पॉक्सो कानून की बच्चों को दी जानकारी : डीएलएसए ने पौधे वितरित कर दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश
भिवानी के स्कूलों में DLSA द्वारा पॉक्सो अधिनियम-2012 पर जागरूकता शिविर। सीजेएम पवन कुमार ने छात्रों को यौन अपराधों से सुरक्षा और कानूनी अधिकारों के बारे में बताया।
भिवानी, 16 जुलाई। जिला एवं सत्र न्यायाधीश-सह-अध्यक्ष डीएलएसए डॉ. गगनदीप कौर सिंह के मार्गदर्शन में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (डीएलएसए)द्वारा वैश्य मॉडल वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय एवं पब्लिक स्कूल बाल भवन वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में बाल लैंगिक अपराधों से संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम-2012 विषय पर विधिक जागरूकता शिविर आयोजित हुआ। कार्यक्रम में मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी-सह-सचिव डीएलएसए पवन कुमार ने बतौर मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। सीजेएम ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए पर्यावरण संरक्षण का संदेश देकर पौधे वितरित किए।
मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी पवन कुमार ने कहा कि पॉक्सो अधिनियम, 2012 बच्चों को यौन अपराधों से सुरक्षा प्रदान करने वाला एक प्रभावी और संवेदनशील कानून है। उन्होंने विद्यार्थियों को अधिनियम के प्रमुख प्रावधानों, अपराधों की जांच प्रक्रिया, दोषियों के लिए निर्धारित सजा तथा पीड़ित बच्चों को उपलब्ध कानूनी सहायता के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि 18 वर्ष से कम आयु का प्रत्येक व्यक्ति कानून की दृष्टि में बच्चा माना जाता है तथा ऐसे मामलों में नाबालिग की सहमति का कोई कानूनी महत्व नहीं होता।
डीएलएसए की पैनल अधिवक्ता राजबाला ख्यालिया तथा बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) से सोशल वर्कर रिंकू व प्रवेश रानी अधिकार मित्र ने पॉक्सो अधिनियम के तहत अनिवार्य सूचना के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यदि किसी बच्चे के साथ यौन अपराध होने की जानकारी या संदेह हो तो इसकी सूचना तुरंत पुलिस या संबंधित प्राधिकारी को देना प्रत्येक नागरिक का कानूनी दायित्व है। उन्होंने सपोर्ट पर्सन और बाल पीड़ितों के लिए विधिक सहायता योजना की जानकारी देते हुए बताया कि विधिक सहायता अधिवक्ता एवं सपोर्ट पर्सन पूरी न्यायिक प्रक्रिया के दौरान बच्चे के अधिकारों की रक्षा करते हुए हर संभव सहयोग सुनिश्चित करते हैं। शिविर में डीएलएसए के अधिकारी, विद्यालय स्टाफ एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने भाग लेकर कानून की जानकारी प्राप्त की।

