भिवानी नगर परिषद में महाविद्रोह : पार्षदों ने लगाया शहर का विकास नहीं, विनाश होने का आरोप
 

शहर के विभिन्न वार्डो के पार्षदों ने समाधान शिविर व सीएम विंडों में लगाई शिकायत, रोया दुखड़ा
पार्षदों ने लगाया आरोप : बीमार आदमी को मेकअप लगाकर स्वस्थ दिखाने की हो रही है कोशिश
 
 
नगर परिषद चेयरपर्सन विवाद
भिवानी, 04 जून : भिवानी शहर इस समय विकास की नहीं, बल्कि प्रशासनिक उदासीनता और कथित भ्रष्टाचार की सबसे बुरी मार झेल रहा है। यह हम नहीं, बल्कि खुद जनता द्वारा चुने गए नगर परिषद के पार्षद चीख-चीख कर कह रहे हैं। पिछले चार वर्षों से लगातार उपेक्षा का शिकार हो रहे पार्षदों का धैर्य अब जवाब दे चुका है। समाधान शिविर से लेकर सीएम विंडो तक, पार्षदों ने शहर की विभिन्न समस्याओं को लेकर जो गुहार लगाई है, उसने भिवानी नगर परिषद के दावों की धज्जियां उड़ाकर रख दी हैं। पार्षदों ने दो टूक शब्दों में प्रशासन पर हमला बोलते हुए कहा कि शहर में विकास नहीं, विनाश हो रहा है। हालात ऐसे हैं जैसे किसी गंभीर रूप से बीमार आदमी को सिर्फ मेकअप करके स्वस्थ दिखाने की नाकाम कोशिश की जा रही हो। इस दौरान पार्षद कमलेश देवी, पार्षद अनिल कुमार, पार्षद जयवीर रंगा, पार्षद सरला, पार्षद मनीष गुरेजा, पार्षद प्रदीप कौशिक, पार्षद सुदामा सिंह, पार्षद अंकुर कौशिक, पार्षद विनोद प्रजापति साथ रहे।
      पार्षदों का सबसे बड़ा रोष इस बात को लेकर है कि पिछले चार सालों से वार्डवासी अपनी शिकायतें लेकर उनके पास आते हैं, लेकिन जब वे इन समस्याओं को आगे बढ़ाते हैं, तो चेयरपर्सन प्रतिनिधि और अधिकारी इसे पूरी तरह अनसुनी कर देते हैं। हर मामले में सिर्फ लीपापोती की जा रही है। पार्षदों ने कहा कि जब जनता के चुने हुए प्रतिनिधियों (पार्षदों) की ही कोई सुनवाई नहीं हो रही और वे चार सालों से दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं, तो आम नागरिकों की इस सिस्टम में कहां और क्या सुनवाई होगी।
     वार्ड नंबर-29 से पार्षद सुदामा तंवर और वार्ड 30 से पार्षद मनीष गुरेजा ने सफाई व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं। पार्षदों का आरोप है कि सफाई कर्मचारियों के आवंटन में भारी भेदभाव किया जा रहा है, किसी वार्ड में केवल एक कर्मचारी है तो किसी चहेते वार्ड में 20-20 कर्मचारी तैनात हैं। उन्होंने कहा कि रोड, ढाणा रोड और 33 फुटा रोड पर पिछले 5 सालों से एक बार भी सफाई नहीं हुई है। श्री श्याम वेस्ट मैनेजमेंट प्राइवेट लिमिटेड कंपनी पूरी तरह फ्लॉप साबित हो चुकी है। कूड़ा उठाने वाले टीपरों के साथ कोई हेल्पर नहीं होता, जिससे बुजुर्गों को भारी परेशानी होती है। गलियों में ओवरफ्लो नालियों के कारण डेंगू और मलेरिया का खतरा मंडरा रहा है। उन्होंने कहा कि लाखों रुपये की लागत से बने सार्वजनिक शौचालय बंद पड़े हैं, जिन पर ताले लटके हैं। इसके कारण महिलाओं को भारी मानसिक व शारीरिक परेशानी झेलनी पड़ रही है और स्वच्छ भारत अभियान का मजाक उड़ रहा है।
