- जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने पैनल अधिवक्ताओं व पीएलवी के लिए कार्यशाला का किया आयोजन
- कानूनी जागरूकता, महिला सुरक्षा और संवैधानिक अधिकारों पर दी गई विस्तार से जानकारी
May 15, 2026, 19:57 IST
भिवानी, 15 मई। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (डीएलएसए) द्वारा पैनल अधिवक्ताओं, मीडिएशन सदस्य और अधिकार मित्र (पीएलवी) के लिए एक विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह कार्यशाला जिला एवं सत्र न्यायालय के चेयरमैन डी.आर. चालिया के मार्गदर्शन तथा सीजेएम कम सचिव डीएलएसए पवन कुमार की अध्यक्षता में एडीआर सेंटर के सभागार में आयोजित हुई। कार्यक्रम का उद्देश्य पैनल अधिवक्ताओं और पीएलवी को विभिन्न कानूनी प्रावधानों, सामाजिक जिम्मेदारियों और जागरूकता कार्यक्रमों से संबंधित विषयों की जानकारी देकर समाज के अंतिम व्यक्ति तक न्याय और कानूनी सहायता पहुंचाने में उनकी भूमिका को और मजबूत बनाना रहा।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए सीजेएम कम सचिव पवन कुमार ने कहा कि जिला विधिक सेवा प्राधिकरण का मुख्य उद्देश्य समाज के जरूरतमंद, वंचित और कमजोर वर्गों को नि:शुल्क कानूनी सहायता उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि पैनल अधिवक्ता और पीएलवी इस व्यवस्था की मजबूत कड़ी हैं, जो आमजन तक न्याय और अधिकारों की जानकारी पहुंचाने में अहम भूमिका निभाते हैं। उन्होंने सभी सदस्यों से कानूनी जागरूकता बढ़ाने के लिए अधिक सक्रियता से कार्य करने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि कानूनी जानकारी के अभाव में लोग कई समस्याओं का सामना करते हैं। ऐसे में डीएलएसए द्वारा आयोजित जागरूकता कार्यक्रम समाज को उनके अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति जागरूक करने में महत्वपूर्ण साबित होते हैं।
कार्यशाला के दौरान विभिन्न विषय विशेषज्ञों ने कई महत्वपूर्ण कानूनी विषयों पर विस्तार से जानकारी साझा की। पैनल अधिवक्ता अनुराधा खनगवाल ने कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीडऩ (पीओएसएच अधिनियम-2013) और घरेलू हिंसा रोकथाम कानून के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि महिलाओं को सुरक्षित वातावरण प्रदान करना प्रत्येक संस्था और समाज की जिम्मेदारी है। उन्होंने महिलाओं के अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर विशेष जोर दिया।
सहायक कानूनी सहायता रक्षा वकील विनोद कुमार ने किशोर न्याय (देखभाल एवं संरक्षण) अधिनियम-2015, इसके नियमों और नवीनतम कानूनी पहलुओं पर जानकारी दी। उन्होंने पॉक्सो अधिनियम-2012 की विशेषताओं पर प्रकाश डालते हुए बच्चों की सुरक्षा और संवेदनशील मामलों में जागरूकता की आवश्यकता पर बल दिया।
उप मुख्य कानूनी सहायता बचाव वकील एवं पैनल अधिवक्ता बबली ने संविधान की मूल संरचना, प्रस्तावना और मौलिक अधिकारों पर चर्चा की। उन्होंने अनुच्छेद 14, 15, 16, 19, 21 और 22 के महत्व को बताते हुए कहा कि संविधान प्रत्येक नागरिक को समानता, स्वतंत्रता और सुरक्षा का अधिकार प्रदान करता है।
