- एकीकृत कृषि प्रणाली किसानों की आय को दोगुना करने का सशक्त माध्यम: डा. ममता फोगाट
लोहारू/भिवानी, 24 जून। कृषि विज्ञान केंद्र तथा कृषि एवं किसान कल्याण विभाग द्वारा गांव गिगनाऊ में खेत बचाओ अभियान के तहत किसान जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में किसानों को आय बढ़ाने, खेती की लागत कम करने तथा टिकाऊ खेती अपनाने के लिए विभिन्न महत्वपूर्ण जानकारियां दी गईं।
कार्यक्रम में मृदा वैज्ञानिक डॉ. ममता फौगाट ने कहा कि बढ़ती जनसंख्या और सीमित भूमि संसाधनों के बीच किसानों की आय बढ़ाने तथा खेती को लाभकारी बनाने के लिए एकीकृत कृषि प्रणाली सबसे प्रभावी माध्यम है। उन्होंने बताया कि फसल उत्पादन के साथ पशुपालन, बागवानी, मधुमक्खी पालन, मत्स्य पालन, मशरूम उत्पादन और अन्य कृषि आधारित गतिविधियों को जोडक़र किसान अपनी आय में उल्लेखनीय वृद्धि कर सकते हैं।
उन्होंने किसानों को मृदा जांच के महत्व के बारे में जागरूक करते हुए कहा कि मिट्टी की जांच से उसकी उर्वरता और पोषक तत्वों की सही जानकारी मिलती है। मृदा जांच रिपोर्ट के आधार पर संतुलित एवं वैज्ञानिक तरीके से उर्वरकों का प्रयोग करने से उत्पादन बढ़ता है, लागत कम होती है तथा पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलता है। भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान नई दिल्ली की प्रधान वैज्ञानिक (सूक्ष्मजीव विज्ञान) डॉ. मीनाक्षी ग्रोवर ने किसानों से जैव उर्वरकों के उपयोग की अपील करते हुए कहा कि इससे उत्पादन लागत कम होने के साथ-साथ मिट्टी और पर्यावरण भी सुरक्षित रहते हैं।
वरिष्ठ वैज्ञानिक (सस्य विज्ञान) डॉ. तुलसा रामने किसानों को फसल चक्र अपनाने की सलाह दी। आनुवंशिकी विभाग के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. रामा प्रसाद ने कहा कि किसानों को वैज्ञानिकों की सलाह के अनुसार ही फसलों की उन्नत किस्मों का चयन करना चाहिए। वैज्ञानिक (सांख्यिकी) डॉ. राजीव रंजन ने कहा कि खेती में लागत घटाने और आय बढ़ाने का संतुलन ही भविष्य की टिकाऊ कृषि का आधार है। डॉ. देवेंद्र सांगवान ने किसानों से इस संदेश को गांव-गांव तक पहुंचाने का आह्वान करते हुए कहा कि खेती को अधिक लाभकारी और टिकाऊ बनाने के लिए सभी किसानों को वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाना चाहिए। कार्यक्रम में किसानों ने विशेषज्ञों से खेती से जुड़े विभिन्न विषयों पर जानकारी प्राप्त की तथा आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने का संकल्प लिया।

