सिखों के छठे गुरु श्री गुरु हरगोबिंद साहिब जी का प्रकाश उत्सव श्रद्धा एवं धूमधाम से मनाया गया
 

भिवानी के प्राचीन गुरुद्वारा सिंह सभा में छठे गुरु श्री गुरु हरगोबिंद साहिब जी का प्रकाश उत्सव धूमधाम से मनाया गया। जानें कार्यक्रम और गुरु साहिब के संदेश।

 
गुरु का लंगर भिवानी

भिवानी 2 जुलाई: 

भिवानी की पुरानी देवसर चुंगी स्थित प्राचीन गुरुद्वारा सिंह सभा में सिखों के छठे गुरु श्री गुरु हरगोबिंद साहिब जी का प्रकाश उत्सव श्रद्धा, उत्साह एवं धूमधाम के साथ मनाया गया। इस अवसर पर श्री सुखमनी साहिब के पाठ के भोग डाले गए तथा गुरु का अटूट लंगर बरताया गया।
लंगर में संगत के लिए विशेष रूप से मिस्सी रोटी, लस्सी, मीठी चटनी, आम तथा प्याज की सब्जी का प्रसाद वितरित किया गया। गुरुद्वारा सिंह सभा के मुख्य ग्रंथी भाई गुरबचन सिंह ने गुरबाणी कीर्तन के माध्यम से संगत को गुरु साहिब के बताए मार्ग पर चलने का संदेश दिया।
उन्होंने बताया कि श्री गुरु हरगोबिंद साहिब जी का जन्म वर्ष 1595 में गांव वडाली में सिखों के पांचवें गुरु श्री गुरु अर्जुन देव जी के घर हुआ था। मात्र 11 वर्ष की आयु में उन्होंने गुरु गद्दी संभाली। गुरु साहिब ने मीरी और पीरी के प्रतीक स्वरूप दो तलवारें धारण कीं। इनमें पीरी आध्यात्मिक शक्ति तथा मीरी सांसारिक दायित्व, न्याय और धर्म की रक्षा का प्रतीक है।
उन्होंने कहा कि गुरु हरगोबिंद साहिब जी ने सिखों में आत्मविश्वास, साहस और संगठन की भावना का संचार किया तथा धर्म और मानवता की रक्षा के लिए अनेक युद्ध लड़े। गुरु साहिब ने श्री अकाल तख्त साहिब की स्थापना भी की। वे निष्ठा, निस्वार्थ सेवा, बहादुरी और त्याग के प्रतीक थे। उनका जीवन मानवता की सेवा, धार्मिक स्वतंत्रता, धर्मनिरपेक्षता और आपसी भाईचारे का संदेश देता है तथा आज भी सत्य, न्याय और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा प्रदान करता है।
इस अवसर पर गुरुद्वारा परिसर में पाठ, कीर्तन एवं गुरु का अटूट लंगर आयोजित किया गया। कार्यक्रम में  पुरानी देवसर चुंगी स्थित प्राचीन गुरुद्वारा सिंह सभा  के प्रधान प्रेम मुटरेजा, ज्ञानी प्रेम सिंह ,ज्ञानसिंह बागड़ी ,मनप्रीत कौर, पूजा कौर ,लवप्रीत सिंह ,हरबंस कौर ,सुमन चावला , सुदेश सिंह ,लक्ष्मण सिंह फोरमेन , आरध्या सहित श्रद्धालुगण मौजूद थे।