UPSC Success Story: पिता के दिल में छेद, मां बीमार और घर चलाने को छोटी सी दुकान; अभावों के बीच लवकेश ने सेल्फ स्टडी से क्रैक की यूपीएससी

कर्नाल के मुनक गांव के लवकेश ने संघर्ष की मिसाल पेश करते हुए 488वीं रैंक के साथ UPSC पास की है। करियाना की दुकान चलाने वाले बीमार पिता के बेटे ने बिना कोचिंग, केवल मोबाइल और सेल्फ स्टडी के दम पर यह मुकाम हासिल किया। जानें उनकी प्रेरणादायक कहानी।

 
बिना कोचिंग यूपीएससी कैसे करें

करनाल: मुनक गांव निवासी लवकेश ने चौथे प्रयास में यूपीएससी की परीक्षा पास की है. लवकेश ने 488वीं रैंक हासिल की. बता दें कि लवकेश के पिता के दिल में छेद है. उनकी मां अकसर बीमार रहती हैं. परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी. इसलिए लोकेश पढ़ाई के लिए फाइनेंस पर पैसे लिए. अब चौथे प्रयास में लवकेश ने यूपीएससी क्लियर की है.

करियाना की दुकान चलाते हैं लवकेश के पिता: लवकेश के पिता राजेश गांव में ही करियाना की छोटी सी दुकान चलाते हैं. इसी दुकान से पूरे परिवार का गुजारा चलता है. परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं है. इसलिए लवकेश पिता की दुकान में रहकर ही पढ़ाई करता था, ताकि दुकान भी चलती रहे और लवकेश की पढ़ाई भी. कई बार दुकान पर पिता के साथ-साथ लवकेश की मां या फिर उनकी बहनें भी बैठती थीं. ताकि घर का खर्च निकल सके.

कमरे और दुकान पर बैठकर पढ़ाई करता था पढ़ाई: लवकेश का घर छोटा है. कमरे की दीवारों पर पलस्तर तक नहीं हुआ है. इसी छोटे से कमरे में बैठकर और पिता की दुकान में बैठकर लवकेश ने पढ़ाई की है. परिवार की आर्थिक हालत ठीक नहीं होने के चलते बच्चों की पढ़ाई और घर के खर्च के लिए पिता राजेश को कई बार कर्ज भी लिया. फाइनेंस पर पैसे लेकर बच्चों की परीक्षा की तैयारी और फॉर्म भरने जैसे खर्च पूरे किए. इन सब के बावजूद लवकेश ने हार नहीं मानी, परिवार ने भी कभी लवकेश को पढ़ाई छोड़ने के लिए नहीं कहा. पिता को अपने बेटे की मेहनत और लगन पर भरोसा था.

पिता के दिल में छेद, मां बीमार: लवकेश के चाचा कार्तिक बताते हैं लवकेश की मां बीमार रहती हैं, पिता के दिल में छेद है. करियाना की दुकान से गुजारा चलता है. घर भी छोटा सा है, पर हमेशा लवकेश ने जी तोड़ मेहनत की और ये सफलता हासिल की. दो छोटी बहने वो भी अपने भाई की सफलता से खुश हैं. उन्होंने बताया कि भाई ने पूरी मेहनत की और उसी का परिणाम है कि वो 488 रैंक हासिल कर पाया.

बिना किसी संसाधन हासिल किया मुकाम: लवकेश ने कहा "मैंने बिना कोई कोचिंग या संसाधन के ही ये मुकाम हासिल किया है. मैंने सेल्फ स्टडी की. मोबाइल पर देखकर फ्री क्लासें ली. जिससे काफी मदद मिली. इंटरव्यू पर जाने से पहले मैंने मोबाइल पर कई वीडियो देखी, ताकि पता चल सके कि किस तरह से सवाल जवाब होते हैं."

'बेटे की मेहनत रंग लाई'- लवकेश की मां: लवकेश की मां नीरज ने बताया कि "मैं चाहती थी मेरा बेटा अफसर बने और उसने मेहनत की, उसकी सफलता रंग लाई. वो पढ़ाई करता था. उसी का परिणाम है, वो सफल हो पाया है. लवकेश को कविता लिखने का शौक है और बाकी बच्चों के लिए लवकेश एक प्रेरणा हैं कि पैसे हों ना हो अगर आप मेहनत करना जानते हो तो बस लगे रहो. सफलता आपके कदम चूमेगी."

दोबारा यूपीएससी का एग्जाम देखा लवकेश: लवकेश की मां ने कहा "आप संघर्ष कर रहे हैं, करते रहें, रुके ना, आपकी जिंदगी में अच्छा जरूर होगा. लवकेश IAS बनना चाहते हैं, उनका रैंक 488 आया है, तो शायद उन्हें IRS मिले. वो अभी भी पढ़ाई करेंगे और कोशिश रहेगी कि दोबारा एग्जाम देकर IAS बना जाए. लवकेश को उनके भविष्य के लिए बधाई, क्योंकि छोटे से घर से निकलकर उन्होंने जो मुकाम हासिल किया है उससे पूरे गांव में जश्न का माहौल है."