चौधरी बंसीलाल विश्वविद्यालय में अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला का हुआ समापन

 
चौधरी बंसीलाल विश्वविद्यालय में अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला का हुआ समापन

भिवानी।

चौधरी बंसीलाल विश्वविद्यालय के मनोविज्ञान विभाग द्वारा आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला के दूसरे दिन विभिन्न सत्रों में विशेषज्ञों ने मानसिक स्वास्थ्य, सीखने की प्रक्रियाओं तथा पारिवारिक एवं सामाजिक सहयोग के महत्व पर गहन चर्चा की।

कार्यक्रम के प्रारंभ में विश्वविद्यालय की कुलगुरु प्रो. दीप्ति धर्माणी ने अपने संबोधन में कहा कि मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में निरंतर सीखना और स्वयं का विकास समय की आवश्यकता है। उन्होंने इस प्रकार की कार्यशालाओं को पेशेवर दक्षता बढ़ाने के लिए अत्यंत उपयोगी बताया।

इस अवसर पर कुलसचिव डा. जितेंद्र भारद्वाज ने कहा कि ऐसे शैक्षणिक आयोजनों से प्रतिभागियों को व्यावहारिक ज्ञान के साथ-साथ नई सोच और दृष्टिकोण विकसित करने का अवसर मिलता है, जो उनके पेशेवर जीवन में अत्यंत सहायक सिद्ध होता है।
 कार्यशाला संयोजक प्रो. वी. एन. यादव, मनोविज्ञान विभागाध्यक्ष प्रो. सुनीता भरतवाल, सह-संयोजक डॉ. कल्पना शर्मा एवं डॉ. संगीता शर्मा की गरिमामयी उपस्थिति भी रही।
दूसरे दिन के सत्रों में मुख्य वक्ता सुमित दत्ता ने मेमोरी नेमोनिक्स, लर्निंग तकनीकों, सामाजिक एवं मनोवैज्ञानिक समर्थन के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि प्रभावी स्मरण शक्ति के लिए नेमोनिक्स तकनीक अत्यंत उपयोगी है तथा सीखने की प्रक्रिया को सरल और स्थायी बनाने में यह महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। साथ ही, उन्होंने मानसिक स्वास्थ्य को सुदृढ़ बनाए रखने में सामाजिक और मनोवैज्ञानिक सहयोग की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
वहीं अंतरराष्ट्रीय वक्ता एनेट क्रूज़ स्मोलिंस्की ने फैमिली सपोर्ट, जीवन को प्रभावी बनाने की रणनीतियों तथा दैनिक जीवन में अपनाई जाने वाली उपयोगी ट्रिक्स पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि मजबूत पारिवारिक सहयोग व्यक्ति के मानसिक संतुलन और समग्र विकास के लिए अत्यंत आवश्यक है तथा छोटे-छोटे व्यवहारिक बदलाव जीवन को अधिक संतुलित और सफल बना सकते हैं।

कार्यशाला के सभी सत्र अत्यंत सहभागितापूर्ण रहे, जिनमें प्रतिभागियों ने सक्रिय भागीदारी करते हुए अपने अनुभव और विचार साझा किए। इस दौरान प्रतिभागियों को व्यवहारिक गतिविधियों के माध्यम से विभिन्न तकनीकों का अभ्यास भी कराया गया।

कार्यक्रम के अंत में सह संयोजक डॉ कल्पना शर्मा ने दो दिन की वर्कशॉप की रिपोर्ट प्रस्तुत की एवं आयोजन सचिव डॉ. सोनल शेखावत ने सभी अतिथियों, वक्ताओं और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद ज्ञापन किया। मंच संचालन कुसुम द्वारा किया गया।

इस प्रकार, दो दिवसीय यह अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला ज्ञानवर्धक और प्रेरणादायक वातावरण में सफलतापूर्वक संपन्न हुई, जिसने प्रतिभागियों को मानसिक स्वास्थ्य एवं आत्म-विकास के क्षेत्र में नई दिशा प्रदान की।