

दाम ज्यादा वॉल्यूम कम

CAIT से जुड़ी संस्था ‘ऑल इंडिया ज्वेलर्स एंड गोल्डस्मिथ फेडरेशन’ (AIJGF) के राष्ट्रीय अध्यक्ष पंकज अरोड़ा ने बताया कि अनुमानित 16,000 करोड़ रुपए के सोने के व्यापार का मतलब है कि मौजूदा कीमतों पर लगभग 10,000 किलोग्राम (10 टन) सोने की बिक्री होगी. अगर इस बिक्री को अनुमानित 2 से 4 लाख जौहरियों के बीच बांटा जाए, तो इसका मतलब है कि हर जौहरी औसतन सिर्फ 25 से 50 ग्राम सोना ही बेच पाएगा — “जो साफ तौर पर वॉल्यू की मात्रा में भारी गिरावट का संकेत है. इसी तरह, 4,000 करोड़ रुपए के चांदी के व्यापार का मतलब है लगभग 1,56,800 किलोग्राम (157 टन) चांदी की बिक्री; जिसका अर्थ है कि इस त्योहार के दौरान हर जौहरी औसतन सिर्फ 400 से 800 ग्राम चांदी ही बेच पाएगा. खंडेलवाल ने कहा कि ये आंकड़े एक अहम बदलाव को दिखाते हैं: जहां बढ़ती कीमतों की वजह से कारोबार की कीमत बढ़ रही है, वहीं असल खपत कम हो रही है.

डिजिटल गोल्ड की ओर फोकस

इसी वजह से इस साल हल्के गहनों और कम कीमत वाले सिक्कों की लोकप्रियता बढ़ रही है. कीमतों में उतार-चढ़ाव की वजह से जौहरियों के लिए इन्वेंट्री मैनेज करना भी मुश्किल होता जा रहा है. फिर भी, त्योहारों का माहौल अभी भी जोरों पर है और बाजारों में ग्राहकों की अच्छी-खासी भीड़ देखने को मिल रही है. खंडेलवाल ने आगे कहा कि ग्राहक अब ज्यादा सावधानी और समझदारी भरा रवैया अपना रहे हैं, और अपनी पारंपरिक मान्यताओं के साथ-साथ आर्थिक अनुशासन का भी ध्यान रख रहे हैं. इसके अलावा, लोग अब डिजिटल गोल्ड, सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड और गोल्ड ETF जैसे दूसरे विकल्पों की ओर भी रुख कर रहे हैं. कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच ये विकल्प लिक्विडिटी, सुरक्षा और लचीलापन देते हैं.