Bhivani News: भिवानी में अढ़ाई कोसी नगर परिक्रमा के 18 माह पूरे, बालयोगी महंत चरणदास महाराज की अगुवाई में उमड़े श्रद्धालु

भिवानी में हनुमान जोहड़ी मंदिर धाम द्वारा निकाली जा रही अढ़ाई कोसी नगर परिक्रमा के 18 माह पूरे हुए। महंत चरणदास महाराज के सान्निध्य में श्रद्धालुओं ने 12 ऐतिहासिक द्वारों के दर्शन किए।

 
Mahant Charandas Maharaj Bhivani

भक्ति और आस्था के रंग में रंगी छोटी काशी

हनुमान जोहड़ी मंदिर धाम द्वारा निकाली जा रही अढ़ाई कोसी नगर परिक्रमा को 18 माह हुए पूर्ण

आध्यात्मिक चेतना जागृत करने व नगर के कल्याण का माध्यम है नगर परिक्रमा : चरणदास महाराज

भिवानी, 13 अक्तूबर : हरियाणा की काशी भिवानी नगरी भिवानी में सनातन संस्कृति, आध्यात्मिक चेतना और जनकल्याण की भावना को मजबूत करने वाली अढ़ाई कोसी नगर परिक्रमा निरंतर श्रद्धा का केंद्र बनी हुई है। स्थानीय हनुमान जोहड़ी मंदिर धाम परिवार की ओर से युवा जागृति एवं जनकल्याण मिशन ट्रस्ट के बैनर तले बालयोगी महंत चरणदास महाराज के सान्निध्य में निकाली जा रही नगर परिक्रमा ने मंगलवार को 18 माह का सफर पूरा कर लिया। इस विशेष अवसर पर शहर में भव्य नगर परिक्रमा का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लेकर धर्म और आस्था के प्रति अपनी निष्ठा प्रकट की। नगर परिक्रमा के दौरान भिवानी शहर भक्तिमय वातावरण से सराबोर दिखाई दिया। श्रद्धालु भजन-कीर्तन करते हुए, धार्मिक धुनों पर झूमते और प्रभु के जयकारे लगाते हुए परिक्रमा मार्ग पर आगे बढ़े। परिक्रमा में शामिल श्रद्धालुओं ने शहर के सभी 12 ऐतिहासिक दरवाजों तथा विभिन्न मंदिरों के दर्शन किए और इन धार्मिक एवं ऐतिहासिक स्थलों से जुड़ी गौरवशाली विरासत को जानने का अवसर प्राप्त किया।

Mahant Charandas Maharaj Bhivani

इस अवसर पर बालयोगी महंत चरणदास महाराज ने कहा कि नगर परिक्रमा का उद्देश्य केवल शहर की सडक़ों पर पैदल चलना नहीं, बल्कि प्रत्येक व्यक्ति के भीतर आध्यात्मिक भाव जगाना और पूरे नगर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करना है। जब श्रद्धालु सामूहिक रूप से प्रभु का स्मरण करते हुए नगर भ्रमण करते हैं, तो उनके मन में सेवा, सद्भाव, परस्पर सहयोग और समाज के प्रति जिम्मेदारी की भावना मजबूत होती है। महंत चरणदास महाराज ने कहा कि भिवानी की पहचान केवल एक शहर के रूप में नहीं, बल्कि धार्मिक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत से समृद्ध छोटी काशी के रूप में भी है। नगर के ऐतिहासिक द्वारों और प्राचीन मंदिरों से जुड़ी परंपराओं को जानना तथा अगली पीढ़ी तक पहुंचाना हम सभी का दायित्व है। नगर परिक्रमा इसी दिशा में एक सार्थक प्रयास है, जो लोगों को अपनी जड़ों से जोडऩे के साथ-साथ धर्म और अध्यात्म के मार्ग पर आगे बढऩे की प्रेरणा देता है। इस अवसर पर अनेक श्रद्धालुगण मौजूद रहे।