Crop Residue Management Haryana: धान उत्पादक किसानों के घर जाएंगे नोडल अधिकारी, भिवानी प्रशासन ने उठाए कड़े कदम
भिवानी में पराली प्रबंधन को लेकर डीसी साहिल गुप्ता और एसपी मयंक मिश्रा ने सख्त निर्देश दिए हैं। पराली जलाने वाले किसानों पर एफआईआर और जुर्माना लगाया जाएगा।
पराली के उचित प्रबंधन के लिए धान उगाने वाले किसानों के घर पर जाएंगे नोडल अधिकारी: डीसी साहिल गुप्ता
पराली में आग लगाई तो होगा मुकदमा दर्ज: एसपी मयंक मिश्रा
105 गांवों में 54,734 एकड़ में हुई धान की खेती से 82 हजार मीट्रिक टन पराली उत्पादन का अनुमान
भिवानी, 16 अक्टूबर। डीसी साहिल गुप्ता की अध्यक्षता में स्थानीय पंचायत भवन में फसल अवशेष प्रबंधन को लेकर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित हुआ। पराली जलाने की घटनाओं पर रोक लगाने के लिए आयोजित कार्यक्रम में बवानीखेड़ा, भिवानी और तोशाम क्षेत्र के धान उत्पादक 73 संवेदनशील गांवों के सरपंचों, ग्राम सचिवों के साथ पुलिस, राजस्व, पंचायत और शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने भाग लिया। कार्यक्रम में डीसी ने सख्त निर्देश देते हुए कहा कि गांवों में नियुक्त नोडल अधिक धान की फसल उगाने वाले किसानों के घर जाएं और उनको पराली नहीं जलाने व पराली का उचित प्रबंधन करने के लिए जागरूक करें। वहीं दूसरी ओर पुलिस अधीक्षक मयंक मिश्रा ने कहा कि पराली जलाने वाले किसानों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जाएगा। पराली जलाने से एक तरफ जहां पर्यावरण प्रदुषित होता है।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डीसी साहिल गुप्ता ने किसानों से अपील करते हुए कहा कि वे फसल अवशेषों को आग लगाने के बजाय उनका उचित प्रबंधन करें। पराली जलाने से पर्यावरण प्रदुषित होता है, भूमि की उर्वरा शक्ति प्रभावित होती है और मिट्टी में मौजूद लाभदायक कीट-पतंगे नष्ट हो जाते हैं।

कार्यक्रम में एसपी मयंक मिश्रा ने कहा कि पराली जलाने वाले किसानों से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। पराली को आग लगाने वालों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि निगरानी के लिए पुलिस विभाग द्वारा टीमें गठित की गई हैं, जो आग लगने की सूचना मात्र से मौके पर पहुंचेगी। ऐसे में किसान पराली का उचित प्रबंधन करें और अपना कीमती समय थाने या कोर्ट में खर्च न करें।
पराली का प्रबंधन कर किसान उठाएं लाभ
कृषि विभाग के उप निदेशक राजेश सिहाग व कृषि अभियंता नसीब सिंह धनखड़ ने कार्यक्रम के दौरान किसानों को बताया कि जिले में इस साल 105 गांवों में कुल 54,734 एकड़ क्षेत्र में धान की खेती है। लगभग 85 हजार मीट्रिक टन पराली उत्पादन होने का अनुमान है। उन्होंने बताया कि 85 प्रतिशत धान की हाथ से कटाई होगी और 15 प्रतिशत मशीनों से कटाई होगी। हाथ से कटाई होने पर 500 से 600 रुपए प्रति क्विंटल फसल अवशेष चारे के लिए बिक्री होता है, जब की मशीन से कटाई से बेल बनाई जाती है, जो 270 रुपए प्रति क्विंटल बिकती हैं। उन्होंने बताया कि जिला में गांव दिनोद में जैमको पावर प्लांट को हर साल 50 हजार मी.टन पराली की डिमांड होती है तथा गांव ढाणा नरसान में ज्योति एनर्जी पावर प्लांट को 90 हजार मी.टन पराली प्रतिवर्ष पराली की डिमांड होती है। जिला में 10 हजार मी.टन बेल बनने का अनुमान है। उन्होंने बताया कि इनसीटू से 45 हजार मी.टन पराली खेत की मिट्टी में मिल जाएगी। चारे के लिए 30 हजार मी.टन और बेल बनाने में 10 हजार मी. टन पराली लग जाएगी।

विगत वर्ष जिला में पराली प्रबंधन पर किसानों को दिया 8 करोड़ 40 लाख रुपए
उन्होंने बताया कि जो मेरी फसल-मेरा ब्यौरा पर पंजीकृत धान वाले ऐसे किसान, जो पराली को आग नहीं लगाते हैं, उनको सरकार द्वारा 1200 रुपए प्रति एकड़ प्रोत्साहन राशि दी जाती है। जिला में पिछले साल जिला में पराली नहीं जलाने वाले करीब 14 हजार किसानों को कुल आठ करोड़ 40 लाख रुपए की राशि मिली है।
डीसी साहिल गुप्ता के निर्देशानुसार होगी सख्त निगरानी
पराली जलाने की घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए 173 नोडल अधिकारी नियुक्त किए हैं। इसके अलावा गांव, ब्लॉक, उपमंडल और जिला स्तर पर निगरानी के साथ मोबाइल टीमें भी गठित की गई हैं। मोबाइल टीमें खेतों में पराली जलाने की घटनाओं पर नजर रखेंगी। पराली को आग लगाने से बचाने के लिए साहिल गुप्ता द्वारा जिले में धारा 163 लागू की गई है।
पराली को आग लगाई तो किसान को होगा भारी नुकसान
पराली जलाने पर 5 से 30 हजार रुपये तक जुर्माना, एफआईआर तथा मेरी फसल-मेरा ब्योरा पोर्टल पर रेड एंट्री दर्ज करने जैसी कार्रवाई की जाएगी। आगामी दो वर्षों तक न्यूनतम समर्थन मूल्य पर फसल बेचने पर प्रतिबंध का प्रावधान है।