बाल श्रम पर कड़ा प्रहार,2 मासूमों को किया रेस्क्यू 

 
बाल श्रम पर कड़ा प्रहार,2 मासूमों को किया रेस्क्यू 

भिवानी:

मासूम कंधों से मजदूरी का बोझ हटाकर उन्हें कलम थमाने के संकल्प के साथ, भिवानी जिला बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) और पुलिस की संयुक्त टीम ने बाल श्रम के खिलाफ एक निर्णायक कार्रवाई की है।

जुई क्षेत्र में चलाए गए इस विशेष अभियान के दौरान टीम ने दो मासूम बच्चों को रेस्क्यू कर उनके बचपन को शोषण की बेडिय़ों से आजाद कराया। यह जानकारी देते हुए सीडब्ल्यूसी के सदस्य अधिवक्ता धीरज सैनी ने बताया कि यह केवल दो बच्चों का रेस्क्यू नहीं है, बल्कि समाज के उस काले पक्ष पर एक कड़ा प्रहार है जहां गरीबी और मजबूरी का फायदा उठाकर बच्चों का भविष्य अंधकार में झोंका जा रहा था। उन्होंने बताया कि यह सफलता टीम वर्क का परिणाम है।

इस रेस्क्यू ऑपरेशन में पुलिस बल का पूरा सहयोग मिला, जिसमें इंस्पेक्टर अमरदीप सिंह, सब-इंस्पेक्टर कपिल देव, लेडी सब-इंस्पेक्टर नीलम देवी, लेडी सब-इंस्पेक्टर अमिता देवी और एसपीओ राकेश कुमार ने सक्रिय भूमिका निभाई। अधिवक्ता सैनी ने स्पष्ट किया कि टीम की नजरें जिले के उन तमाम संवेदनशील इलाकों पर हैं जहाँ बाल श्रम की संभावना सबसे अधिक होती है।

इसमें मुख्य रूप से बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, धार्मिक स्थल और उनके आसपास के क्षेत्र, सडक़ किनारे स्थित ढाबे और  विभिन्न सार्वजनिक स्थानों पर अभियान चलाया जा रहा है। सफल रेस्क्यू के उपरांत बाल कल्याण समिति, भिवानी के चेयरमैन अधिवक्ता प्रदीप सिंह तंवर ने बच्चों के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि सीडब्ल्यूसी का एकमात्र और अंतिम लक्ष्य हर बच्चे के लिए एक सुरक्षित, शिक्षित और उज्ज्वल भविष्य सुनिश्चित करना है। उन्होंने बताया कि जब एक बच्चा अपने परिवार से दोबारा मिलता है, तो वह केवल एक कागजी कार्रवाई नहीं होती, बल्कि एक जीवन की नई और सुरक्षित शुरुआत होती है। हमारा प्रयास है कि जिले में कोई भी बच्चा शोषण का शिकार न हो।

प्रशासनिक सख्ती के साथ-साथ चेयरमैन अधिवक्ता प्रदीप सिंह तंवर ने आम जनता की भागीदारी पर भी जोर दिया है। उन्होंने समाज के हर नागरिक से अपील की है कि वे बाल श्रम को रोकने में आंख और कान बनें। यदि आपको कहीं भी कोई बच्चा संदिग्ध अवस्था में दिखे या उससे मजदूरी कराई जा रही हो, तो तुरंत स्थानीय पुलिस या चाइल्डलाइन को सूचित करें। उन्होंने स्पष्ट किया है कि सूचना देने वाले व्यक्ति की पहचान पूरी तरह गुप्त रखी जाएगी। इस अभियान के दौरान सीडब्ल्यूसी के अन्य सदस्य सतेंद्र तंवर, नीलम रानी, दिनेश अत्री, एडवोकेट धीरज सैनी व जिला बाल संरक्षण अधिकारी नरेंद्र कुमार सुथार भी मौजूद रहे।