बेजुबानों पर क्रूरता व शोषण के खिलाफ आगे आए हरियाणा वीगन्स

 
बेजुबानों पर क्रूरता व शोषण के खिलाफ आगे आए हरियाणा वीगन्स

भिवानी।

 राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित रिपब्लिक वीक अभियान के तहत भिवानी में युवाओं द्वारा संचालित पशु अधिकार समूह ‘हरियाणा वीगन्स’ ने  स्थानीय हुडा पार्क में  एकत्रित होकर भारत में दूध–बीफ़ के आपसी संबंध की ओर जनता का ध्यान आकर्षित किया।

देश के एक दर्जन से अधिक शहरों में सक्रिय कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर, इस समूह ने तथ्यों और आँकड़ों पर आधारित प्रभावशाली सार्वजनिक इंस्टॉलेशन के माध्यम से लोगों को तुरंत संवाद और विचार के लिए प्रेरित किया। बता दें कि हरियाणा वीगन्स युवाओं के नेतृत्व वाला एक समूह है, जो भारत में पशु अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए नियमित रूप से शांतिपूर्ण सार्वजनिक कार्यक्रमों और गतिविधियों का आयोजन करता है।
 इस मौके पर हरियाणा वीगन्स ने बताया कि भारत सरकार और वैश्विक आंकड़ों के अनुसार, भारत जहाँ दुनिया का सबसे बड़ा दूध उत्पादक है ,सालाना 230 मिलियन टन से अधिक उत्पादन करता है,वहीं यह बीफ के शीर्ष वैश्विक निर्यातकों में भी शामिल है। जो हर साल 1.3 मिलियन टन से अधिक निर्यात करता है। जिस डेयरी उद्योग से हमारे दैनिक उपभोग का दूध आता है, वही भारत की बीफ सप्लाई चेन को भी संचालित करता है। उन्होंने कहा कि जो जानवर आर्थिक रूप से लाभकारी नहीं रहते, उन्हें बेच दिया जाता है और वे निर्यात सहित मांस उद्योग में शामिल हो जाते हैं।

वहीं उन्होंने कहा कि दूध भारतीय जीवन और ग्रामीण आजीविका से गहराई से जुड़ा है। लेकिन डेयरी उद्योग का वह पहलू कम दिखाई देता है।जिसमें जानवरों को बार-बार प्रजनन के लिए मजबूर किया जाता है, जन्म के तुरंत बाद बछड़ों को उनकी माँ से अलग कर दिया जाता है और जब दूध का उत्पादन कम हो जाता है, तो उन्हें बेच दिया जाता है, लावारिस छोड़ दिया जाता है या कत्तल के लिए भेज दिया जाता है।

वीगन्स ने कहा कि कई शहरी निवासियों के लिए इसका सबसे साफ़ दिखने वाला परिणाम सड़क पर खड़ी गाय होती है ,घायल, कुपोषित, या प्लास्टिक कचरा खाते हुए। भिवानी में यह दृश्य अब आम हो चुका है। इस इंस्टॉलेशन ने यह दर्शाया कि दूध के साथ भारत का रिश्ता न तो करुणामय है और न ही वध-मुक्त। 

हरियाणा के अलग-अलग शहरों से करीब 8 एक्टिविस्ट  जागृति कौशिक, सचिन लाखमारा, निकिता सिंह, विकास, विवेक, अंकित, गीतांजलि और तिलक राज  भिवानी के  हुडा पार्क में इकट्ठा हुए तथा पशु अधिकार के प्रति लोगों को जागरूक किया।

पशु अधिकार कार्यकर्ता विकास ने कहा भारतीय उपभोक्ता डेयरी उद्योग में होने वाली पशु क्रूरता से काफी हद तक अनजान हैं। हम सभी से आग्रह करते हैं कि वे 'माँ का दूध' डॉक्यूमेंट्री देखें ताकि यह समझ सकें कि दूध और बीफ उद्योग किस तरह एक साथ मिलकर काम करते हैं। उन्होंने कहा कि डेयरी उद्योग की वजह से जहाँ एक ओर देश के भीतर गायों को लावारिस छोड़ दिया जाता है, वहीं दूसरी ओर विदेशों में भैंस के मांस का निर्यात किया जाता है और यह सब तब हो रहा है जब इस पूरे उद्योग को पशुओं के प्रति अहिंसक और दयापूर्ण बताकर प्रचारित किया जाता है।

पशु अधिकार कार्यकर्ता निकिता ने कहा कि डेयरी विज्ञापनों के कारण अधिकतर भारतीयों को लगता है कि दूध का उत्पादन एक अहिंसक प्रक्रिया है और जानवरों के लिए अच्छा भी है, पर वास्तविकता इसके बिल्कुल उलट है।पशु अधिकार कार्यकर्ता सचिन ने आगे कहा कि आज वडोदरा, भिलाई और लखनऊ में भी युवाओं ने इस सार्वजनिक प्रदर्शन का आयोजन किया।