बिजली-पानी के संकट पर भडक़े पार्षद विनोद प्रजापति : समाधान शिविर में ज्ञापन सौंपकर आंदोलन की दी चेतावनी
 

बार-बार डिम लाइट आने और पूरी-पूरी रात बिजली गायब रहने से आम जनता का जीना हुआ मुहाल :  पार्षद विनोद प्रजापति
 
 
दूषित पेयजल आपूर्ति

भिवानी, 02 जुलाई : शहर के वार्ड नंबर 25 में गहराते बुनियादी सुविधाओं के संकट को लेकर स्थानीय पार्षद विनोद कुमार ने प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। वीरवार को को पार्षद विनोद कुमार के नेतृत्व में समस्त वार्ड वासियों ने समाधान शिविर में दो अलग-अलग ज्ञापन सौंपकर बिजली की अघोषित कटौती, खराब ट्रांसफार्मर और दूषित पेयजल की गंभीर समस्याओं से तत्काल राहत दिलाने की मांग की है। पार्षद ने संबंधित विभागों के अधिकारियों पर घोर लापरवाही और जनता की अनदेखी करने का आरोप लगाया है। इस अवसर पर उनके साथ उर्मिला, मीना देवी, सुनीता, राम देवी, राजरानी, सुमन, निर्मल, दीपिका, सुशील सहित अन्य क्षेत्रवासी भी मौजूद रहे। 
     समाधान शिविर में सौंपे गए पहले शिकायत पत्र में पार्षद विनोद कुमार ने पतराम गेट और हालु बाजार क्षेत्र में बिजली की बदहाल व्यवस्था का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उन्होंने बताया कि इन इलाकों में बार-बार डिम लाइट आने और पूरी-पूरी रात बिजली गायब रहने से आम जनता का जीना मुहाल हो गया है। हैरान करने वाली बात यह है कि बिजली गुल होने पर जब नागरिक बिजली विभाग के कर्मचारियों को फोन करते हैं, तो वे फोन नहीं उठाते या फिर ऑनलाइन शिकायत नंबर को उठाकर अलग रख देते हैं ताकि कोई संपर्क न कर सके। परेशान होकर जब जनता सीधे बिजली घर पहुंचती है, तो वहां कोई जिम्मेदार कर्मचारी ड्यूटी पर मौजूद नहीं मिलता। क्षेत्रवासी पूरी रात अंधेरे और उमस में काटने को मजबूर हैं। पार्षद ने मांग की है कि इस समस्या का स्थाई समाधान किया जाए या फिर क्षेत्र का पुराना ट्रांसफार्मर तुरंत बदला जाए।
     इसके साथ ही जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के अधीक्षक अभियंता को प्रेषित दूसरे ज्ञापन में वार्ड की 4 गलियों में गंदे पानी की सप्लाई और नई पाइपलाइन जोडऩे की मांग उठाई गई। पार्षद विनोद कुमार ने तीखा रोष प्रकट करते हुए कहा कि वे गंदे पानी की इस विकराल समस्या को लेकर कई बार सरकार द्वारा आयोजित समाधान शिविरों में लिखित प्रार्थना कर चुके हैं। परंतु हर बार अधिकारी एक ही रटा-रटाया जवाब देते हैं कि देखते हैं, करवाते हैं या अमृत योजना-2 में काम करवाएंगे।
     पार्षद ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर कड़ा प्रहार करते हुए सवाल किया कि जब इन समाधान शिविरों में आने के बाद भी जनता की कोई समस्या हल नहीं होनी है, तो फिर ऐसे शिविर लगाने का क्या फायदा। क्या यह सिर्फ अधिकारियों को वहां बैठाकर चाय पिलाने और आधा दिन खराब करने के लिए है। उन्होंने इस पूरे ढुलमुल रवैये की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है कि आखिर धरातल पर सरकारी कर्मचारी और अधिकारी अपनी जिम्मेदारी से काम क्यों नहीं कर रहे हैं। पार्षद ने चेतावनी दी है कि यदि बिजली और गंदे पानी की इस किल्लत को जल्द से जल्द दूर नहीं किया गया, तो वार्ड वासी सडक़ों पर उतरकर उग्र आंदोलन करने को विवश होंगे।