      वार्ड 20 से पार्षद प्रदीप कौशिक और वार्ड 5 से पार्षद अंकुर कौशिक ने इस तथाकथित मॉडल रोड के निर्माण पर विजिलेंस जांच की मांग की है। पार्षदों का आरोप है कि पिछले 6 महीनों से इस सडक़ के कारण शहर में भयंकर जाम की स्थिति बनी हुई है। पास में ही पीजीआई होने के कारण गंभीर मरीजों को एम्बुलेंस में ही तड़पना पड़ता है। व्यापारियों के बार-बार निवेदन के बावजूद इस सडक़ को जबरन भीड़ा और फुटपॉथ को अत्यधिक चौड़ा बनाया जा रहा है, जिससे अतिक्रमण बढ़ेगा। इसकी निर्माण सामग्री, इंटरलॉकिंग टाइल्स और मोटाई में कोई गुणवत्ता मानक तय नहीं हैं, जो सीधे तौर पर जनता के पैसे का दुरुपयोग है।
        पार्षदों ने चेतावनी दी है कि रोहतक रोड से खाखी बाबा मंदिर तक जाने वाले पुराने बरसाती नाले को छोटे पाइप डालकर बंद कर दिया गया है। मैनहोल बनाते समय सुरक्षा और तकनीकी मानकों को पूरी तरह दरकिनार कर दिया गया। पार्षदों के अनुसार बिना किसी ठोस बेस और पाइपों की लेवलिंग के यह काम सिर्फ कागजों को भरने के लिए हुआ है। मानसून नजदीक है, जरा सी बारिश आते ही आधा शहर जलमग्न हो जाएगा और बाढ़ जैसी स्थिति पैदा हो जाएगी।
         वार्ड 14 से पार्षद जयवीर सिंह रंगा ने आरोप लगाया कि पिछले 4 वर्षों से उनके वार्ड में कोई उल्लेखनीय विकास कार्य नहीं हुआ है। प्रशासन द्वारा कुछ चुनिंदा वार्डों को लाभ पहुंचाने के लिए पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाया जा रहा है। वही वार्ड 10 से पार्षद सरला ने शिकायत की कि बैंक कॉलोनी मिनी बाईपास पर लक्ष्मी मिष्ठान भंडार से राम चौक तक भयंकर अतिक्रमण है। पालुवास मोड़ के सामने बनी सडक़ बनने के मात्र 3 महीने के भीतर ही टूट गई।
     इसके साथ ही पार्षदों ने आरोप लगाया कि जो पार्क की बेंच 2700 की आती है, उसे नगर परिषद ने 6000 की लागत में दिखाया है। 8 हजार रूपये की कीमत वाले शाइन बोर्डों को 20 हजार रूपये में लगवाया गया है। स्टील के डस्टबिनों की कीमत 20 से 22 हजार बताई जा रही है, जो पूरी तरह से जनता की गाढ़ी कमाई की लूट है। लोहारू रोड पर 5 साल पहले ही पोल और लाइटें लगी थीं, लेकिन मेंटेनेंस करने के बजाय पुरानी सही लाइटों को हटाकर दोबारा नई लाइटें लगाने का खेल खेला जा रहा है।  बनी-बनाई सडक़ों को जानबूझकर तोड़ा जा रहा है और गलियों के नवनिर्माण के नाम पर नारियल फोडक़र 6-6 महीने तक उन्हें वैसे ही उखाडक़र छोड़ दिया जाता है, जिससे लोगों का घर से निकलना दूभर हो गया है। उन्होंने मांग की कि भिवानी में चल रहे मॉडल रोड और बरसाती नाला पाइपलाइन प्रोजेक्ट की तुरंत प्रभाव से किसी स्वतंत्र तकनीकी टीम या विजिलेंस विभाग से निष्पक्ष जांच करवाई जाए। निर्माण स्थल से प्रयुक्त सामग्री के सैंपल उठाकर लैब टेस्ट कराए जाएं। श्री श्याम वेस्ट मैनेजमेंट कंपनी के टेंडर, भुगतानों और कार्यों की गहन समीक्षा कर सख्त निर्देश जारी किए जाएं। सरकारी धन का दुरुपयोग करने वाले भ्रष्ट अधिकारियों और ठेकेदारों के खिलाफ केस दर्ज कर सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाए।