डिग्री केवल एक प्रमाण पत्र नहीं, बल्कि आपके ज्ञान, मेहनत और अनुशासन का प्रतीक: प्रो. दीप्ति धर्माणी
भिवानी।
डिग्री केवल एक प्रमाण पत्र नहीं, बल्कि आपके ज्ञान, मेहनत और अनुशासन का प्रतीक है। ये उद्गार आज आदर्श महिला महाविद्यालय के 20वें दीक्षांत एवं वार्षिक पुरस्कार वितरण समारोह में चै. बंसीलाल विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. दीप्ति धर्माणी ने स्नातक एवं स्नातकोत्तर की छात्राओं को उपाधियां प्रदान करते हुए कही।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथियों के रूप में प्रो. दीप्ति धर्माणी के साथ दो अन्य विश्वविद्यालयों के कुलपति शामिल हुए, जिनमें श्री विश्वकर्मा कौशल विश्वविद्यालय, पलवल से प्रो. दिनेश कुमार, तथा भगत फूल सिंह महिला विश्वविद्यालय, सोनीपत से प्रो. सुदेश छिकारा विशेष रूप से उपस्थित रहे। प्रबंधकारिणी समिति के अध्यक्ष डाॅ. अजय गुप्ता की अध्यक्षता में आयोजित इस कार्यक्रम में वैश्य महाविद्यालय ट्रस्ट के अध्यक्ष शिवरत्न गुप्ता विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहें। समारोह का शुभारंभ दीप प्रज्वलन, महाविद्यालय गीत और सरस्वती वंदना के साथ हुआ।
महाविद्यालय प्रबंधन समिति के महासचिव अशोक बुवानीवाला ने समारोह में पहुंचे सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि महाविद्यालय अपने लक्ष्य के अनुरूप बेटियों के भविष्य को संवारने के लिए हमेशा अग्रणी रहेगा। इसके पश्चात महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. अलका मित्तल ने वार्षिक प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए संस्थान की शैक्षणिक, सांस्कृतिक और खेल गतिविधियों की उपलब्धियों का विस्तार से उल्लेख किया।
इसके उपरांत मुख्यातिथि प्रो. दीप्ति धर्माणी ने अपना संबोधन जारी रखते हुए कहा कि आज का दिन छात्राओं के जीवन में एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। मुझें खुशी है आदर्श महिला महाविद्यालय की बेटियां हर क्षेत्र में न सिर्फ अपने महाविद्यालय का बल्कि हमारे विश्वविद्यालय का भी देश व प्रदेश में नाम रोशन कर रही है।
प्रो. दिनेश कुमार ने अपने संबोधन में कहा कि आज के प्रतिस्पर्धी दौर में केवल पढ़ाई ही नहीं, बल्कि कौशल विकास भी उतना ही आवश्यक है। आज इस महाविद्यालय में उन्हें ये देखकर गर्व हुआ कि यहां की छात्राएं न केवल तकनीकी बल्कि व्यावसायिक कौशल में भी निपुण है जिसके लिए वो महाविद्यालय को बधाई देते हैं। उन्होंने छात्राओं को संदेश देते हुए कहा कि आपको अपने सपनों को सीमित नहीं करना चाहिए, बल्कि बड़े लक्ष्य निर्धारित कर उन्हें हासिल करने का प्रयास करना चाहिए।
प्रो. सुदेश छिकारा ने छात्राओं को आत्मनिर्भर बनने का संदेश देते हुए कहा कि महिलाएं आज हर क्षेत्र में अपनी पहचान बना रही हैं। शिक्षा वह शक्ति है जो आपको न केवल सशक्त बनाती है, बल्कि समाज में परिवर्तन लाने की क्षमता भी देती है। दीक्षांत समारोह एक नई शुरुआत है, जहां से आपको अपने ज्ञान का उपयोग समाज और राष्ट्र के निर्माण में करना है।
विशिष्ट अतिथि अधिवक्ता शिवरत्न गुप्ता ने अपने संबोधन में कहा कि संस्कार, शिक्षा और आत्मविश्वास ये तीनों तत्व सफलता की कुंजी हैं। महाविद्यालय की बेटियां आज हर क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभा रही हैं और आने वाला समय उनका है। कार्यक्रम अध्यक्ष अजय गुप्ता ने कहा कि संस्थान लगातार बेटियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देकर उन्हें सशक्त बनाने का कार्य कर रहा है।
हम बेटियों को शिक्षित और सशक्त करने के अभियान में पूरी तरह से लगे हुए है। इस मौके पर प्रबंधकारिणी के कोषाध्यक्ष सुदंर लाल अग्रवाल, संयुक्त सचिव पवन केडिया, पवन बुवानीवाला, प्रीतम अग्रवाल, नंदकिशोर अग्रवाल, प्राचार्या डाॅ. संजय गोयल, रामदेव तायल, मीनू अग्रवाल, सुरेश देवरालिया, डाॅ. करण पुनीया, प्रो. सतीश आर्या, प्रो. एसके शर्मा इत्यादि उपस्थित रहें।
दीक्षांत समारोह में भिन्न-भिन्न संकायों की 234 छात्राओं को स्नातक व स्नातकोत्तर की उपाधियां प्रदान की गई। इसके पश्चात मेधावी छात्राओं को स्वर्ण, रजत एवं कांस्य पदक देकर सम्मानित किया गया। जिनमें एमएससी गणित की छात्राओं तन्नु और कोमल मखीरा को गोल्ड मैडल दिया गया। इस मौके पर कला संकाय से पलक, विज्ञान से दीक्षा, काॅमर्स से रितु व बीसीए से मुस्कान को बैस्ट स्टूडेंट अवार्ड दिया गया।
बैस्ट टीचर अवार्ड सहायक प्रोफेसर डाॅ. दीपू सैणी को प्रदान किया गया तथा बैस्ट नाॅन टीचिंग अवार्ड से विशाल मिश्रा व सतबीर को नवाजा गया। इस दौरान सांस्कृतिक कार्यक्रमों की आकर्षक प्रस्तुतियों ने समारोह को और भी रंगमय बना दिया, जिसमें छात्राओं ने नृत्य एवं गीत प्रस्तुतियों के माध्यम से अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया।

