CBI Action: पंचकूला नगर निगम के पूर्व कमिश्नर राम कुमार सिंह गिरफ्तार, IDFC बैंक अकाउंट से गबन का है मामला

CBI ने पंचकूला नगर निगम के पूर्व कमिश्नर और IAS राम कुमार सिंह को 79 करोड़ के गबन मामले में गिरफ्तार किया। जानें हरियाणा के 504 करोड़ के घोटाले की पूरी कहानी।
 
IDFC First Bank Scam

पंचकूला। सेंट्रल ब्यूरो ऑफ़ इन्वेस्टिगेशन (CBI) ने हरियाणा में सरकारी खजाने से हुई करोड़ों की धोखाधड़ी के मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए पंचकूला नगर निगम के पूर्व कमिश्नर और IAS अधिकारी राम कुमार सिंह को गिरफ्तार कर लिया है। यह मामला IDFC फर्स्ट बैंक की चंडीगढ़ सेक्टर-32 ब्रांच में नगर निगम के अकाउंट से किए गए बड़े पैमाने पर फंड के हेरफेर से जुड़ा है।

 धोखाधड़ी का मास्टर प्लान: कैसे की गई पैसों की हेराफेरी

जांच में खुलासा हुआ है कि सरकारी फंड का गबन करने के लिए वित्त विभाग के नियमों को ताक पर रखकर अकाउंट खोला गया था। IAS अधिकारी ने बैंक अधिकारियों के साथ मिलकर बिचौलियों के जरिए हस्ताक्षरित चेक दिए, जिन्हें फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) के नाम पर लिया गया था। असल में कोई भी FD नहीं बनाई गई, बल्कि चेक का उपयोग कर धन निकालकर उन शेल कंपनियों (फर्जी कंपनियों) में भेज दिया गया, जिनका संचालन आरोपी बैंक अधिकारी ही कर रहे थे।

504 करोड़ के महाघोटाले का खुलासा

यह मामला हरियाणा सरकार के 8 विभागों में हुए ₹504 करोड़ के उस बड़े घोटाले का हिस्सा है, जिसमें फर्जी FD और डेबिट नोट के माध्यम से सरकारी पैसे को निजी जेब में भरा गया। अकेले पंचकूला नगर निगम मामले में ₹79.46 करोड़ का दुरुपयोग हुआ है। इस पूरे स्कैम में अब तक CBI ने 17 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है, जिनमें बैंक अधिकारी, सरकारी कर्मचारी और प्राइवेट व्यक्ति शामिल हैं।

 जांच का दायरा और CBI की कार्रवाई

CBI ने न केवल IAS अधिकारी को गिरफ्तार किया है, बल्कि चंडीगढ़ और करनाल में उनके आवासों पर छापेमारी कर कई अहम दस्तावेज भी बरामद किए हैं। गौरतलब है कि इससे पहले CBI ने चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी (CSCL) और CREST से जुड़े मामलों में भी चार्जशीट दाखिल की है, जिनमें कई वरिष्ठ अधिकारियों की संलिप्तता सामने आई थी। एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि वे इस पूरे नेटवर्क के हर जिम्मेदार व्यक्ति को कानून के कटघरे में खड़ा करने के लिए प्रतिबद्ध है।