धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद CJP अड़ी, FIR वापसी और ₹1 करोड़ मुआवजे की मांग पर अड़ा संगठन

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद CJP ने आंदोलनकारियों पर दर्ज सभी FIR रद्द करने और आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को ₹1-1 करोड़ मुआवजे की मांग की है।

 
छात्र आंदोलन समाचार

कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद अपनी दूसरी मांगों को लेकर आक्रामक है और सरकार को बार-बार फिर से आंदोलन की चेतावनी दी रही है। प्रधान के इस्तीफे के बाद सीजेपी का सबसे अधिक जोर 'एफआईआर वापसी' वाली मांग पर है। उनकी मांग है कि दिल्ली समेत एनडीए शासित जिन भी राज्यों में आंदोलनकारियों के खिलाफ मुकदमे दर्ज किए गए हैं, उन्हें वापस लिए जाएं। सीजेपी अपनी मांग पर इस कदर डटी हुई है कि उसने सुप्रीम कोर्ट की शर्तों को भी मानने से इनकार कर दिया है और खुलकर यह भी कह रही है कि आंदोलन में शामिल किसी 'अपराधी' पर भी मुकदमा चलना मंजूर नहीं है।

क्या है सीजेपी की दो मांगें

धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा होने के बाद सीजेपी की दो और मांगें हैं, जिनके लिए वह सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश कर रही है। पहली मांग यह है कि आंदोलनकारियों के खिलाफ किसी तरह की कोई कानूनी कार्रवाई ना की जाए, जो भी एफआईआर दिल्ली या देश के अन्य हिस्सों में दर्ज किए गए हैं उन्हें वापस लिया जाए। एक और मांग यह है कि नीट पेपर लीक की वजह से खुदकुशी करने वाले 20 से अधिक स्टूडेंट्स के परिवारों को सरकार एक-एक करोड़ रुपये मुआवजा दे।

केस वापसी पर कोई शर्त मंजूर नहीं, सुप्रीम कोर्ट की भी नहीं सुनेंगे: CJP

सीजेपी ने कहा है कि आंदोलनकारियों को कानूनी कार्रवाई से बचाने में उन्हें किसी तरह की शर्त मंजूर नहीं है, भले ही यह सुप्रीम कोर्ट लगाए। सीजेपी के मुख्य प्रवक्ता सौरभ दास ने मंगलवार को पहले न्यूज एजेंसी एएनआई से बातचीत करते हुए और फिर रात को सोशल मीडिया पर एक पोस्ट लिखकर साफ कर दिया कि उन्हें सरकार से पुलिस के लिए ठीक वैसा ही आदेश चाहिए जिसकी मांग वह कर रहे हैं। दास का कहना है कि ना तो सरकार को 'शांतिपूर्ण' वाली शर्त ना जोड़े। उन्हें सुप्रीम कोर्ट का यह कहना भी मंजूर नहीं है कि दर्ज हो चुके एफआईआर की जांच जारी रखी जाए और आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों पर ऐक्शन लिया जाए। देश की सबसे बड़ी अदालत ने उन लोगों को रिहा करने का आदेश दिया है जिनकी उम्र 18 साल से कम है और जिनके खिलाफ पहले से कोई एफआईआर दर्ज नहीं है।

क्यों आपराधियों के खिलाफ भी एफआईआर नहीं चाहती CJP

सौरभ दास ने कहा है कि यह कहकर भी सरकार एफआईआर को जारी नहीं रख सकती है कि आपाराधिक पृष्ठभूमि वाले लोग भी शामिल थे। उन्होंने सभी एफआईआर को वापस लेने की मांग करते हुए कहा, 'यदि क्रिमिनल (आंदोलन में) घूम रहे थे तो उनके पुराने मामलों में उनकी जमानत रद्द की जाए। यह भी जवाब देना चाहिए कि वे समाज में इतनी आजादी से कैसे घूम रहे थे। लेकिन सरकार इस बहाने से एफआईआर जारी नहीं रख सकती है, ताकि वह इसे सही आंदोलनकारियों को भी टारगेट कर सके। यदि सरकार को यह छूट दे दी गई तो निश्चित तौर पर वह इसका इस्तेमाल करेगी। युवा इसे किसी कीमत पर स्वीकार नहीं करेंगे। हम सभी प्रदर्शनकारी के साथ खड़े रहेंगे जो एक दूसरे के भविष्य के लिए खड़े हुए।'