Human Rights Workshop at CBLU: समाज विज्ञान और विधि विभाग की पहल, कुलगुरु प्रो. दीप्ति धर्माणी ने शिक्षा के महत्व पर दिया जोर
चौधरी बंसीलाल विश्वविद्यालय (CBLU) भिवानी में मानव अधिकार विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसमें दिग्गजों ने अपने विचार रखे।
सीबीएलयू में समाज विज्ञान संकाय तथा विधि विभाग द्वारा मानव अधिकार विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन
भिवानी 29 सितंबर। चौधरी बंसीलाल विश्वविद्यालय में समाज विज्ञान संकाय तथा विधि विभाग के संयुक्त तत्वावधान तथा हरियाणा मानव अधिकार आयोग के सहयोग से मानव अधिकार विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में पंजाब मानवाधिकार आयोग से पूर्व डीजीपी डॉ. प्रबोध कुमार ने बतौर मुख्य अतिथि एवं विशिष्ट पुलिस अधीक्षक श्री मयंक मिश्रा ने शिरकत की। कार्यक्रम में कुलगुरु प्रो दीप्ति धर्माणी की अध्यक्षता में पूर्व आईएएस अधिकारी एवं पूर्व सूचना आयुक्त,प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस श्री शिवरामन गौड़, कुलसचिव प्रो भावना शर्मा,वरिष्ठ अधिवक्ता श्री जयप्रकाश कौशिक,प्रो. भारत की गरिमामय उपस्थिति रही। पूर्व डीजीपी डॉ सुबोध कुमार ने अपने अभिभाषण में अलग- अलग पीढ़ी में उभरे मुख्य मानव अधिकारों के बारे में बताया। इसके साथ-साथ उन्होंने समाज में व्याप्त बड़ी - बड़ी हिंसा तथा और रोजमर्रा जीवन में होने वाली हिंसा के बारे में वर्गीकृत करते हुए प्रमुखता से प्रकाश डाला। इसके साथ-साथ उन्होंने सिटीजन चार्टर और राज्य मानव अधिकार आयोग के कार्यों के बारे में भी प्रतिभागियों को अवगत करवाया। उन्होंने विश्वविद्यालय द्वारा कार्यशाला में आमंत्रित करने पर स्वयं को सौभाग्यशाली बताया ।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए विश्वविद्यालय की कुलगुरु प्रोफेसर दीप्ति धर्माणी ने शिक्षा के महत्व पर बात रखते हुए कहा कि शिक्षा के जरिए हम मानव अधिकारों की रक्षा कर सकते हैं और सभी वर्गों को खासकर वंचित वर्गों को उनके अधिकार दिलाने के लिए सही पैरवी कर सकते हैं । उन्होंने प्रतिभागियों द्वारा वर्कशाला में पूछे गए सवालों के लिए उन्हें सराहा। उन्होंने बताया कि सवाल पूछना तथा संवाद करना हमारा एक महत्वपूर्ण अधिकार है। हमारे सभी वेद पुराण प्रश्नों और संवाद पर आधारित हैं।
मानव अधिकारों और मानवीय मूल्यों के बीच महत्वपूर्ण संबंध बताते हुए उन्होंने कहा कि मानवीय मूल्य जैसे नैतिक शिक्षा, संस्कृति , सामाजिक न्याय, दया भावना, मान- सम्मान एवं गरिमा, विविधिता के लिए सम्मान आदि पर भी विशेष जोर दिया और कार्यशाला में उपस्थित प्रतिभागियों से इन आवश्यक मूल्यों को जीवन में अपनाने के प्रेरित किया और अपील की। कार्यक्रम में भिवानी जिला के पुलिस अधीक्षक श्री मयंक मिश्रा ने अपने वक्तव्य में कहा कि न्याय व्यवस्था में सभी की भागीदारी महत्वपूर्ण है। उन्होंने बताया कि ईंट भट्टों पर कार्य करने वाले मजदूरों कि स्थिति पर बात रखते हुए कहा कि अभी भी आर्थिक बधुआ मजदूरी व्यवस्था काम करती है जिसके उन्मूलन के लिए सभी को कार्य करना चाहिए।
दूसरे सत्र में विशेष व्याख्यान देते हुए पंजाब विश्वविद्यालय के विधि विभाग से प्रोफेसर भारत ने कहा कि 10 दिसंबर 1948 विश्व इतिहास का सबसे महत्वपूर्ण दिन है , जिस दिन यूनाइटेड नेशन्स द्वारा मानव अधिकार पर सार्वभौमिक घोषणा की गई थी। उन्होंने संस्कृत वाक्य धर्मों रक्षित रक्षत: पर कहा कि अगर हम सभी अपने धर्म को बखूबी निभाएंगे तो दूसरों के हक़ स्वत: सुरक्षित रहेंगे। प्रथम सत्र में प्रोफेसर प्रमोद मलिक ने सभी अतिथियों का आभार जताया।

अंतिम सत्र में किशोर न्याय बोर्ड रोहतक के पूर्व सदस्य एडवोकेट जय प्रकाश कौशिक ने बाल शोषण, बाल सरंक्षण तथा बाल अधिकारों पर प्रतिभागियों को विस्तृत रूप से अवगत करवाया। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय की कुलसचिव प्रो. भावना शर्मा ने सभी अतिथियों को स्वागत एवं अभिनंदन किया।
अंतिम सत्र के दूसरे वक्ता डॉ.मुरलीधर शास्त्री, राष्ट्रीय मंत्री प्रणामी आश्रम ने उनके द्वारा मानव अधिकारों के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों के बारे में अपने अनुभव सांझा किए। उन्होंने बाल आश्रम में उनके द्वारा बाल कल्याण के हितों के लिए कार्यों के बारे में भी अपने विचार सांझा किए।
इस अवसर पर पूर्व प्रशासनिक अधिकारी शिव रमण गौड़ ने भी अपने विचार सांझा किए ।
कार्यक्रम में कार्यशाला संयोजक डॉ. मनोज कुमार तेवतिया ने कार्यशाला की रूपरेखा प्रस्तुत की। टेक्निकल सत्र में डॉ. रवि प्रकाश ने मॉडरेटर की भूमिका निभाई। कार्यक्रम के अंत में समाज विज्ञान संकाय की अधिष्ठाता प्रो. सुनीता भरतवाल ने सभी अतिथियों तथा प्रतिभागियों का कार्यशाला में भाग लेने के लिए आभार जताया।
सहायक प्रोफेसर डॉ आशा पूनिया ने मंच संचालक की भूमिका निभाई।
कार्यशाला में कार्यक्रम सचिव के तौर डॉ. मधुसूदन ने विशेष सहयोग किया।