UPSC Success Story: हरियाणा के लालों का कमाल; जींद के विकास कुंडू ने छठी बार में हासिल की 27वीं रैंक, रेवाड़ी के मंजीत भी बने अफसर
UPSC परीक्षा परिणाम में हरियाणा का दबदबा! जींद के IPS विकास कुंडू ने 27वीं रैंक हासिल कर IAS बनने का सपना पूरा किया। वहीं, नरवाना की स्वाति आर्य ने 366वीं और रेवाड़ी के मंजीत सिंह ने पहले ही प्रयास में 490वीं रैंक प्राप्त कर प्रदेश का नाम रोशन किया है।
रेवाड़ी: जींद के पिल्लूखेड़ा निवासी विकास कुंडू ने यूपीएससी में 27वां रैंक हासिल किया है. आईपीएस विकास कुंडू फिलहाल हैदराबाद में ट्रेनिंग ले रहे हैं. पिछले साल विकास कुंडू ने यूपीएससी में 288वां रैंक प्राप्त किया था. इस बार फिर से विकास कुंडू ने यूपीएससी परीक्षा में ऑल इंडिया में 27वां रैंक हासिल करके साबित कर दिया है कि कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती. विकास कुंडू के पिता कर्ण सिंह किसान हैं. जबकि उनकी माता निर्मला साधारण गृहणी हैं.
जींद के विकास कुंडू का 27वां रैंक: विकास कुंडू का बड़ा भाई नरवीर ठेकेदार है. विकास की चाची सुलोचना कुंडू ने बताया कि पिछले साल भी विकास कुंडू ने यूपीएससी में 288 वां रैंक हासिल किया था और हैदराबाद में आईपीएस में उसका सिलेक्शन हुआ था. हैदराबाद में लगभग ट्रेनिंग पूरी हो चुकी है. उन्होंने बताया कि विकास कुंडू का सपना आईएएस बनने का रहा है. जिसके लिए उसने फिर से दोबारा यूपीएससी का पेपर दिया जिसमें आज घोषित हुए परीक्षा परिणाम में विकास कुंडू ने आल इंडिया में 27 वां रैंक हासिल किया.
विकास कुंडू ने 6ठी बार दी परीक्षा: विकास की मां सुलोचना कुंडू ने बताया कि विकास बचपन से ही पढ़ाई में मेधावी रहे हैं. उन्होंने 10वीं कक्षा द्रोणाचार्य स्कूल लोहचब और 12वीं कक्षा की पढ़ाई डीएवी स्कूल जींद से की. उसके बाद किरोड़ीमल कालेज दिल्ली से डिग्री की. 27 वर्षीय विकास ने छठी बार यूपीएससी की परीक्षा दी थी. विकास सेल्फ स्टडी ही करते थे.
जींद की स्वीति आर्य ने हासिल किया 366वां रैंक: जींद की 23 वर्षीय स्वाति आर्य ने दूसरे चांस में यूपीएससी में 366वां रैंक हासिल किया. स्वाति नरवाना की रहने वाली है. स्वाति के यूपीएससी क्रैक की सूचना मिलने पर उनके घर बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है. स्वाति के पिता दिलबाग आर्य संस्कृत के सेवानिवृत प्राध्यापक रहे हैं. जबकि मां राजरानी ड्राइंग टीचर हैं. तीन भाई और बहनों में स्वाति आर्य मंझली हैं.
स्वाति ने दूसरे प्रयास में किया क्वालिफाई: स्वाति आर्य बचपन से ही पढ़ाई में अव्वल रही हैं. पढाई पर अपने ध्यान को फोक्स रखा. 12वीं तक की पढाई स्वाति आर्य ने एसडी आर्य पब्लिक स्कूल नरवाना से साइंस से की और मेरिट में स्थान बनाया. जिसके बाद स्वाति ने दिल्ली के हंसराज कॉलेज दिल्ली में दाखिला लिया और 2023 में बॉटिनी में विश्वविद्यालय को टॉप कर गोल्ड मेडल लिया. जिसके बाद स्वाति ने अपने सपने यूपीएससी क्रैक करने को लक्ष्य किया. प्री को क्लीयर किया, लेकिन मेन में रह गई.
दिन में 17 घंटे करती थी पढ़ाई: दूसरी बार मेहनत के बल पर स्वाति ने 366 रैंक प्राप्त किया. स्वाति आर्य ने बताया कि उसे यूपीएससी कैक्र करने की प्रेरणा अपने माता-पिता तथा अपने गुरुजन तथा साथियों से मिली. कोचिंग का सहारा लिया. 17 से 18 घंटे पढ़ाई को दिए. जिसके बलबूते पर उसने ये मुकाम हासिल किया. स्वाति आर्य ने बताया कि अगर लक्ष्य को निधारित कर मेहनत की जाए, तो उसे अवश्य भेदा जा सकता है. स्वाति के पिता दिलबाग आर्य ने बताया कि उन्होंने बेटे तथा बेटियों में कोई फर्क नहीं समझा. बुनियादी सुविधाओं का पूरा ख्याल रखा. आज उसकी बेटी की उपलब्धी से सीना गदगद हो गया है.
रेवाड़ी के मंजीत सिंह की 490वीं रैंक: रेवाड़ी जिले के कंवाली गांव निवासी मंजीत सिंह ने 490वीं रैंक के साथ पहले प्रयास में UPSC की परीक्षा क्वालीफाई की है. मंजीत सिंह के पिता रत्न सिंह दिल्ली पुलिस में एएसआई हैं और दादा स्वर्गीय रामोतार सिंह एसआई थे. मंजीत सिंह की सफलता पर कंवाली गांव में खुशी की लहर है. पुलिस बैकग्राउंड वाले परिवार में जन्मे मंजीत सिंह ने अपने पहले प्रयास में यूपीएससी की परीक्षा क्वालीफाई की है.
चेयरमैन करणपाल ने दी शुभकामनाएं: मंजीत का परिवार मूल रूप से रेवाड़ी के गांव कवाली का रहने वाला है और फिलहाल पी-ब्लॉक 3-4, मोहन गार्डन, उत्तम नगर नई दिल्ली में रहता है. चेयरमैन करणपाल खोला ने इस उपलब्धि पर मंजीत सिंह और उसके परिवार को बधाई दी. मंजीत ने अपनी सफलता का श्रेय परिवार और शिक्षकों को दिया. उन्होंने कहा कि "सफलता केवल मेहनत, लग्न और दृढ़ इच्छा शक्ति से हासिल की जा सकती है. सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं है. जीवन में सफलता हासिल करने के लिए युवाओं को अपना लक्ष्य निर्धारित कर आगे बढ़ना चाहिए."

