एक और लापता बच्ची को मिला अपना परिवार : सीडब्ल्यूसी की मुस्तैदी से घर से भटकी मासूम बच्ची को मिला सुरक्षित जीवन, मात्र 48 घंटों में परिजनों तक पहुंचाया
बच्चों की सुरक्षा ही है सीडब्ल्यूसी की सर्वोच्च प्राथमिकता : चेयरमैन अधिवक्ता प्रदीप सिंह तंवर
May 22, 2026, 15:54 IST
भिवानी, 22 मई : मानवीय संवेदनाओं और त्वरित कानूनी कार्रवाई का एक बेहतरीन उदाहरण पेश करते हुए बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) भिवानी ने रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) के साथ मिलकर एक मासूम बच्ची को ना केवल सुरक्षित रेस्क्यू किया, बल्कि महज 48 घंटों के भीतर उसे उसके परिवार से मिलने के लिए रवाना कर दिया। घर से रास्ता भटक कर स्टेशन पहुंची इस बच्ची की कुशल काउंसलिंग कर उसे पुनर्वासित करने में सीडब्ल्यूसी की टीम ने बेहद सराहनीय भूमिका निभाई है।
मामले की जानकारी देते हुए सीडब्ल्यूसी के सदस्य अधिवक्ता धीरज सैनी ने बताया कि 20 मई को रेलवे सुरक्षा बल को रेलवे स्टेशन पर एक मासूम बच्ची लावारिस और बदहवास हालत में घूमती हुई मिली थी। पूछने पर बच्ची काफी डरी हुई थी और अपने घर का पता या माता-पिता का नाम बताने में असमर्थ थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए आरपीएफ के जवानों ने तुरंत बाल कल्याण समिति से संपर्क किया। चेयरमैन प्रदीप सिंह तंवर के निर्देश पर तुरंत एक्शन लेते हुए बच्ची को सुरक्षित रखने और उसकी उचित देखभाल के लिए तत्काल वन स्टॉप सेंटर में भेजकर संरक्षण में लिया गया। इस पूरे रेस्क्यू और काउंसलिंग ऑपरेशन में बच्ची की मानसिक स्थिति को समझते हुए बेहद संवेदनशीलता के साथ उससे बातचीत की गई।
अगले ही दिन 21 मई को सीडब्ल्यूसी व आरपीएफ की संयुक्त टीम ने बच्ची की काउंसलिंग को आगे बढ़ाया। जिसके बाद बच्ची का डर दूर हुआ और उसने बताया कि वह मूल रूप से मध्य प्रदेश के होशंगाबाद की रहने वाली है। बच्ची ने यह भी साझा किया कि वह अपने परिजनों की डांट के डर से नाराज होकर बिना बताए घर से निकल आई थी और ट्रेन में बैठकर यहां तक पहुंच गई। तथ्य सामने आते ही मध्य प्रदेश में बच्ची के परिजनों और स्थानीय प्रशासन से संपर्क साधा और बच्ची के सकुशल मिलने की सूचना दी। जिसके बाद शुक्रवार को बाल कल्याण समिति के कार्यालय में कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद बच्ची को उसके परिजनों तक पहुंचाने के लिए आरपीएफ के सुपुर्द कर दिया।
सीडब्ल्यूसी चेयरमैन अधिवक्ता प्रदीप सिंह तंवर ने आरपीएफ को निर्देश दिए कि बच्ची को पूरी सुरक्षा के साथ उसके गृह जनपद (होशंगाबाद) तक पहुंचाया जाए। इस आदेश के बाद आरपीएफ के हेड कांस्टेबल शंकर और महिला कांस्टेबल सोनू की देखरेख में बच्ची और उसके परिवार को सकुशल रवाना किया गया। सीडब्ल्यूसी चेयरमैन अधिवक्ता प्रदीप सिंह तंवर ने कहा कि बच्चे देश का भविष्य हैं और उनकी सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। कई बार छोटी-मोटी पारिवारिक अनबन या डांट की वजह से बच्चे ऐसा आत्मघाती कदम उठा लेते हैं। वे सभी अभिभावकों से अपील करते है कि वे बच्चों के साथ दोस्ताना व्यवहार रखें, ताकि वे डरकर घर छोडऩे जैसा कदम न उठाएं।
