गीता मनीषी स्वामी श्री ज्ञानानंद महाराज के द्वारा वैदिक हवन-यज्ञ सम्पन्न
भिवानी में श्री कृष्ण कृपा जियो गीता परिवार द्वारा आयोजित भव्य हवन-यज्ञ। स्वामी ज्ञानानंद महाराज ने गीता के आदर्शों और सेवा भाव पर दिया दिव्य संदेश।
भिवानी। श्री कृष्ण कृपा जियो गीता परिवार के जिला अध्यक्ष नरेश आहूजा के रोहतक रोड स्थित बजरंगबली कॉलोनी निवास पर गीता मनीषी स्वामी श्री ज्ञानानंद महाराज के द्वारा वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ भव्य हवन-यज्ञ का आयोजन किया गया। इस अवसर पर अतिरिक्त उपायुक्त दीपक बाबूलाल करवा सहित शहर के अनेक प्रबुद्ध नागरिक, समाजसेवी, उद्योगपति, शिक्षाविद एवं धर्मप्रेमी श्रद्धालुओं ने यज्ञ में आहुति अर्पित कर राष्ट्र की उन्नति, विश्व शांति और जनकल्याण की कामना की।
इस अवसर पर गीता मनीषी स्वामी श्री ज्ञानानंद महाराज ने कहा कि यज्ञ केवल अग्नि में आहुति डालने का कर्मकांड नहीं, बल्कि अपने भीतर के अहंकार, क्रोध, लोभ और स्वार्थ का समर्पण करने की दिव्य साधना है। जब मनुष्य अपने दुर्गुणों का त्याग करता है, तभी उसके जीवन में वास्तविक यज्ञ सम्पन्न होता है।
उन्होंने कहा कि श्रीमद्भगवद्गीता मनुष्य को कर्म, कर्तव्य, संयम और समर्पण का मार्ग दिखाती है। गीता हमें सिखाती है कि बिना किसी फल की इच्छा के समाज, राष्ट्र और मानवता की सेवा करना ही सच्चा धर्म है। आज समाज में बढ़ती अशांति, तनाव और नैतिक पतन का समाधान केवल गीता के आदर्शों को जीवन में उतारने से ही संभव है।
स्वामी जी ने कहा कि जहां यज्ञ होता है वहां सकारात्मक ऊर्जा, पवित्रता और सद्भाव का संचार होता है। यज्ञ वातावरण को ही नहीं, बल्कि मन और विचारों को भी शुद्ध करता है। वहीं गीता मनुष्य को आत्मबल, विवेक और कठिन परिस्थितियों में भी धर्म के मार्ग पर अडिग रहने की प्रेरणा देती है।
उन्होंने कहा कि यदि प्रत्येक व्यक्ति अपने जीवन में एक अच्छा विचार, एक निस्वार्थ सेवा और एक सत्कर्म प्रतिदिन करने का संकल्प ले ले, तो परिवार, समाज और राष्ट्र में स्वतः सुख, शांति और समृद्धि का वातावरण स्थापित हो जाएगा। यही गीता का वास्तविक संदेश और यज्ञ की सच्ची साधना है।
उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि प्रतिदिन गीता का कम से कम एक श्लोक पढ़ें, उसके भाव को समझें और अपने व्यवहार में उतारें। यदि प्रत्येक परिवार गीता के संदेशों को अपनाए, तो घर में सुख-शांति, समाज में समरसता और राष्ट्र में नैतिकता का नया वातावरण स्थापित हो सकता है।
हवन-यज्ञ के समापन पर पूर्णाहुति दी गई तथा उपस्थित श्रद्धालुओं ने स्वामी श्री ज्ञानानंद महाराज का आशीर्वाद प्राप्त कर धर्म, सेवा और संस्कारों के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया। पूरे आयोजन का वातावरण भक्तिमय, आध्यात्मिक और प्रेरणादायी बना रहा।

