पशु चिकित्सकों पर जानलेवा हमले के आरोपी को तुरंत जमानत मिलने पर एचएसवीए ने काली पट्टी बांध जताया रोष
सरकारी पशु चिकित्सकों पर हमले के आरोपी को तुरंत राहत मिलना कानूनी लापरवाही : डा. सुरेश सांगवान
एचएसवीए ने हमलावर पर कड़ी धाराएं लगाने और मेवात ट्रांसफर करने की उठाई मांग
एचएसवीए ने हमलावर पर कड़ी धाराएं लगाने और मेवात ट्रांसफर करने की उठाई मांग
May 15, 2026, 19:53 IST
भिवानी, 15 मई : हरियाणा स्टेट वेटरिनरी एसोसिएशन (एचएसवीए) ने हिसार स्थित हरियाणा वेटरिनरी वैक्सीन संस्थान में सरकारी पशु चिकित्सकों पर हुए जानलेवा हमले के आरोपी को गिरफ्तारी के तुरंत बाद जमानत मिलने पर रोष जताया तथा इसे प्रशासनिक एवं कानूनी लापरवाही का गंभीर उदाहरण बताया है। इसके विरोध में हरियाणा पशु चिकित्सक संघ के आह्वान पर शुक्रवार को प्रदेश भर के पशु चिकित्सकों ने काली पट्टी बांधकर कार्य किया व विरोध जताया। हरियाणा पशु चिकित्सक संघ के जिला इकाई अध्यक्ष डा. सुरेश सांगवान के नेतृत्व में नजदीकी पशु चिकित्सालयों से पशु चिकित्सक स्थानीय वेटनरी पॉलीक्लीनिक में एकत्रित हुए तथा काली पट्टी बांधकर रोष व्यक्त किया।
अध्यक्ष डा. सुरेश सांगवान ने आरोप लगाया कि पुलिस द्वारा जानबूझकर बेहद कमजोर धाराएं लगाई गईं, जिसके कारण आरोपी को तत्काल राहत मिल गई और पीडि़त अधिकारियों के साथ खुला अन्याय हुआ। साथ ही यह भी बताया कि मौके के उच्चाधिकारी ने आरोपी कर्मचारी को सस्पैंड कर दिया था तथा सस्पेंशन के दौरान मेवात हेडक्वार्टर की सिफारिश की थी। आरोप है की इसे नजरअंदाज किया गया तथा आरोपी को भिवानी नियुक्ति दी गई है। एसोसिएशन ने निदेशालय में पत्राचार कर तुरंत स्टेशन बदलने बारे भी सिफारिश की।
डा. सुरेश सांगवान ने कहा कि यह घटना केवल एक कर्मचारी विवाद नहीं, बल्कि सरकारी अधिकारियों की सुरक्षा, सम्मान और कानून व्यवस्था पर सीधा हमला है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार आरोपी ने संस्थान के अधिकारियों के कमरे में घुसकर दरवाजा अंदर से बंद किया, जान से मारने की धमकियां दी तथा एक अधिकारी की गर्दन पर धारदार हथियार से हमला किया, वह स्पष्ट रूप से हत्या के प्रयास जैसी गंभीर श्रेणी का अपराध है। इसके बावजूद पुलिस द्वारा भारतीय न्याय संहिता की धारा 109 (हत्या का प्रयास), धारा 126 एवं 127 (गैरकानूनी एवं बलपूर्वक बंधक बनाना) तथा धारा 121 एवं 221 (सरकारी कार्य में बाधा एवं सरकारी कर्मचारी को ड्यूटी से रोकना) जैसी महत्वपूर्ण धाराएं शामिल नहीं की गईं। एसोसिएशन ने इन गंभीर धाराओं को जोडऩे की मांग करते हुए ज्ञापन सौंपा था, लेकिन प्रशासन ने मामले की गंभीरता को नजरअंदाज कर दिया। परिणामस्वरूप आरोपी की गिरफ्तारी महज औपचारिकता बनकर रह गई और उसे तुरंत जमानत मिल गई। इससे प्रदेशभर के पशु चिकित्सकों में भारी आक्रोश और असुरक्षा की भावना पैदा हुई है।
