सुनील रंगा की संदिग्ध मौत मामले में माकपा व परिवार ने की निष्पक्ष जांच की मांग

 
सुनील रंगा की संदिग्ध मौत मामले में माकपा व परिवार ने की निष्पक्ष जांच की मांग

भिवानी :

बीते 31 अगस्त को स्थानीय घंटाघर के पास संदिग्ध परिस्थितियों में एक शव मिला, जिसकी पहचान आयुष विभाग में फार्मासिस्ट सुनील रंगा (41) के रूप में हुई थी।

परिवार ने उनकी मौत को लेकर हत्या की आशंका जताई है और दोषियों को पकडऩे के लिए शहर थाने में निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए एक अर्जी दी है। बता दे कि सुनील रंगा हसान गांव के आयुष विभाग में कार्यरत थे, 30 अगस्त को ड्यूटी के बाद घर लौट आए थे। उनके बड़े भाई विनोद कुमार रंगा ने बताया कि उसी दिन शाम करीब 8 बजे सुनील अपनी स्कूटी पर किसी से मिलने गए थे।

इसके बाद से उनका मोबाइल बंद था और परिवार उनसे संपर्क नहीं कर पाया। अगली सुबह शहर पुलिस ने घंटाघर से उनका शव बरामद किया, जिसे लावारिस मानकर सिविल अस्पताल में पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया था। इस घटना के बाद जन संघर्ष समिति भिवानी के संयोजक और माकपा नेता कॉमरेड ओम प्रकाश और सुखदेव पालवास ने अस्पताल पहुंचकर शव का मुआयना किया और पुलिस प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की।

उन्होंने दोषियों को जल्द से जल्द गिरफ्तार कर पीडि़त परिवार को न्याय दिलाने की भी मांग की। विनोद कुमार रंगा ने भी शहर थाने में आवेदन देकर निष्पक्ष जांच और दोषियों की गिरफ्तारी की मांग की है। सुनील रंगा डीपीआरओ सुरेंद्र कुमार के बुआ के बेटे थे।

मंगलवार को उनका अंतिम संस्कार हनुमान गेट स्थित बैकुंठ धाम में किया गया, जिसमें शहर के कई गणमान्य नागरिक शामिल हुए। सुनील अपने पीछे अपनी मां रामरती देवी, पत्नी अंजू और 17 वर्षीय बेटी तमन्ना को छोड़ गए हैं। इस दुखद घटना से पूरा परिवार गहरे शोक में है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और सुनील के हत्यारों की तलाश कर रही है।