भिवानी पुलिस की नई पहल: 'डबल ओटीपी' से रुकेगी साइबर ठगी और डिजिटल अरेस्ट

पुलिस अधीक्षक सुमित कुमार ने वरिष्ठ नागरिकों की सुरक्षा के लिए 'डबल ओटीपी' प्रणाली लॉन्च की। जानें कैसे यह दोहरी सुरक्षा परत डिजिटल अरेस्ट और ठगी को रोकेगी।

 
साइबर ठगी हेल्पलाइन हरियाणा

प्रेस नोट
ज़िला पुलिस भिवानी
दिनांक 02, मई, 2026

डिजिटल अरेस्ट पर लगेगी लगाम, डबल ओटीपी बनेगा सुरक्षा की नई पहचान - पुलिस अधीक्षक भिवानी।

पुलिस महानिदेशक हरियाणा श्री अजय सिंघल आईपीएस के कुशल मार्गदर्शन में पुलिस अधीक्षक भिवानी श्री सुमित कुमार  भा पु से  ने साइबर अपराधों की रोकथाम एवं आमजन, विशेषकर वरिष्ठ नागरिकों की सुरक्षा को और अधिक मजबूत बनाने के उद्देश्य से ज़िला भिवानी के सभी प्रबंधक अफ़सर ,सभी सी आई ए स्टाफ जिला भिवानी व ज़िला भिवानी के सभी उप पुलिस अधीक्षकों  के साथ बैठक आयोजित की ।

पुलिस अधीक्षक भिवानी ने बैठक में सुरक्षा प्रणाली के तकनीकी पहलुओं, कार्यप्रणाली तथा आमजन तक इसकी पहुंच सुनिश्चित करने को लेकर विस्तार से चर्चा की गई।

पुलिस अधीक्षक भिवानी ने कहा कि वर्तमान समय में साइबर अपराधी तकनीकी रूप से बैंक खातों को हैक करने के बजाय लोगों को मानसिक दबाव, भय, झूठे कानूनी मामलों, डिजिटल अरेस्ट, फर्जी निवेश योजनाओं तथा सरकारी अधिकारी बनकर प्रतिरूपण (इम्पर्सोनेशन) जैसे तरीकों से भ्रमित कर स्वयं उनसे ओटीपी साझा करवाकर ठगी की घटनाओं को अंजाम देते हैं। ऐसे मामलों में पारंपरिक एकल ओटीपी प्रणाली कई बार पर्याप्त सुरक्षा प्रदान नहीं कर पाती। इसी चुनौती से निपटने के लिए डबल ओटीपी प्रणाली एक प्रभावी सुरक्षा कवच के रूप में सामने आई है।

उन्होंने बताया कि इस प्रणाली के अंतर्गत पहले चरण में सामान्य ओटीपी संबंधित वरिष्ठ नागरिक के मोबाइल नंबर पर प्राप्त होता है, जबकि दूसरे चरण में एक अतिरिक्त ओटीपी अथवा पुष्टि कॉल उस विश्वसनीय व्यक्ति के पास जाती है, जिसे खाताधारक ने अपने परिजन अथवा भरोसेमंद संपर्क के रूप में नामित किया होता है। दोनों स्तरों पर सत्यापन पूर्ण होने के बाद ही लेन-देन संपन्न होता है। यह व्यवस्था लेन-देन प्रक्रिया में एक अतिरिक्त “सुरक्षा विराम” प्रदान करती है, जिससे संदिग्ध परिस्थितियों में धोखाधड़ी की संभावना को काफी हद तक रोका जा सकता है।

पुलिस अधीक्षक भिवानी ने कहा कि यह पहल विशेष रूप से 60 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों, पेंशनधारकों एवं अकेले रहने वाले व्यक्तियों के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगी, क्योंकि साइबर अपराधी अक्सर इस वर्ग को आसान लक्ष्य बनाते हैं। बड़ी राशि के लेन-देन पर दोहरी पुष्टि की व्यवस्था उन्हें आर्थिक नुकसान से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। उन्होंने बताया कि फिलहाल यह सुविधा वरिष्ठ नागरिकों के लिए शुरू की गई है तथा भविष्य में इसके दायरे को चरणबद्ध रूप से विस्तारित किए जाने की योजना है।

बैठक के दौरान अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि डबल ओटीपी प्रणाली के प्रति अधिक से अधिक जागरूकता फैलाने हेतु बैंकिंग संस्थानों, सार्वजनिक कार्यक्रमों, सोशल मीडिया, रेडियो, केबल नेटवर्क एवं अन्य प्रचार माध्यमों का प्रभावी उपयोग किया जाए, ताकि अधिकाधिक लोग इस सुरक्षा सुविधा से जुड़ सकें।

पुलिस अधीक्षक भिवानी ने कहा कि डबल ओटीपी प्रणाली साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण और दूरगामी पहल है, जो आर्थिक अपराधों की रोकथाम में निर्णायक साबित हो सकती है। यह केवल तकनीकी सुविधा नहीं, बल्कि आमजन विशेषकर वरिष्ठ नागरिकों को मानसिक दबाव आधारित साइबर ठगी से सुरक्षित रखने की एक मजबूत सुरक्षा परत है।

वरिष्ठ नागरिकों के लिए विशेष सुरक्षा कवच

उन्होंने कहा कि डिजिटल अरेस्ट, फर्जी निवेश और अन्य ऑनलाइन धोखाधड़ी के बढ़ते मामलों को देखते हुए यह व्यवस्था समय की आवश्यकता है। जब भी कोई संदिग्ध या दबावपूर्ण परिस्थिति उत्पन्न हो, यह दोहरी सत्यापन प्रक्रिया व्यक्ति को सोचने और ठगी को पहचानने का अवसर देती है, जिससे अपराधियों की मंशा विफल हो सकती है।

👉पुलिस अधीक्षक भिवानी  ने आमजन से अपील की है कि वे अपने बैंक खातों में डबल ओटीपी/ड्यूल ऑथेंटिकेशन सुविधा सक्रिय करवाने की दिशा में पहल करें तथा किसी विश्वसनीय परिजन अथवा परिचित को अपने सुरक्षा संपर्क के रूप में जोड़ें। साथ ही, किसी भी संदिग्ध कॉल, दबाव, धमकी अथवा साइबर ठगी की आशंका होने पर तुरंत पुलिस हेल्पलाइन अथवा निकटतम पुलिस स्टेशन से संपर्क करें।

भिवानी पुलिस ने कहा कि साइबर सुरक्षा केवल तकनीक नहीं, बल्कि जागरूकता, सतर्कता और सामूहिक भागीदारी से ही मजबूत हो सकती है। डबल ओटीपी प्रणाली इसी दिशा में एक सशक्त और भरोसेमंद कदम है।

पुलिस प्रवक्ता भिवानी।।