संघ ने सरकार से मांग की कि कर्मचारी पर जानलेवा प्रहार की धारा लगाकर कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाए। ताकि भविष्य में पुर्नावत्ति ना हो और भिवानी से आरोपी कर्मचारी का तबादला मेवात हैडक्वार्टर किया जाए, ताकि उसे गलत कार्य की सजा मिल सकें। एसोसिएशन ने चेतावनी दी कि यदि उनकी ये मांग नहीं मानी गई तो प्रदेश भर में आंदोलन तेज कर दिए जाएंगे, जिसकी जिम्मेवारी प्रशासन की होगी। इस मौके पर उपमंडलाधिकारी डा. राजेश जाखड़, डा. राजकुमार, डा. विजय सनसनवाल, डा. सुभाष, डा. सोनू, डा. सोनू वर्मा, डा. अश्विनी, डा. अमर सरोहा आदि मौजूद रहे।
अध्यक्ष डा. सुरेश सांगवान ने आरोप लगाया कि पुलिस द्वारा जानबूझकर बेहद कमजोर धाराएं लगाई गईं, जिसके कारण आरोपी को तत्काल राहत मिल गई और पीडि़त अधिकारियों के साथ खुला अन्याय हुआ। साथ ही यह भी बताया कि मौके के उच्चाधिकारी ने आरोपी कर्मचारी को सस्पैंड कर दिया था तथा सस्पेंशन के दौरान मेवात हेडक्वार्टर की सिफारिश की थी। आरोप है की इसे नजरअंदाज किया गया तथा आरोपी को भिवानी नियुक्ति दी गई है। एसोसिएशन ने निदेशालय में पत्राचार कर तुरंत स्टेशन बदलने बारे भी सिफारिश की।
डा. सुरेश सांगवान ने कहा कि यह घटना केवल एक कर्मचारी विवाद नहीं, बल्कि सरकारी अधिकारियों की सुरक्षा, सम्मान और कानून व्यवस्था पर सीधा हमला है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार आरोपी ने संस्थान के अधिकारियों के कमरे में घुसकर दरवाजा अंदर से बंद किया, जान से मारने की धमकियां दी तथा एक अधिकारी की गर्दन पर धारदार हथियार से हमला किया, वह स्पष्ट रूप से हत्या के प्रयास जैसी गंभीर श्रेणी का अपराध है। इसके बावजूद पुलिस द्वारा भारतीय न्याय संहिता की धारा 109 (हत्या का प्रयास), धारा 126 एवं 127 (गैरकानूनी एवं बलपूर्वक बंधक बनाना) तथा धारा 121 एवं 221 (सरकारी कार्य में बाधा एवं सरकारी कर्मचारी को ड्यूटी से रोकना) जैसी महत्वपूर्ण धाराएं शामिल नहीं की गईं। एसोसिएशन ने इन गंभीर धाराओं को जोडऩे की मांग करते हुए ज्ञापन सौंपा था, लेकिन प्रशासन ने मामले की गंभीरता को नजरअंदाज कर दिया। परिणामस्वरूप आरोपी की गिरफ्तारी महज औपचारिकता बनकर रह गई और उसे तुरंत जमानत मिल गई। इससे प्रदेशभर के पशु चिकित्सकों में भारी आक्रोश और असुरक्षा की भावना पैदा हुई है।
संघ ने सरकार से मांग की कि कर्मचारी पर जानलेवा प्रहार की धारा लगाकर कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाए। ताकि भविष्य में पुर्नावत्ति ना हो और भिवानी से आरोपी कर्मचारी का तबादला मेवात हैडक्वार्टर किया जाए, ताकि उसे गलत कार्य की सजा मिल सकें। एसोसिएशन ने चेतावनी दी कि यदि उनकी ये मांग नहीं मानी गई तो प्रदेश भर में आंदोलन तेज कर दिए जाएंगे, जिसकी जिम्मेवारी प्रशासन की होगी। इस मौके पर उपमंडलाधिकारी डा. राजेश जाखड़, डा. राजकुमार, डा. विजय सनसनवाल, डा. सुभाष, डा. सोनू, डा. सोनू वर्मा, डा. अश्विनी, डा. अमर सरोहा आदि मौजूद रहे।

