भक्तिभाव से सराबोर हुआ भिवानी : कलश यात्रा के साथ श्रीमद् भागवत कथा का भव्य शुभारंभ
पूर्व मंत्री डा.. वासुदेव शर्मा ने सपरिवार की पूजा-अर्चना, कहा : जीवन को सही दिशा देने वाला साक्षात कल्पवृक्ष है श्रीमद् भागवत कथा
Jun 8, 2026, 17:35 IST
भिवानी, 08 जून : छोटी काशी भिवानी के बाग कोठी के नजदीक, टाईयान पाना स्थित राधा-कृष्ण मंदिर में सोमवार से सात दिवसीय श्रीमद् भागवत ज्ञान यज्ञ का अत्यंत श्रद्धा और उल्लास के साथ शुभारंभ हो गया। इस धार्मिक अनुष्ठान का आयोजन लीलाराम प्रजापत एवं समस्त प्रजापत परिवार द्वारा करवाया जा रहा है। कथा के पहले दिन आयोजित भव्य कलश यात्रा में उमड़े जनसैलाब ने पूरे क्षेत्र को भक्ति के रंग में सराबोर कर दिया। श्रीमद् भागवत कथा के भव्य शुभारंभ पर मुख्य यजमान के तौर पर पहुंचे प्रदेश के पूर्व मंत्री डॉ. वासुदेव शर्मा, उनकी धर्मपत्नी ममता शर्मा और उनके पौत्र नैतिक शर्मा ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना की और व्यास पीठ से आशीर्वाद लिया।सोमवार सुबह मंदिर परिसर से एक विशाल कलश यात्रा निकाली गई, जिसमें बड़ी संख्या में मातृशक्ति ने पारंपरिक वेशभूषा में सिर पर मंगल कलश धारण कर भिवानी की परिक्रमा की। भजनों की धुन और जय श्री कृष्णा के जयकारों से पूरा वातावरण गुंजायमान हो उठा। कलश यात्रा के उपरांत मुख्य कथा का शुभारंभ हुआ, जिसमें सुप्रसिद्ध कथाव्यास श्री नरेश चंद्र शास्त्री अपनी सुमधुर वाणी से श्रद्धालुओं को भागवत महापुराण के दिव्य प्रसंगों का रसपान करा रहे हैं। शास्त्री ने पहले दिन भागवत महात्म्य का वर्णन करते हुए उपस्थित जनसमूह को कथा श्रवण के नियमों और इसके महत्व से अवगत कराया। इस अवसर पर मुख्य यजमान के रूप में शिरकत करने पहुंचे पूर्व मंत्री डा. वासुदेव शर्मा ने कहा कि श्रीमद् भागवत कथा कोई सामान्य आयोजन नहीं, बल्कि साक्षात भगवान कृष्ण का वांग्मय स्वरूप है। आज की भागदौड़ भरी और तनावपूर्ण जिंदगी में जहां इंसान शांति की तलाश में भटक रहा है, वहां भागवत कथा मन को असीम शांति और आत्मा को पवित्रता प्रदान करती है। यह कथा मनुष्य को केवल मुक्ति का मार्ग ही नहीं दिखाती, बल्कि समाज में आपसी प्रेम, सद्भाव और नैतिक मूल्यों को कैसे जिंदा रखा जाए, इसका व्यावहारिक ज्ञान भी देती है। डॉ. शर्मा ने आगे कहा कि भिवानी जैसी धर्मनगरी में इस तरह के आयोजन नई पीढ़ी को अपनी समृद्ध संस्कृति और संस्कारों से जोडऩे का बेहतरीन माध्यम हैं।

