गोल्ड-सिल्वर क्रैश: एक हफ्ते में ₹13,600 टूटा सोना, चांदी 12% गिरी; जानें क्या अब खरीदारी का सही समय है?

सोने-चांदी की कीमतों में भारी गिरावट! MCX पर सोना 8.6% और चांदी 12.6% तक टूटी। जानें गिरावट की मुख्य वजहें, एक्सपर्ट्स की राय और भविष्य के टारगेट लेवल्स।

 
Gold Price Prediction India

इस हफ्ते सोना और चांदी की कीमतों में जोरदार गिरावट दर्ज की गई, जिससे निवेशकों के बीच हलचल मच गई. मजबूत अमेरिकी डॉलर और सख्त मौद्रिक नीति के संकेतों ने कीमती धातुओं पर दबाव बनाया. आमतौर पर वैश्विक तनाव के समय सोने-चांदी में सुरक्षित निवेश की मांग बढ़ती है, लेकिन इस बार यह ट्रेंड कमजोर पड़ता दिखा.

मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोना सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन मामूली बढ़त के साथ 1,44,825 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ. हालांकि पूरे हफ्ते में यह करीब 13,641 रुपये टूट गया, जो लगभग 8.6% की गिरावट है. चांदी में भी भारी गिरावट देखने को मिली. आखिरी सत्र में इसमें करीब 2% की तेजी आई, लेकिन साप्ताहिक आधार पर चांदी 32,663 रुपये तक गिर गई. इस तरह चांदी में करीब 12.6% की गिरावट दर्ज हुई.

गिरावट की बड़ी वजह क्या रही?

विशेषज्ञों के मुताबिक, इस गिरावट के पीछे सबसे बड़ी वजह अमेरिकी डॉलर की मजबूती और फेडरल रिजर्व का सख्त रुख है. इसके अलावा निवेशकों द्वारा मुनाफावसूली (प्रॉफिट बुकिंग) ने भी कीमतों को नीचे खींचा. हालांकि मिडिल ईस्ट में जारी भू-राजनीतिक तनाव, बढ़ते कच्चे तेल के दाम और कमजोर शेयर बाजार जैसे फैक्टर आमतौर पर सोने-चांदी को सपोर्ट करते हैं, लेकिन इस बार इनका असर सीमित रहा.

आगे किन स्तरों पर रहेगी नजर?

मार्केट एक्सपर्ट्स के अनुसार, सोने के लिए 1.42 लाख रुपये का स्तर बेहद अहम है. अगर सोना इस स्तर के ऊपर टिकता है, तो इसमें फिर से तेजी आ सकती है और कीमतें 1.50 लाख से 1.52 लाख रुपये तक जा सकती हैं. वहीं अगर यह स्तर टूटता है, तो सोना 1.35 लाख से 1.40 लाख रुपये के दायरे में जा सकता है.

चांदी के लिए 2.15 लाख से 2.20 लाख रुपये का जोन महत्वपूर्ण माना जा रहा है. इस स्तर के नीचे जाने पर चांदी 2 लाख या 1.80 लाख रुपये तक गिर सकती है. वहीं ऊपर टिकने पर 2.40 लाख से 2.50 लाख रुपये तक उछाल संभव है.

लंबी अवधि में बनी हुई है मजबूती

हालांकि, मौजूदा गिरावट के बावजूद लंबी अवधि में सोना-चांदी की मांग मजबूत बनी हुई है. भारत में हर साल सोने की मांग 700 से 800 टन के बीच रहती है, जो इसके मजबूत उपभोग को दर्शाता है. कीमतों में हालिया गिरावट के बाद बाजार में खरीदारों की वापसी भी देखने को मिल रही है, खासकर शादी-ब्याह के सीजन को देखते हुए.

क्या करें निवेशक?

विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है, इसलिए निवेशकों को सतर्क रहने की जरूरत है. बाय ऑन डिप्स यानी गिरावट पर खरीदारी की रणनीति फायदेमंद हो सकती है. कुल मिलाकर, शॉर्ट टर्म में दबाव के संकेत हैं, लेकिन लॉन्ग टर्म में सोना-चांदी अब भी मजबूत निवेश विकल्प बने हुए हैं.