समाज में विलुप्त हो रहे संस्कारों को पुनर्जीवित करते है सांस्कृतिक आयोजन : राजेश कुमार
22 जून :
भिवानी जिला के गांव उमरावत स्थित सूर्यकवित पंडित लक्ष्मीचंद आश्रम में म्हारी संस्कृति म्हारा स्वाभिमान संगठन द्वारा आयोजित सात दिवसीय भव्य सांस्कृतिक महोत्सव का समापन बेहद हर्षोल्लास और सकारात्मक माहौल में हुआ। यह महोत्सव संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष हनुमान कौशिक की अध्यक्षता में हुआ। इस सांस्कृतिक महाकुंभ के समापन समारोह में म्हारी संस्कृति म्हारा स्वाभिमान संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष व कार्यक्रम के मुख्य आयोजक हनुमान कौशिक को उनके उल्लेखनीय सांस्कृतिक एवं सामाजिक योगदान के लिए अपनी संस्कृति अपने संस्कार मंच के ब्रांड एंबेसडर व हरियाणवी फिल्मी अभिनेता इंदर सिंह लांबा के कुशल नेतृत्व में मंच के सदस्यों ने विशेष रूप से स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया।
बता दे कि सात दिनों तक चले इस महोत्सव में हरियाणा की समृद्ध लोक संस्कृति के विभिन्न रंग देखने को मिले। महोत्सव के दौरान हर दिन अलग-अलग विख्यात सांग मंडलियों द्वारा विभिन्न सामाजिक और ऐतिहासिक विषयों पर सांग कला का जीवंत प्रदर्शन किया गया, जिसे देखने के लिए भारी संख्या में कलाप्रेमी उमड़े। सांग कला के साथ-साथ युवाओं और स्थानीय नागरिकों को अपनी जड़ों से जोडऩे के लिए हरियाणवी पोशाक प्रतियोगिता और देशभक्ति व सामाजिक चेतना पर आधारित कविता प्रतियोगिता सहित अनेक रचनात्मक कार्यक्रमों का सफल आयोजन किया गया। इस महोत्सव की एक और अनूठी विशेषता यह रही कि आश्रम परिसर में हरियाणा के अनेक महान कवियों की प्रतिमाओं की स्थापना भी की गई, जो आने वाली पीढिय़ों को प्रेरित करती रहेंगी।
कार्यक्रम में उपस्थित क्षेत्र के गणमान्य व्यक्तियों और बुद्धिजीवियों ने भारतीय संस्कृति, लोक परंपराओं एवं नैतिक संस्कारों के संरक्षण और संवर्धन में हनुमान कौशिक के प्रयासों की खुले दिल से सराहना की। मंच के वरिष्ठ पदाधिकारी राजेश कुमार ने कहा कि ऐसे सांस्कृतिक और सामाजिक आयोजन केवल मनोरंजन का साधन नहीं हैं, बल्कि ये समाज में विलुप्त हो रहे संस्कारों को पुनर्जीवित करने और आपसी सामाजिक एकता व भाईचारे को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। हमारा मंच आगे भी इस तरह के प्रयास निरंतर जारी रखेगा।
इस ऐतिहासिक महोत्सव में क्षेत्र के अनेक गांवों से आए नागरिकों, युवाओं और संस्कृति प्रेमियों ने बढ़-चढकऱ भाग लिया। समारोह के अंतिम दिन सभी उपस्थित लोगों ने अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और हरियाणवी लोक कलाओं को आगे बढ़ाने तथा समाज में नैतिक मूल्यों को बढ़ावा देने का सामूहिक संकल्प लिया।

