Dabar Dham Ashram Purnahuti: डाबर धाम आश्रम में अखंड रुद्राभिषेक और महामृत्युंजय हवन-यज्ञ का भव्य समापन, उमड़े श्रद्धालु
डाबर धाम आश्रम में संत-महात्माओं की मौजूदगी में हुआ भव्य धार्मिक आयोजन का समापन।
डाबर धाम श्री बाबा मेहूंनाथ आश्रम में चल रहे एक माह से चल रहे अखंड रुद्राभिषेक एवं महामृत्युंजय हवन-यज्ञ का विधि-विधान के साथ शनिवार काे पूर्णाहुति के साथ समापन किया गया। धार्मिक आयोजन के अंतिम दिन आश्रम परिसर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। संत-महात्माओं की उपस्थिति में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हवन-यज्ञ की पूर्णाहुति कर क्षेत्र की सुख-समृद्धि और शांति की कामना की गई।

इस दौरान आश्रम परिसर में सिद्ध शिरोमणि बाबा मस्त नाथ, सिद्धयोगी गोपीचंद, भृतहरि नाथ तथा सिद्ध बाबा रणपत मान धाता की मूर्तियों का विधिवत अनावरण किया गया। मूर्ति अनावरण के समय श्रद्धालुओं ने जयकारे लगाए और संत-महात्माओं का आशीर्वाद प्राप्त किया। मूर्तियों की स्थापना को धार्मिक एवं आध्यात्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण बताते हुए उपस्थित संतों ने कहा कि इन महापुरुषों का जीवन समाज को साधना, त्याग, सेवा और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। इस अवसर पर रमताे के महंत कृष्ण नाथ, रमताे के महंत समुंद्र नाथ, पंच ढाणा जाेगी महंत केशव नाथ महाराज, पीर जताई नाथ काैथ, महंत श्याम नाथ हालुवास, महंत वेदनाथ महाराज, समुंद्र नाथ, याेगेंद्र नाथ, पुजारी लक्ष्मण नाथ अस्थल बाेहर, रामनाथ, कपिल नाथ, प्रदीप नाथ, गाेपाल नाथ, जति नाथ सहित अनेक संत-महात्मा व श्रद्धालुगण माैजूद रहे।

भंडारे में उमड़े श्रद्धालु
हवन-यज्ञ की पूर्णाहुति के पश्चात आश्रम परिसर में विशाल भंडारे का आयोजन किया गया। इसमें सर्वप्रथम संत-महात्माओं ने प्रसाद ग्रहण किया जिन्हें चद्दर व चिपी देकर मान-सम्मान किया। विभिन्न स्थानाें से पहुंचें संत, महात्माअाें के अलावा सैकड़ों श्रद्धालुओं ने पंगत में बैठकर प्रसाद ग्रहण किया। श्रद्धालुओं ने धार्मिक आयोजन में भाग लेकर पुण्य लाभ कमाया। पूरे आयोजन के दौरान आश्रम परिसर भक्तिमय वातावरण से सराबोर रहा। कार्यक्रम के दाैरान महंत वेदनाथ महाराज के शिष्य कपिल नाथ ने कहा कि भविष्य में भी आश्रम में धार्मिक एवं सामाजिक गतिविधियों का आयोजन निरंतर किया जाता रहेगा। वहीं अलग अलग स्थानों से पहुंचे मंचीय व बीन कलाकारों ने इस उत्सव में आध्यात्मिक कला का जोश भर दिया। इस अवसर पर अलग अलग झांकियां भी श्रद्धालुओं को भाव विभोर करती रही।