न्यायिक प्रणाली की जीवन रेखा हैं जिला न्यायालय: सीजेआई सूर्यकांत
- मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने भिवानी न्यायिक परिसर में वर्चुअल माध्यम से रखी उपमंडल लोहारू के न्यायिक परिसर के विस्तार की, उपमंडल सिवानी के लिए नए न्यायिक परिसर और उपमंडल तोशाम में न्यायिक अधिकारियों के लिए आवास की आधारशिला
भिवानी, 25 अप्रैल। भारत के सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने न्यायिक परिसर भिवानी में वर्चुअल माध्यम से उपमंडल लोहारू के न्यायिक परिसर के विस्तार की, उपमंडल सिवानी के लिए नए न्यायिक परिसर और उपमंडल तोशाम में न्यायिक अधिकारियों के लिए आवास की वर्चुअल माध्यम से आधारशिला रखी। उन्होंने जिला न्यायालयों को न्यायिक वितरण प्रणाली की जीवन रेखा बताया। इनमें बुनियादी ढांचा भी बेहतर होना जरूरी है। इस दौरान पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति श्री शील नागू भी मौजूद रहे।
न्यायिक परिसर में आयोजित भव्य शिलान्यास समारोह में अपना संदेश देते हुए न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा कि भिवानी में आकर उनको अपने घर में आने जैसा ही महसूस हो रहा है। शिलान्याय करने के साथ उनको अपने बहुत पुराने साथियों व परिचितों से भी मिलने का अवसर मिला है। समारोह के दौरान न्यायमूर्ति सूर्यकांत के साथ-साथ मंच पर उपस्थित सभी माननीय जस्टिस का पगड़ी, शॉल ओढाकर व स्मृति चिन्ह भेंटकर स्वागत किया गया। बार के प्रधान एडवोकेट संदीप तंवर ने जिला बार एसोसिएशन की तरफ से न्यायमूर्ति सूर्यकांत सहित सभी माननीय न्यायाधीशों का स्वागत किया। पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के न्यायाधीश अश्विनी मिश्रा ने मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत सहित सभी का आभार जताया।
मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति श्री सूर्यकांत ने अपने संबोधन में न्यायालयों में अस्पताल जैसा मानवीय और संवेदनशील माहौल बनाने की आवश्यकता पर बल दिया। न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने अपने संबोधन में बताया कि उन्होंने 14 नवंबर को झारखंड उच्च न्यायालय के रजत जयंती समारोह में पहली बार वहां घोषणा की थी कि अब समय आ गया है कि न्यायपालिका अस्पताल की तरह एक कल्पनाशील चेहरा अपनाएं। केवल चौबीसों घंटे काम ही नहीं करना बल्कि कोर्ट रूम के अंदर ऐसा माहौल बनाना है कि जब कोई व्यक्ति आए तो उसे लगे कि वह सुरक्षित है। जैसे अस्पताल में प्राथमिक स्वास्थ्य कर्मी देखभाल करता है, तापमान लिया जाता है, ब्लड प्रेशर चेक होता है, आश्वासन दिया जाता है, बैठने की जगह दी जाती है वही दृष्टिकोण होना चाहिए। न्याय के लिए आए व्यक्ति को सुरक्षित महसूस होना चाहिए कि अब मुझे वह न्याय मिलेगा, जिसके लिए वह आया है। सीजेआई ने भिवानी आगमन को गर्व का पल बताते हुए कहा कि यहां बहुत सारे बुजुर्ग, जाने-माने पहचाने चेहरे हैं जिनसे सालों बाद मिलने का अवसर प्राप्त हुआ है।
न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने आश्वस्त किया कि न्यायालय जिला स्तर का हो, उप-मंडल न्यायालय स्तर या उच्च न्यायालय स्तर का यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध हूं कि न्याय वितरण प्रणाली के हर हितधारक को सभी सुविधाएं उपलब्ध हों। उन्होंने सुलभ, उत्तरदायी और जनता-केंद्रित न्याय वितरण प्रणाली सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाने का विश्वास दिलाया। न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने बार एसोसिएशन के अध्यक्ष संदीप तंवर द्वारा रखी गई मांगों पर भिवानी के साथ एक विशेष नाता व हक जताते हुए कहा कि आज आप लोगों का बिना फीस का वकील हूं और आपकी पूरी वकालत करके जाऊंगा। सीजेआई ने