गरीबों के टूटे आशियानों के मलबे पर बैठा है इंसाफ
 

नपा ने उखाड़ा पीडि़तों का तंबू, अब काबली किकर के नीचे कटेंगी दिन-रात
11 मई तक पुनर्वास नहीं हुआ तो तहसील व नगर पालिका बवानीखेड़ा का होगा घेराव : प्रदीप नरवाल
 
 
पुनर्वास की मांग भिवानी

भिवानी, 07 मई : कस्बा बवानीखेड़ा में गरीब मजदूर, किसान और पशुपालक परिवारों के टूटे आशियानों का दर्द अब जनआक्रोश में बदलता जा रहा है। तीन दिन पहले नगरपालिका प्रशासन द्वारा करीब आधा दर्जन गरीब परिवारों के मकान तोड़े जाने के बाद अब पीडि़त परिवार खुले आसमान के नीचे जीवन बिताने को मजबूर हैं। हालात इतने अमानवीय हो चुके हैं कि सिर छिपाने के लिए लगाए गए तंबू को भी नगरपालिका प्रशासन ने उखाड़ दिया। अब इन परिवारों के पास केवल एक काबली किकर का पेड़ ही दिन की तपती धूप और रात की अंधेरी ठंड से बचने का सहारा बचा है।


हैरानी की बात यह है कि इतना सब कुछ होने के बावजूद अभी तक जिला प्रशासन का कोई प्रतिनिधि पीडि़त परिवारों का हाल जानने तक नहीं पहुंचा। महिलाओं की आंखों में आंसू हैं, छोटे बच्चे डरे हुए हैं और बुजुर्ग बेबसी में अपने उजड़े हुए आशियानों के मलबे पर बैठे इंसाफ का इंतजार कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि ये परिवार पिछले 30-40 वर्षों से यहां रहकर मेहनत-मजदूरी और पशुपालन के जरिए अपना जीवनयापन कर रहे थे। लेकिन प्रशासन ने बिना किसी वैकल्पिक व्यवस्था के उनके घरों को तोडक़र उन्हें सडक़ पर लाकर खड़ा कर दिया।


     इस पूरे मामले को लेकर वीरवार को वरिष्ठ कांग्रेसी नेता एवं एआईसीसी के राष्ट्रीय सचिव प्रदीप नरवाल समर्थकों के साथ पीडि़त परिवारों के बीच पहुंचे और उनका हालचाल जाना। उन्होंने उपायुक्त से बातचीत कर पीडि़त परिवारों के पुनर्वास और खाने-पीने की व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की। साथ ही नगरपालिका सचिव से तंबू हटाने को लेकर जानकारी ली, जिस पर सचिव ने इस संबंध में किसी प्रकार के आदेश जारी होने से इनकार किया। इस दौरान प्रदीप नरवाल ने हरियाणा सरकार और प्रशासन पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि सरकार ने गरीबों के घर नहीं तोड़े, बल्कि उनके बच्चों के सपने तोड़े हैं। उन्होंने जिन हाथों में किताबें होनी चाहिए थीं, आज वे अपने उजड़े हुए घरों का मलबा समेट रहे हैं।


     उन्होंने प्रशासन को 11 मई तक का अल्टीमेटम देते हुए चेतावनी दी कि यदि तब तक पीडि़त परिवारों के पुनर्वास और स्थायी रहने की व्यवस्था नहीं की गई, तो 1000 से अधिक लोग एकजुट होकर तहसील एवं नगर परिषद बवानीखेड़ा का ऐतिहासिक घेराव करेंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन और सरकार की होगी।  इस दौरान कामरेड ओमप्रकाश, कमल सिंह प्रधान, पूर्व पार्षद मीना चौपड़ा सहित अन्य वक्ताओं ने तंबू उखाड़े जाने की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए इसे लोकतंत्र और मानवता पर हमला बताया। कामरेड ओमप्रकाश व कमल प्रधान ने कहा कि एक तरफ बड़े-बड़े रसूखदारों के अवैध कब्जों पर कार्रवाई नहीं होती, जबकि दूसरी तरफ गरीब मजदूरों के छोटे-छोटे आशियानों को बेरहमी से उजाड़ दिया जाता है। यह केवल अन्याय नहीं बल्कि अमानवीयता की पराकाष्ठा है।
     धरने के समर्थन में जागृति मोर्चा, किसान सभा, वरिष्ठ कांग्रेसी नेता और कई सामाजिक संगठन भी पहुंचे। इस अवसर पर नरेंद्र राज गागड़वास, उमेश भारद्वाज, रेणू बाला, अनिल नेहरा, मंजीत लांगायन, मंदीप सूई, काला मुंढ़ाल, शिवकुमार चांगिया, मनमोहन भुरटाना, नरेंद्र तंवर, सुरेंद्र मुंढाल, एडवोकेट रामकिशन काजल, बनवारी नायक, धर्मेंद्र बलहारा, बबलू शर्मा, हनुमान मास्टर सहित अनेक सामाजिक व राजनीतिक कार्यकर्ता मौजूद रहे।