ब्रह्मलीन कृष्णदास महाराज ने समाज को सदाचार, प्रेम और करुणा का मार्ग दिखाया : साध्वी करूणागिरी महाराज
 

प्राचीन श्री श्योलालपुरी शिव मन्दिर में ब्रह्मलीन कृष्णदास महाराज की 33वीं पुण्यतिथि मनाई गई। महामंडलेश्वर साध्वी करूणागिरी महाराज के सान्निध्य में हवन और कन्या पूजन संपन्न।
 
Kanya Pujan and Bhandara Bhiwani News
भिवानी, 16 मई : छोटी काशी के नाम से विख्यात भिवानी में शनिवार को एक अलौकिक आध्यात्मिक समागम का आयोजन किया गया। यह भव्य आयोजन परम पूज्य ब्रह्मलीन कृष्णदास महाराज की 33वीं पुण्यतिथि के पावन अवसर पर किया गया। स्थानीय सोमवारी माता मंदिर के समीप स्थित प्राचीन श्री श्योलालपुरी शिव मन्दिर में आयोजित इस समागम में भिवानी और आसपास के क्षेत्रों से भारी संख्या में श्रद्धालु उमड़े, जिससे पूरा परिसर भक्तिमय घाटियों और जयकारों से गूंज उठा। इस दिन को पूरी श्रद्धा, निष्ठा और सेवा भाव के साथ मनाने के लिए श्री श्योलालपुरी शिव मन्दिर समिति और भक्तों द्वारा पिछले कई दिनों से व्यापक तैयारियां की जा रही थीं। कार्यक्रम की विस्तृत जानकारी देते हुए महामंडलेश्वर साध्वी करूणागिरी महाराज ने बताया कि शनिवार को दिन भर धार्मिक अनुष्ठानों की एक पवित्र श्रृंखला चली। उन्होंने बताया कि दिन की शुरुआत प्रात: 7 बजे सात्विक और ऊर्जावान माहौल में हुई। सबसे पहले यज्ञ  का आयोजन किया गया, जिसमें विद्वान आचार्यों द्वारा किए गए वेदमंत्रों के उच्चार से पूरा वातावरण शुद्ध और सकारात्मक ऊर्जा से भर गया। विश्व कल्याण और लोक-हित की कामना के साथ आहुतियां डाली गईं। सनातन परंपरा का निर्वहन करते हुए समागम में शक्ति स्वरूपा कन्याओं का विशेष पूजन किया गया। मंदिर परिसर में छोटी-छोटी कन्याओं को साक्षात् मां दुर्गा का रूप मानकर उनके पैर पखारे गए, उन्हें तिलक लगाया गया और रक्षा सूत्र बांधकर आशीर्वाद लिया गया। इसके उपरांत सभी कन्याओं को अत्यंत श्रद्धापूर्वक सुरुचिपूर्ण भोज कराया गया। कन्या पूजन के संपन्न होते ही विशाल भंडारे (प्रसाद वितरण) का शुभारंभ हुआ, जो देर शाम तक अनवरत चलता रहा। महामंडलेश्वर साध्वी करूणागिरी महाराज ने कहा कि परम पूज्य महाराज का संपूर्ण जीवन केवल और केवल जनकल्याण, नि:स्वार्थ सेवा और अनन्य भक्ति को समर्पित रहा। उन्होंने समाज को सदाचार, प्रेम और करुणा का मार्ग दिखाया। आज उनकी 33वीं पुण्यतिथि पर आयोजित यह भव्य समागम केवल एक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि उनकी पावन शिक्षाओं, आदर्शों और मूल्यों को अपने जीवन में जीवंत रखने का एक सशक्त माध्यम है। जब तक हम उनके बताए सेवा मार्ग पर चलते रहेंगे, समाज में सकारात्मकता का प्रवाह होता रहेगा। समागम में आए श्रद्धालुओं ने कहा कि ऐसे आयोजनों से न केवल मन को शांति मिलती है, बल्कि भावी पीढ़ी को भी अपनी जड़ों और संस्कारों से जुडऩे की प्रेरणा मिलती है।