वहीं मध्यस्थता सदस्य डी.एन. सैनी ने समुदाय के जिम्मेदार नागरिकों के कर्तव्यों, मौलिक कर्तव्यों, कानूनी सेवा प्राधिकरण अधिनियम-1987 और एनएएलएसए विनियमों पर जानकारी दी। उन्होंने सामाजिक कार्यों में अनुशासन, नैतिकता और व्यवहार के महत्व को भी रेखांकित किया। कार्यक्रम के अंत में डीएलएसए भिवानी के सहायक मुकुल ने लोक सेवा संगठनों की भूमिका और जिम्मेदारियों पर विस्तार से जानकारी दी। कार्यशाला के समापन पर प्रतिभागियों ने इसे अत्यंत उपयोगी बताते हुए भविष्य में भी ऐसे आयोजन जारी रखने की आवश्यकता पर बल दिया और समाज में कानूनी जागरूकता बढ़ाने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए सीजेएम कम सचिव पवन कुमार ने कहा कि जिला विधिक सेवा प्राधिकरण का मुख्य उद्देश्य समाज के जरूरतमंद, वंचित और कमजोर वर्गों को नि:शुल्क कानूनी सहायता उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि पैनल अधिवक्ता और पीएलवी इस व्यवस्था की मजबूत कड़ी हैं, जो आमजन तक न्याय और अधिकारों की जानकारी पहुंचाने में अहम भूमिका निभाते हैं। उन्होंने सभी सदस्यों से कानूनी जागरूकता बढ़ाने के लिए अधिक सक्रियता से कार्य करने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि कानूनी जानकारी के अभाव में लोग कई समस्याओं का सामना करते हैं। ऐसे में डीएलएसए द्वारा आयोजित जागरूकता कार्यक्रम समाज को उनके अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति जागरूक करने में महत्वपूर्ण साबित होते हैं।
कार्यशाला के दौरान विभिन्न विषय विशेषज्ञों ने कई महत्वपूर्ण कानूनी विषयों पर विस्तार से जानकारी साझा की। पैनल अधिवक्ता अनुराधा खनगवाल ने कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीडऩ (पीओएसएच अधिनियम-2013) और घरेलू हिंसा रोकथाम कानून के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि महिलाओं को सुरक्षित वातावरण प्रदान करना प्रत्येक संस्था और समाज की जिम्मेदारी है। उन्होंने महिलाओं के अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर विशेष जोर दिया।
सहायक कानूनी सहायता रक्षा वकील विनोद कुमार ने किशोर न्याय (देखभाल एवं संरक्षण) अधिनियम-2015, इसके नियमों और नवीनतम कानूनी पहलुओं पर जानकारी दी। उन्होंने पॉक्सो अधिनियम-2012 की विशेषताओं पर प्रकाश डालते हुए बच्चों की सुरक्षा और संवेदनशील मामलों में जागरूकता की आवश्यकता पर बल दिया।
उप मुख्य कानूनी सहायता बचाव वकील एवं पैनल अधिवक्ता बबली ने संविधान की मूल संरचना, प्रस्तावना और मौलिक अधिकारों पर चर्चा की। उन्होंने अनुच्छेद 14, 15, 16, 19, 21 और 22 के महत्व को बताते हुए कहा कि संविधान प्रत्येक नागरिक को समानता, स्वतंत्रता और सुरक्षा का अधिकार प्रदान करता है।
वहीं मध्यस्थता सदस्य डी.एन. सैनी ने समुदाय के जिम्मेदार नागरिकों के कर्तव्यों, मौलिक कर्तव्यों, कानूनी सेवा प्राधिकरण अधिनियम-1987 और एनएएलएसए विनियमों पर जानकारी दी। उन्होंने सामाजिक कार्यों में अनुशासन, नैतिकता और व्यवहार के महत्व को भी रेखांकित किया। कार्यक्रम के अंत में डीएलएसए भिवानी के सहायक मुकुल ने लोक सेवा संगठनों की भूमिका और जिम्मेदारियों पर विस्तार से जानकारी दी। कार्यशाला के समापन पर प्रतिभागियों ने इसे अत्यंत उपयोगी बताते हुए भविष्य में भी ऐसे आयोजन जारी रखने की आवश्यकता पर बल दिया और समाज में कानूनी जागरूकता बढ़ाने का संकल्प लिया।

