Pitru Amavasya Bhiwani: तला हुआ भोजन खाने से बीमार पड़ीं गायें, प्रशासन और गौभक्तों की मुस्तैदी से टला बड़ा हादसा

भिवानी में डीसी साहिल गुप्ता की अपील और पशुपालन विभाग की मुस्तैदी से पितृ अमावस्या पर तला हुआ भोजन खाने से बीमार हुई 37 गायों की जान बचा ली गई।

 
Pitru Amavasya cow health alert

पितृ अमावस्या पर डीसी की अपील पर आमजन व गौ भक्तों के सहयोग से पशुपालन विभाग ने बचाई 37 गायों की जान

पशुपालन विभाग के अनुसार पिछले साल की तुलना में अबकी बार गायों की मौत हुई है कम

भिवानी, 12 अक्टूबर।  डीसी साहिल गुप्ता के सख्त आदेश व आमजन से की गई अपील ने पितृ अमावस्या पर जिलेभर में अनेक गायों का जीवन बचाने का काम किया है। नगर परिषद प्रशासन, गौभक्तों व आमजन की मुस्तैदी के साथ-साथ पशुपालन विभाग द्वारा महम रोड़ स्थित गौशाला में 37 गायों की जान बचाई गई है। पशुपालन विभाग के अनुसार जागरूकता के कारण अबकी बार पिछले साल की तुलना में गायों की मौत कम हुई है। गौशाला में अभी भी करीब आधा दर्जन गायों का उपचार चल रहा है, जो खतरे से बाहर बताई जा रही हैं।

उल्लेखनीय है कि पितृ अमावस्या पर अक्सर लोग गायों को तली हुआ भोजन जैसे हलवा, पूरी और खीर आदि खिलाते हैं। श्रद्धा के नाम खिलाया जाने वाला यह अत्यधिक भोजन गायों की मौत का कारण बन जाता है। पशुपालन विभाग के अनुसार तली हुई चीजों से गाय के शरीर में एसिड बनकर अफारा आ जाता है, जिससे गाय की मौत हो जाती है।

गायों का जीवन बचाने के चलते ही डीसी साहिल गुप्ता ने पितृ अमावस्या पर आमजन से अपील की थी कि वे गायों को तला हुआ भोजन खिलाने की बजाय गौशाला में हरा चारा दान करें। वहीं डीसी ने नगर परिषद प्रशासन और पुलिस को भी ऐसे सार्वजनिक स्थलों पर निरंतर गश्त करने के निर्देश दिए थे, जहां पर अक्सर गाय अत्यधिक संख्या में खड़ी होती हैं। इसके साथ ही डीसी ने पशुपालन विभाग को 24 घंटे पशु चिकित्सकों की तैनाती करने के निर्देश दिए थे।

डीसी की सख्ती का असर साफतौर पर दिखाई दिया। डीसी के आदेशानुसार महम रोड़ स्थित गौशाला का गायों के उपचार का मुख्य सेंटर बनाया गया। वहीं पशुपालन विभाग के उप निदेशक डॉ. रविंद्र सहरावत ने सभी पशु चिकित्सकों का अवकाश रद्द किया। विभाग ने आठ-आठ घंटे ड्यूटी के लिए नौ टीमों का गठन किया। सभी टीमों में दो-दो पशु चिकित्सक, चार-चार वीएलडीए और छह-छह एनिमल एटेंडेंट शामिल हैं।

पशु चिकित्सक डॉ. विजय सनसनवाल ने बताया कि पितृ अमावस्या पर गौ भक्तों द्वारा गौशाला में कुल 49 गायों को लाया गया, जिनमें छह गायों की मौत गौशाला में पहुंचने से पहले ही चुकी थी। शेष 37 गायों में छह गायों की हालत अत्यधिक नाजुक थी, जिनको भरसक प्रयास करने के बाद भी बचाया नहीं जा सका। पशुपालन विभाग 37 गायों की जान बचाने में सफल रहा।

उन्होंने बताया कि डीसी श्री गुप्ता के आदेशों के चलते पिछले साल की तुलना में अबकी बार लोगों में जागरूकता देखने को मिली। सडक़ों पर बेसहारा गायों की संख्या में काफी कम मिली। लागों ने सडक़ों को गायों को भोजन खिलाने की बजाय गौशाला में या ड्रम में हरा चारा डाला है।