देश की करोड़ों महिलाओं के संघर्ष और सामथ्र्य का सम्मान है नारी शक्ति वंदन अधिनियम : प्रिया असीजा
भिवानी, 17 अप्रैल: देश की राजनीति में महिलाओं की भागीदारी को नई ऊंचाई देने वाला नारी शक्ति वंदन अधिनियम 16 अप्रैल की रात से प्रभावी हो गया है। इस ऐतिहासिक पड़ाव पर भिवानी विधानसभा से पूर्व प्रत्याशी प्रिया असीजा ने खुशी व्यक्त करते हुए इसे भारतीय लोकतंत्र के लिए एक स्वर्णिम युग की शुरुआत बताया है। उन्होंने इस क्रांतिकारी कदम के लिए देश की संसद, केंद्र सरकार और विशेष रूप से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार प्रकट किया। प्रिया असीजा ने अपने बयान में कहा कि यह अधिनियम केवल एक कानून नहीं, बल्कि देश की करोड़ों महिलाओं के संघर्ष और सामथ्र्य का सम्मान है। उन्होंने जोर देकर कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश की नारी शक्ति को वह हक मिला है, जिसका इंतजार दशकों से किया जा रहा था। 16 अप्रैल की रात से इस अधिनियम का प्रभावी होना यह सुनिश्चित करता है कि अब नीति निर्धारण और कानून बनाने की प्रक्रिया में महिलाओं की आवाज न केवल सुनी जाएगी, बल्कि निर्णायक भी होगी।
जब महिलाएं नीति निर्माण का हिस्सा बनेगी तो निर्णय प्रक्रिया में संवेदनशीलता, संतुलन और विविधता स्वयं आ जाएगी। अधिनियम के महत्व पर प्रकाश डालते हुए असीजा ने कहा कि अब भारत की बेटियां और महिलाएं राजनीति के मुख्यधारा में मजबूती से खड़ी होंगी। उन्होंने कहा कि यह अधिनियम महिलाओं को उनका उचित राजनीतिक हक और उचित प्रतिनिधित्व दिलाएगा। संसद और विधानसभाओं में महिलाओं की संख्या बढऩे से महिला सुरक्षा, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे मुद्दों पर अधिक संवेदनशीलता से कार्य होगा। यह भारतीय राजनीति में एक नई शुरुआत का संकेत है जहां महिलाएं केवल मतदाता नहीं, बल्कि नीति निर्माता के तौर पर अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज कराएंगी। वही राजनीति में आने की इच्छुक युवा युवतियों के लिए यह कानून एक मजबूत सेतु का कार्य करेगा। प्रिया असीजा ने केंद्र सरकार की इच्छाशक्ति की सराहना करते हुए कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम विकसित भारत के संकल्प को पूरा करने में एक मील का पत्थर साबित होगा। प्रिया असीजा ने अंत में दोहराया कि जब देश की आधी आबादी को शासन में बराबर की भागीदारी मिलेगी, तभी राष्ट्र का सर्वांगीण विकास संभव है। यह कानून विकसित और आत्मनिर्भर भारत की नींव को और अधिक सशक्त बनाएगा।

