संत सेवा ही ईश्वर कृपा का सबसे श्रेष्ठ माध्यम : स्वामी कृष्णानन्द सरस्वती
भक्ति के रंग में रंगी भिवानी : स्वामी भास्करानंद महाराज की स्मृति में दिव्य अष्टदिवसीय महोत्सव जारी
Jun 6, 2026, 17:33 IST
भिवानी, 06 जून : छोटी काशी के नाम से मशहूर भिवानी नगरी इन दिनों पूरी तरह से भक्ति, श्रद्धा और अध्यात्म के रंग में सराबोर है। यहां तपोभूमि परमहंस योगाश्रम धाम में चल रहे वार्षिक महोत्सव के कारण पूरा क्षेत्र एक अनूठे आध्यात्मिक प्रवाह में गोते लगा रहा है। चारों ओर गूंजते मंत्रोच्चार और भजनों की ध्वनि से माहौल पूरी तरह दिव्य हो चुका है। यह महोत्सव श्रीश्री 1008 स्वामी भास्करानंद परमहंस महाराज की पुण्यस्मृति में आयोजित किया जा रहा है। भिवानी और आसपास के क्षेत्रों से हजारों श्रद्धालु महाराज के प्रति अपनी अटूट आस्था और श्रद्धा प्रकट करने आश्रम पहुंच रहे हैं। यह आठ दिवसीय महोत्सव 7 जून तक पूरी श्रद्धा, उल्लास और धार्मिक नियमों के साथ जारी रहेगा। इस विशाल धार्मिक समागम का सफल संपादन स्वामी कृष्णानन्द सरस्वती महाराज के पावन सान्निध्य में किया जा रहा है। महोत्सव में प्रतिदिन कथा, सत्संग और संतों के प्रवचनों का दौर चल रहा है, जिसे सुनने के लिए दूर-दूर से भारी संख्या में श्रद्धालु उमड़ रहे हैं। पूरा पंडाल भक्तों की भीड़ से खचाखच भरा नजर आ रहा है। महोत्सव के दौरान उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए तपोभूमि परमहंस योगाश्रम के पीठाधीश्वर स्वामी कृष्णानन्द सरस्वती महाराज व कथाव्यास स्वामी मदन मोहन अलंकार ने भारतीय संस्कृति में संत सेवा के महत्व पर विशेष प्रकाश डालते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति में संतों की सेवा को सर्वोपरि और बेहद महत्वपूर्ण माना गया है। सच्चे मन से संतों की सेवा करने से मनुष्य का मन शुद्ध, पवित्र और शांत होता है। जब हम संतों के सान्निध्य में बैठते हैं, तो हमें सच्चा ज्ञान, निश्छल भक्ति और उच्च संस्कार प्राप्त होते हैं। उन्होंने कहा कि संत सेवा व्यक्ति के भीतर छिपे अहंकार का समूल नाश करती है और उसमें विनम्रता का विकास करती है। यह आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त करने और साक्षात ईश्वर की कृपा प्राप्त करने का सबसे सरल व श्रेष्ठ साधन है। इसलिए प्रत्येक मनुष्य को जीवन में समय निकालकर पूरी श्रद्धा और निस्वार्थ भाव से संतों की सेवा व उनका सत्कार करना चाहिए। इस धार्मिक महोत्सव का एक मुख्य आकर्षण बच्चों द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रम रहे। रंग-बिरंगी पोशाकों में सजे बच्चों ने मंच पर अपनी कला का ऐसा जादू बिखेरा कि हर कोई मंत्रमुग्ध हो गया। बच्चों ने बेहद सुंदर, भावपूर्ण और मनमोहक नृत्य कला के माध्यम से भगवान शिव और गुरु की महिमा का सुंदर चित्रण किया।