कहा कि कुछ मांगें उच्च न्यायालय स्तर की हैं। उन्होंने बार प्रधान की मांग का समर्थन करते हुए कहा कि अधिवक्ताओं के लिए चैंबर व समुचित पार्किंग की व्यवस्था होना जरूरी है, इसके लिए उच्च न्यायालय को प्रदेश सरकार के साथ तालमेल कर इस सिरे चढाएं। उन्होंने बार अधिवक्ताओं को किसी भी दिन अपनी सहमति के साथ सर्वोच्च न्यायालय की प्रक्रिया देखने को आमंत्रित किया। उन्होने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय का अत्याधुनिक सुविधाओं से सुसजिज्जत नया परिसर तैयार हो रहा है, जिसकी समय के अनुसार सख्त जरूरत थी।
अपने संबोधन में पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति श्री शील नागू ने देश के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत का स्वागत करते हुए भिवानी जिले में लोहारू, सिवानी व तोशाम में तीन महत्वपूर्ण न्यायिक परियोजनाओं के शिलान्यास के लिए आभार जताया। उन्होंने कहा कि समारोह में माननीय मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति श्री सूर्यकांत की गरिमामयी उपस्थिति ने समारोह को राष्ट्रीय स्तर का बना दिया है। उन्होंने कहा कि न्यायालय केवल ईंट-पत्थर की इमारतें नहीं हैं, ये ऐसे स्थल हैं जहां अधिकारों की रक्षा, स्वतंत्रता का बचाव, विवादों का समाधान और कानून का शासन कायम रहता है। उन्होंने कहा कि जब न्यायिक आधारभूत ढांचे का विस्तार होता है तो न्याय सुलभ होता है।
उन्होंने कहा कि देश के माननीय मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत के कार्यकाल को न्यायालयों के आधुनिकीकरण, तकनीकी एकीकरण, प्रणालीगत देरी को कम करने और सर्वोपरि मानवीय दृष्टिकोण के लिए जाना जाता है। इनके नेतृत्व में सीधा सन्देश है कि न्याय केवल होना ही नहीं चाहिए बल्कि वह सुलभ, कुशल, मानवीय और उत्तरदायी भी होना चाहिए। न्यायमूर्ति श्री नागू ने कहा कि भिवानी में माननीय सीजीआई की उपस्थिति से बड़ा सन्देश मिलता है कि कोई भी जिला दूर नहीं, कोई भी वादी दूर नहीं और कोई भी नागरिक न्याय की पहुंच से बाहर नहीं है।
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शिलान्याय समारोह के दौरान न्यायमूर्ति सूर्यकांत का बार के अधिवक्ताओं ने बुक्के भेंटकर व ढोल-नगाड़ों तथा बीन की स्वर लहरियों से जोरदार स्वागत किया गया। शिलान्यास की शौभा देखते ही बन रही थी। कार्यक्रम के दौरान पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के न्यायाधीश दीपक सिब्बल, जस्टिस हरसिमरन सिंह सेठी, जस्टिस कुलदीप तिवारी, जस्टिस शालिनी सिंह नागपाल, दादरी जिला सेशन जज जस्टिस गगनदीप कौर सिंह, के अलावा सहित पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के अनेक न्यायाधीशों के अलावा डीसी साहिल गुप्ता, एसपी सुमित कुमार, एसडीएम महेश कुमार, नगराधीश अनिल कुमार, पूर्व विधायक डॉ. शिव शंकर भारद्वाज सहित विभिन्न प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे। शिलान्यास समारोह का संचालन चंडीगढ से एडीजे अमरिंद्र शर्मा ने किया।
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-हवाई पट्टïी पर पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश ने किया किया न्यायमूर्ति सूर्यकांत का स्वागत
मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति के हवाई पट्टïी पर पहुंचने पर पंजाब एंड हरियाणा के मुख्य न्यायाधीश शील नागू, जस्टिस अश्विनी मिश्रा, जस्टिस दीपक सिब्बल, जस्टिस हरसिमरन सिंह सेठी, जस्टिस कुलदीप तिवारी, जस्टिस शालिनी नागपाल, दादरी जिला सेशन जज जस्टिस गगनदीप कौर सिंह, डीसी साहिल गुप्ता, पुलिस अधीक्षक सुमित कुमार, सीजेएम मीता कोहली, एसडीएम महेश कुमार, नगराधीश अनिल कुमार, बार प्रधान संदीप तंवर व सचिव विनोद कुमार ने बुक्के भेंट कर स्वागत किया।