इस रेस्क्यू अभियान को सफल बनाने में सीडब्ल्यूसी सदस्य धीरज सैनी, दिनेश अत्री, सतेंद्र तंवर, नीलम रानी, आरपीएफ एएसआई प्रवीण यादव, हैड कांस्टेबल शंकर, लेडी कांस्टेबल सोनू, स्पोर्टिंग पर्सन लक्ष्मी व हेमलता का विशेष सहयोग रहा।
मामले की जानकारी देते हुए सीडब्ल्यूसी के सदस्य अधिवक्ता धीरज सैनी ने बताया कि 20 मई को रेलवे सुरक्षा बल को रेलवे स्टेशन पर एक मासूम बच्ची लावारिस और बदहवास हालत में घूमती हुई मिली थी। पूछने पर बच्ची काफी डरी हुई थी और अपने घर का पता या माता-पिता का नाम बताने में असमर्थ थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए आरपीएफ के जवानों ने तुरंत बाल कल्याण समिति से संपर्क किया। चेयरमैन प्रदीप सिंह तंवर के निर्देश पर तुरंत एक्शन लेते हुए बच्ची को सुरक्षित रखने और उसकी उचित देखभाल के लिए तत्काल वन स्टॉप सेंटर में भेजकर संरक्षण में लिया गया। इस पूरे रेस्क्यू और काउंसलिंग ऑपरेशन में बच्ची की मानसिक स्थिति को समझते हुए बेहद संवेदनशीलता के साथ उससे बातचीत की गई।
अगले ही दिन 21 मई को सीडब्ल्यूसी व आरपीएफ की संयुक्त टीम ने बच्ची की काउंसलिंग को आगे बढ़ाया। जिसके बाद बच्ची का डर दूर हुआ और उसने बताया कि वह मूल रूप से मध्य प्रदेश के होशंगाबाद की रहने वाली है। बच्ची ने यह भी साझा किया कि वह अपने परिजनों की डांट के डर से नाराज होकर बिना बताए घर से निकल आई थी और ट्रेन में बैठकर यहां तक पहुंच गई। तथ्य सामने आते ही मध्य प्रदेश में बच्ची के परिजनों और स्थानीय प्रशासन से संपर्क साधा और बच्ची के सकुशल मिलने की सूचना दी। जिसके बाद शुक्रवार को बाल कल्याण समिति के कार्यालय में कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद बच्ची को उसके परिजनों तक पहुंचाने के लिए आरपीएफ के सुपुर्द कर दिया।
सीडब्ल्यूसी चेयरमैन अधिवक्ता प्रदीप सिंह तंवर ने आरपीएफ को निर्देश दिए कि बच्ची को पूरी सुरक्षा के साथ उसके गृह जनपद (होशंगाबाद) तक पहुंचाया जाए। इस आदेश के बाद आरपीएफ के हेड कांस्टेबल शंकर और महिला कांस्टेबल सोनू की देखरेख में बच्ची और उसके परिवार को सकुशल रवाना किया गया। सीडब्ल्यूसी चेयरमैन अधिवक्ता प्रदीप सिंह तंवर ने कहा कि बच्चे देश का भविष्य हैं और उनकी सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। कई बार छोटी-मोटी पारिवारिक अनबन या डांट की वजह से बच्चे ऐसा आत्मघाती कदम उठा लेते हैं। वे सभी अभिभावकों से अपील करते है कि वे बच्चों के साथ दोस्ताना व्यवहार रखें, ताकि वे डरकर घर छोडऩे जैसा कदम न उठाएं।
इस रेस्क्यू अभियान को सफल बनाने में सीडब्ल्यूसी सदस्य धीरज सैनी, दिनेश अत्री, सतेंद्र तंवर, नीलम रानी, आरपीएफ एएसआई प्रवीण यादव, हैड कांस्टेबल शंकर, लेडी कांस्टेबल सोनू, स्पोर्टिंग पर्सन लक्ष्मी व हेमलता का विशेष सहयोग रहा।

