मानदेय नहीं, सम्मान चाहिए : हक के लिए भिवानी में सडक़ों पर उतरीं मिड-डे-मील कार्यकर्ता : प्रदर्शन कर सरकार को ललकारा

सरकारी स्कूलों में 8 घंटे हाड़-तोड़ मेहनत, पर बदले में सिर्फ 7 हजार का मज़ाक : राजबाला
 
 
भिवानी प्रदर्शन न्यूज़

भिवानी, 24 जून : 7 हजार रुपये में दम तोडऩे वाली व्यवस्था बंद करो, शोषण मुक्त रोजग़ार दो और हमें बंधुआ मज़दूर समझना बंद करो जैसे गगनभेदी नारों के साथ बुधवार को भिवानी की सडक़ें अपनी जायज़ मांगों के लिए लड़ रही महिलाओं के आक्रोश से गूंज उठीं। मिड-डे-मील कार्यकर्ता यूनियन हरियाणा (संबद्ध एआईयूटीयूसी व स्कीम वर्कर्स फेडरेशन ऑफ इण्डिया) के बैनर तले मिड-डे-मील कार्यकर्ताओं ने अपनी 10 सूत्रीय मांगों को लेकर शहर में एक विशाल और ऐतिहासिक रोष प्रदर्शन किया। स्थसानीय नेहरू पार्क में एकत्रित होने के बाद आक्रोशित कार्यकर्ताओं ने शहर के मुख्य मार्गों से होते हुए जिला उपायुक्त कार्यालय तक मार्च निकाला और मुख्यमंत्री के नाम जिला प्रशासन के माध्यम से एक मांग पत्र सौंपा।
      यूनियन की राज्य प्रधान राजबाला की अध्यक्षता में हुई सभा को संबोधित करते हुए श्रमिक नेताओं और यूनियन पदाधिकारियों का गुस्सा फूट पड़ा। वक्ताओं ने सरकार की दमनकारी और शोषक नीतियों पर तीखे प्रहार किए। उन्होंने कहा कि 12 महीने के काम पर सिर्फ 10 महीने का वेतन क्यों। यूनियन की महासचिव कुसुम पांचाल ने सरकार के दोहरे रवैये को उजागर करते हुए कहा कि हम सुबह स्कूल खुलने से लेकर बंद होने तक लगातार 8 घंटे काम करती हैं। लेकिन इस कमरतोड़ महंगाई के दौर में हमें मात्र 7000 रुपये मासिक मानदेय दिया जा रहा है। हद तो यह है कि बाकी सरकारी अमले को 12 महीने की सैलरी मिलती है, जबकि हमारा ग्रीष्मकालीन अवकाश का वेतन काटकर सिर्फ 10 महीने का मानदेय दिया जाता है। यह सरासर अन्याय और भेदभाव है। 
          यूनियन की महासचिव कुसुम पांचाल समेत कई वर्करों को झूठे आरोपों में नौकरी से निकाल दिया गया है, जिसे लेकर कार्यकर्ताओं में भारी रोष है। वक्ताओं ने साफ किया कि इस स्कीम में अधिकांश महिलाएं बेहद गरीब, बेसहारा या विधवा हैं, जिनके घरों का चूल्हा इसी नौकरी से जलता है। उन्होंने कहा कि उनकी मांगों में नियमित कर्मचारी का दर्जा, पूरे साल का मानदेय, वर्करों की बहाली व सुरक्षा, सम्मानजनक व्यवहार, सुरक्षा व संसाधन, ड्रेस और महंगाई भत्ता, सेवानिवृत्ति लाभ सहित अन्य है। एआईयूटीयूसी के राज्य प्रधान कामरेड राजेन्द्र सिंह ने सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि हरियाणा सरकार ने खुद राज्य में 15 हजार 220 रुपये का न्यूनतम वेतन घोषित किया है, लेकिन इन गरीब महिलाओं को उससे भी महरूम रखा गया है। सरकार इन्हें स्वयंसेवक का टैग देकर खुद सबसे बड़ी शोषक बन बैठी है। इन्हें न तो पेंशन मिलती है, न भविष्य निधि, न ग्रेच्युटी और न ही चिकित्सा सुरक्षा।
      सभा का संचालन एआईयूटीयूसी के उपाध्यक्ष रामफल ने किया। इस दौरान ईश्वर सिंह राठी, मास्टर सूबे सिंह, राजकुमार बासिया, पूनम, रेखा, कौशल्या, मुनेश और बिमला सहित कई जिला सचिवों ने भी सरकार को चेतावनी दी। श्रमिक नेताओं ने साफ लफ्ज़ों में कहा कि यदि सरकार ने उनकी ज्वलंत मांगों पर जल्द ही कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाया, तो इस आंदोलन को और तेज किया जाएगा। इसी रणनीति के तहत आगामी 25 अक्टूबर को रोहतक में राज्य स्तरीय महापंचायत बुलाई गई है, जिसमें हरियाणाभर से हजारों स्कीम वर्कर्स पहुंचकर सरकार के खिलाफ आर-पार की लड़ाई का शंखनाद करेंगी।