Akshaya Tritiya 2026: क्या अक्षय तृतीया पर सोना खरीदना फायदेमंद है? जानें एक्सपर्ट राय
अक्षय तृतीया पर सोने में निवेश की पूरी गाइड। पिछले 12 सालों का रिटर्न, मौजूदा कीमतें और ₹1.5 लाख के भाव पर खरीदारी की सही स्ट्रैटेजी। जानें क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स।
भारत में सोना खरीदना सिर्फ एक फाइनेंशियल डिसीजन नहीं है, बल्कि एक इमोशनल और ट्रेडिशनल फैसला भी माना जाता है. साल के कुछ खास त्योहारों पर सोना खरीदने की परंपरा होती है, क्योंकि इसे वेल्थ, गुड लक और लॉन्ग टर्म सेविंग्स का सिंबल माना जाता है. अक्षय तृतीया ऐसा ही एक इंपॉर्टेंट फेस्टिवल है, जो साल की शुरुआत में आता है.
सोने की कीमतों में हाल के समय में तेज बढ़ोतरी देखने को मिली है. इंडियन स्पॉट मार्केट में गोल्ड प्राइस में अप्रैल 2025 से पिछले अक्षय तृतीया के बाद लगभग 60% की बढ़त हुई है. यह लगातार 9वां साल है जब सोने ने इन्वेस्टर्स को अच्छा रिटर्न दिया है.
पिछले 12 सालों में अक्षय तृतीया पर सोने का प्रदर्शन
पिछले 12 सालों में अक्षय तृतीया के आसपास सोने के रिटर्न में उतार-चढ़ाव रहा है, लेकिन ओवरऑल ट्रेंड पॉजिटिव रहा है. कुछ सालों में गिरावट भी रही जैसे 2017 में -11% और 2019 में -3% रही. वहीं, 2020 में 47% की तेज बढ़त देखने को मिली थी. इसके बाद 2023 से 2026 तक लगातार ग्रोथ दिखी, जैसे 7%, 18%, 22% और 31% तक का रिटर्न रहा. कुल मिलाकर सोने ने इस पीरियड में स्ट्रॉन्ग परफॉर्मेंस दिया है और सेफ इन्वेस्टमेंट की इमेज और मजबूत की है.
मौजूदा कीमत और मार्केट ट्रेंड
इस साल जनवरी में सोना 1,80,000 रुपये से ऊपर के रिकॉर्ड लेवल पर पहुंचा था. इसके बाद इसमें गिरावट आई और अब कीमतें करीब 1,50,000 रुपये के आसपास चल रही हैं. यानी हाल के हाई से करीब 16% लगभग 30,000 रुपये की गिरावट आई है. यह गिरावट मेनली प्रॉफिट बुकिंग और क्रूड ऑयल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और इंफ्लेशन की चिंता के कारण आई है. अक्षय तृतीया भारत में सोने की खरीद का दूसरा सबसे बड़ा मौका माना जाता है, इसलिए इस समय डिमांड बढ़ जाती है.
अक्षय तृतीया से पहले डिमांड का ट्रेंड
एक्सपर्ट्स के अनुसार इस साल जियोपॉलिटिकल टेंशन की वजह से डिमांड स्टेबल है, लेकिन हाई प्राइस के कारण रिटेल बायर्स ज्यादा एग्रेसिव खरीदारी नहीं कर रहे हैं. कुछ बुलियन डीलर्स का कहना है कि इस बार ज्वैलर्स की बाइंग भी लिमिटेड रही है. आमतौर पर फेस्टिवल से पहले अच्छी खरीदारी होती है, लेकिन इस बार मार्केट थोड़ा स्लो दिख रहा है. ग्लोबल लेवल पर चीन जैसे देशों में भी डिमांड थोड़ी कमजोर है. हालांकि सेंट्रल बैंक्स लगातार सोना खरीद रहे हैं, जिससे लॉन्ग टर्म कॉन्फिडेंस बना हुआ है.
क्या अभी सोना खरीदना सही है?
INVasset PMS के एक्सपर्ट का मानना है कि पिछले कुछ सालों की स्ट्रॉन्ग रैली के बावजूद सोने में आगे भी अपसाइड पोटेंशियल हो सकता है, लेकिन ग्रोथ की स्पीड थोड़ी स्लो हो सकती है. सेंट्रल बैंक्स की बाइंग और ग्लोबल अनसर्टेनिटी की वजह से सोना अभी भी पोर्टफोलियो के लिए एक अच्छा एसेट माना जा रहा है. एक्सपर्ट के मुताबिक, सोने को सिर्फ शॉर्ट टर्म प्रॉफिट के लिए नहीं, बल्कि पोर्टफोलियो स्टेबिलिटी के लिए देखना चाहिए.
एकमुश्त निवेश से बचें
एक्सपर्ट्स सलाह देते हैं कि सोने में एक साथ बड़ा इन्वेस्टमेंट करने के बजाय धीरे-धीरे यानी फेज्ड मैनर में खरीदारी करनी चाहिए. जिन लोगों के पास पहले से सोना नहीं है, उनके लिए थोड़ा-थोड़ा इन्वेस्टमेंट करना सही हो सकता है. लेकिन सिर्फ शॉर्ट टर्म में बड़ा रिटर्न सोचकर हैवी बाइंग करना अभी सही स्ट्रैटेजी नहीं मानी जा रही है.
टेक्निकल लेवल्स
अगर सोने में आगे तेजी जारी रहती है तो कीमतें पहले 1,55,000 रुपये तक, फिर 1,70,000 रुपये तक जा सकती हैं. आगे चलकर 1,81,000 रुपये का लेवल भी दोबारा टेस्ट हो सकता है. वहीं डाउनसाइड में 1,36,200 रुपये स्ट्रॉन्ग सपोर्ट लेवल है और 1,27,500 रुपये के आसपास और मजबूत बेस माना जा रहा है.

